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राजनांदगांव के ग्राम रेगाकटेरा में एयर गन से 5 बंदरों की बेरहमी से हत्या

राजनांदगांव के ग्राम रेगाकटेरा में एयर गन से 5 बंदरों की बेरहमी से हत्या

 के एस ठाकुर

राजनांदगांव, 20 अक्टूबर। एक ओर तो सरकार वन्य प्राणियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए लाखों रुपए खर्च कर रही है। वहीं दूसरी ओर आए दिन वन्य प्राणियों के शिकार एवं अन्य कारणों से मौत की वजह से वन क्षेत्रों में वन्य प्राणियों की संख्या कम होते जा रही है। राजनांदगांव वन मंडल के अंतर्गत राजनांदगांव परिक्षेत्र के ग्राम रेगाकटेरा में वन्य  प्राणी  पांच बंदरों को बेरहमी से एयर गन से मार  हत्या कर दी गई ।

मिली जानकारी के अनुसार ग्राम में बंदरों का उत्पात आए दिन मचा रहता था एवं फसलों को नुकसान पहुंचा जाता है। इसको देखते हुए ग्रामीणों ने इस समस्या से निजात पाने के लिए बंदरों को भगाने की  उपाय सोची और गांव से ₹100 प्रति घर  इकट्ठा कर ग्राम साल टेकरी के  विशाल और अन्य दो शिकारी से संपर्क कर उन्हें इस कार्य हेतु जिम्मेदारी सौंपी गई एयरगन उपलब्ध कराया।


 शिकारियों ने गांव में आकर पांच बंदरों की हत्या कर दी जबकि दो बंदर  जख्मी हुए हैं, उनमें से एक बंदर अभी भी डर के मारे पेड़ पर ही चढ़ा हुआ है सूचना मिलने पर पुलिस विभाग एवं वन विभाग की टीम गांव तो जरूर पहुंची लेकिन समाचार लिखे जाने आरोपी वन विभाग  एवं पुलिस की गिरफ्त से  बाहर है। यह तो अच्छा हुआ  गांव के युवक ज्ञानेश्वर साहू ने निडरता  एवं मानवता का परिचय देते हुए इसकी सूचना लाल बाग थाने एवं वन विभाग को दी  तब कहीं जाकर दोनों विभाग के अमला सक्रिय हुए। अन्यथा गांव के युवक द्वारा  सूचना देने का साहस नहीं दिखाया जाता तो शायद यह मामला भी ठंडा पड़ जाता ।क्योंकि बंदर की हत्या पश्चात उन्हें या तो दफना दिया जाता या कुत्तों को खिलाया जाता। वन्य प्राणियों की हत्या की की इतनी बड़ी घटना घट चुकी है, और गांव के  लोग यह बोल रहे कि बंदरों को भगाने के लिए  शिकारियों को बुलाया गया था लेकिन उनके द्वारा उनकी हत्या कर दी गई। 

सवाल ये उठता है कि यदि ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा किया है शिकारियों को बुलाया है तो अभी तक दोषी पकड़ से बाहर कैसे हैं या तो वन विभाग इस पूरे प्रकरण को हल्के में ले रही है या फिर दोषियों को बचाना चाह रही है यहां यह बताना  और भी जरूरी है कि राजनांदगांव वन मंडल के चौकी परिक्षेत्र में पांच  6 वर्ष पूर्वी ऐसी एक घटना घटी थी ,जहां शिकारियों ने सैकड़ों की संख्या में बंदरो को मौत के घाट उतार दिया था । और उनके अपराधी भी पकड़ से बाहर रहे जबकि उस घटना में विभाग के डिप्टी रेंजर और वनरक्षक की संलिप्तता भी पाई गई थी। हालांकि विभाग ने अपनी नाकामी को छुपाने के लिए  उन कर्मचारियों को निलंबित भी किया था, किंतु उस प्रकरण के अपराधी भी आज तक पहुंच से बाहर है।