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निलंबित जिला मिशन समन्वयक भुपेश साहू की नियुक्तियों की जांच की हुई मांग

निलंबित जिला मिशन समन्वयक भुपेश साहू की नियुक्तियों की जांच की हुई मांग

राजनांदगांव। भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता में घिरे राजीव गांधी शिक्षा मिशन के निलंबित डीएमसी भुपेश साहू की परेशानी कम होती नजर नहीं आ रही है। पहले उच्च कार्यालय से निलंबन हुआ तो मलाईदार पद गया और निलंबन के पश्चात् एफआईआर की मांग हो रही है तो वहीं दूसरी तरफ अब उनके नियुक्तियों की जांच की मांग भी होने लगी है।

छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि भूपेश साहू मूलतः आदिम जाति विकास विभाग यानि ट्रायबल विभाग के व्याख्याता है। उनकी शिक्षा विभाग में एंट्री कैसे हुई और फिर राजीव गांधी शिक्षा मिशन में प्रतिनियुक्ति पर प्रभारी, सहायक कार्यक्रम समन्वयक के पद पर दिनांक 13.09.2013 से लेकर दिनांक 24.04.2015 तक कार्यरत थे और फिर दिनांक 25.04.2015 से जिला मिशन समन्वयक के पद पर नियुक्ति, ट्रायबल के कर्मचारी का शिक्षा विभाग में सीधे कलेक्टर द्वारा नियुक्ति, अब जांच का विषय बना गया है।

श्री पॉल का कहना है कि जिला मिशन समन्वयक के पद पर किसी वरिष्ठ प्राचार्य की ही नियुक्ति हो सकती है, तो एक कनिष्ठ व्याख्याता की इस पद पर सीधे नियुक्ति कैसे हुई, जबकि भुपेश साहू प्रतिनियुक्ति पर थे तो कलेक्टर राजनांदगांव के द्वारा उन्हें सीधे नियुक्ति आदेश कैसे जारी कर दिया था, जबकि जिला मिशन समन्वयक के पद पर प्रतिनियुक्ति के लिए प्रस्ताव कलेक्टर को भेजा था, लेकिन कलेक्टर ने नियुक्ति आदेश जारी कर दिया था।

श्री पॉल के द्वारा भुपेश साहू की प्रथम नियुक्ति, प्रथम प्रतिनियुक्ति, द्वितीय प्रतिनियुक्ति और नियुक्ति आदेश की जांच करने शिक्षा विभाग के सचिव से मांग की गई है।