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जिला, पुलिस प्रशासन की लापरवाही, चौकी घेराव

जिला, पुलिस प्रशासन की लापरवाही, चौकी घेराव


मामला-ग्राम बड़ी करेली रेत खदान का

धमतरी, 27 मई। मगरलोड विकासखंड अंतर्गत ग्राम बड़ी करेली में पुलिस विभाग द्वारा रिपोर्ट लिखने में किये गये भेदभावपूर्ण नीति के विरूद्ध ग्रामीणों द्वारा थाने का घेराव किया जायेगा। इस हेतु ग्रामीणों ने जिला एवं पुलिस प्रशासन पर ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से एकतरफा कार्यवाही किये जाने का आरोप लगाते हुए यह कदम उठाने का निश्चय किया है। बड़ी करेली रेत खदान से ठेकेदार द्वारा 8 हजार ट्रिप रेत का परिवहन कर नियम विरूद्ध कार्य किया गया है। इस कार्य में सुप्रीम कोर्ट और पर्यावरण विभाग के द्वारा पर्यावरण संतुलित करने बनाये गये नियमों को भी अधिकारियों की मिलीभगत से इसे अंजाम दिया गया है। यहां तक निर्धारित मात्रा में खुदाई का आदेश मिलने के बाद भी मनमाने स्तर पर नदी की खुदाई की गई जिसके कारण ग्राम के पूर्वजों के नर कंकाल निकलने लगे। इसी बात को लेकर ग्रामीणजन पिछले चार महीनों से धरना प्रदर्शन कर ठेकेदार के विरूद्ध जांच की मांग कर रहे हैं। 

जिला धमतरी में अनेक ऐसी रेत खदानें जहां रेत ठेकेदारों की दादागिरी, नियम विरूद्ध कार्य कर शासन को पिछले लंबे समय से रॉयल्टी की राशि देने में आनाकानी की जा रही है जिसका मुख्य रूप से जिम्मेदार खनिज अमला है जिसके द्वारा पिटपास आबंटन के बाद कितनी मात्रा में ट्रकें परिवहन कर रही हैं, इसे लेकर कोई कार्यवाही या जांच नहीं की जा रही है जिससे ठेकेदार एवं खनिज अमला की मिलीभगत स्पष्ट है। शासन को मिलने वाली करोड़ों रूपये की रॉयल्टी अब तक मिलीभगत के चलते डकार ली गई है। दिन और रात जेसीबी, चैन माउंटेन मशीन से खुदाई कर नदी का सीना छलनी कर दिया गया है। कहीं-कहीं पर तो अब जमीन दिखाई दे रही है। नदी से रेत गायब हो चुकी है। इन्हीं रेत खदानों में एक रेत खदान ग्राम बड़ी करेली की है जहां के जागरूक नागरिक शासन को मिलने वाले रॉयल्टी, ठेकेदार द्वारा नहीं दिये जाने की जानकारी देकर इसकी जांच की मांग कर रहे हैं। फरवरी माह में इन ग्रामीणों ने कलेक्टोरेट का भी घेराव किया था। ज्ञापन में रेत ठेकेदार के द्वारा नियम विरूद्ध किये गये विभिन्न कार्यों की जांच एवं मात्र 300 ट्रिप रेत परिवहन का रॉयल्टी पटाये जाने को गलत ठहराते हुए इस संपूर्ण मामले की जांच कर रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीणों की मांग को नजरअंदाज करते हुए लगातार ठेकेदार का पक्ष लिया जा रहा है और प्रशासन यह मानने को तैयार नहीं है कि ठेकेदार के विरूद्ध जांच प्रारंभ की जाये। इसी से नाराज ग्रामीणों ने ग्राम बड़ी करेली से निकलने वाली रेत पर लगाम लगाने चरणबद्ध तरीके से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं जिनसे चर्चा करने हेतु अनुविभागीय अधिकारी कुरूद एवं जनपद पंचायत सीईओ द्वारा ग्रामीणों को बुलाकर उनसे चर्चा की गई।

ग्राम पंचायत बड़ी करेली के सभाकक्ष में आयोजित इस बैठक में जनपद पंचायत सीईओ द्वारा ग्रामीणों की समस्याओं को बैठक में पहुंचे अनुविभागीय अधिकारी के समक्ष रखी गई। इन समस्याओं में पहला ठेकेदार द्वारा 8 हजार ट्रिप रेत परिवहन कर मात्र 300 ट्रिप पिटपास की रॉयल्टी पटाये जाने, नर्सरी में रोपित वृक्षों को जेसीबी से रौंदने, निर्धारित क्षेत्र से बाहर जाकर खुदाई करना, नियम विरूद्ध नदी को गहराई तक खोद देना तथा नदी से निकलने वाले नर कंकालों की अपमानित करना, जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच की मांग की गई। लेकिन इस पर अनुविभागीय अधिकारी ने कोई संतुष्टिप्रद जवाब न देते हुए कहा कि ठेकेदार के विरूद्ध पुरानी जांच नहीं की जा सकती है। ग्रामीणों के द्वारा ठेकेदार द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र, निर्धारित क्षेत्र की कॉपी मांगने पर उन्होंने कहा कि आरटीआई लगाकर इसे प्राप्त किया जा सकता है। इस तरह जो भी खुदाई की गई है इसकी खनिज विभाग द्वारा जांच कराई जायेगी। जब खनिज विभाग से ही मामले की जांच कराया जाना बोला जा रहा है तो राजस्व विभाग का इसमें क्या रोल? इस तरह राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारी द्वारा कहना है और ठेकेदार का पक्ष रखना ग्रामीणों के नजर में न्यायसंगत नहीं है। बैठक में जब ग्रामीणों को धमकाया जाने लगा तो राजद्रोह जैसे मुकदमा दर्ज किये जाने की बात कही गई तो वे वहां से उठकर जाने लगे। ग्रामीणों ने कहा कि हमारी मांग को अधिकारी नजरअंदाज कर रहे हैं, इसके बाद ग्राम के सात लोगों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराया गया है जिसकी धमकी अनुविभागीय अधिकारी ने बैठक के दौरान दी थी। एफआईआर दर्ज होने के बाद ग्राम की महिलाओं ने ठेकेदार एवं गुर्गों के विरूद्ध भी रिपोर्ट दर्ज करानी चाही। लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज कराने में आनाकानी करने लगे तब इन्होंने एसपी से फरियाद की और रिपोर्ट दर्ज की गई।

बताया जाता है कि ग्रामीणों के विरूद्ध ठैकेदार द्वारा की गई रिपोर्ट को तुरंत दर्ज किया गया जबकि महिलाओं के गंभीर मामले जिसमें उन्हें जातिसूचक गाली देकर प्रताडि़त किया गया है, उसकी रिपोर्ट लिखे जाने में आनाकानी और एसपी के हस्तक्षेप के बाद रिपोर्ट दर्ज कर उसकी जांच प्रारंभ नहीं की जा रही है। इससे नाराज ग्रामीणों ने चौकी बड़ी करेली का घेराव करने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों के द्वारा शासन को रॉयल्टी दिलाये जाने सहित उचित मांगों को रखते हुए धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। उसे रोकने के लिये प्रशासनिक स्तर पर जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार ग्रामीणों को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से कार्यवाही की जा रही है जिसे अनुचित ठहराते हुए चौकी घेराव का निर्णय तो लिया ही गया है। लेकिन इसके बाद भी अगर ग्रामीणों के मांगों की जांच नहीं की गई तो ठेकेदार एवं उनके सहयोगी अधिकारियों के विरूद्ध धरना प्रदर्शन किये जाने की बात छनकर बाहर आ रही है। पिछले लंबे समय से चलने वाले इस आंदोलन में जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा घोर लापरवाही की जा रही है। यदि वरिष्ठ अधिकारी चाहते तो इस मामले में दखल देते हुए अनुविभागीय अधिकारी द्वारा कहे गये शब्द जिसका ऑडियो वायरल हुआ है, उसकी जांच सहित ठेकेदार के द्वारा किये गये नियम विरूद्ध कार्य की भी जांच कर इस मामले का पटाक्षेप किया जा सकता है।