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जेडीयू की लोकप्रियता में भारी गिरावट के बावजूद मास्टर ब्लास्टर के तौर पर उभरे पीएम

जेडीयू की लोकप्रियता में भारी गिरावट के बावजूद मास्टर ब्लास्टर के तौर पर उभरे पीएम

नईदिल्ली।   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  महागठबंधन को मात दे विनिंग ट्रॉफी उठाने में ‘मैन ऑफ द मैच’ की भूमिका निभाई.  उनके स्ट्राइक रेट ने नीतीश कुमार की सुस्त परफॉर्मेंस की भी भरपाई कर दी. और ये सब प्रधानमंत्री ने कोविड-19 और बाढ़ जैसी चुनौतियों से भरी मुश्किल पिच पर करके दिखाया. 

पीएम बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के मास्टर ब्लास्टर के तौर पर उभरे हैं. जब सामने वाली टीम की कमान गजब की फाइटिंग स्प्रिट वाले युवा टी-20 खिलाड़ी तेजस्वी यादव के हाथ में थी. लालटेन सत्ता से बाहर है, तीर ने अपनी धार खो दी है और कमल पूरे ओज के साथ खिल गया है.  

बिहार में मोदी फैक्टर के चलने का सबसे बड़ा सबूत ये है कि इसकी मौजूदगी ने कैसे बीजेपी को शानदार स्ट्राइक रेट, यानि कुल चुनाव लड़ी सीटों में से जीती हुई सीटों का प्रतिशत, हासिल करने में मदद की. वो भी सहयोगी जेडीयू की लोकप्रियता में भारी गिरावट के बावजूद.

10 वर्षों में, एनडीए के इन दो सहयोगियों के बीच सियासी हाईर्राकी (अनुक्रम) उलट गई है. नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला जेडीयू 2010 में  सीनियर प्लेयर था, अब, बीजेपी और मोदी बड़े खिलाड़ी हैं. पहले बीजेपी का अच्छा प्रदर्शन नीतीश कुमार पर निर्भर था. 2020 में स्थिति पलट गई. 

जब बिहार विधानसभा चुनाव 2020 का पहला का चरण खत्म हुआ तो धारणा बनी कि कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले एमजीबी के सिर पर जीत का ताज सजने जा रहा है. इसके बाद प्रधानमंत्री ने अपनी रैलियों में बैटिंग की रणनीति को बदला. 

दूसरे चरण के लिए, पीएम ने मतदाताओं को सत्ता में आरजेडी की वापसी को उसके पुराने राज की याद दिलाते हुए ‘जंगल राज के 'युवराज' के बारे में बात की. मतदाताओं को तेजस्वी के पिता लालू यादव के कुशासन के बारे में याद दिलाने की रणनीति अपनाई गई, जबकि तेजस्वी ने लालू समेत पूरे परिवार को इस चुनाव प्रचार से सोच समझ कर अलग रखा था.

 3 नवंबर को अररिया और सहरसा की रैलियों में, पीएम मोदी ने आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों पर आरोप लगाया कि उन्हें जय श्री राम और भारत माता की जय के नारों के साथ समस्या है. 

चुनाव आयोग की ओर से नतीजे घोषित किए जाने के बाद बीजेपी ने सिर्फ यही नहीं कहा कि नीतीश सीएम होंगे, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि सीएम के रूप में, वो उन सभी अधिकारों के हकदार बने रहेंगे जो उन्हें वरिष्ठ सहयोगी होने के नाते हासिल थे. 

बीजेपी के टॉप सूत्रों का कहना है कि पार्टी दो कारणों से जेडीयू को छोड़ना नहीं चाहेगी. यदि सीएम पद से इनकार किया जाता है, तो जेडीयू को अभी भी आरजेडी की ओर से अपने साथ हाथ मिलाने और सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है. दूसरा, बीजेपी ईबीसी और महिलाओं के बीच पैठ बनाने के लिए नीतीश कुमार का उपयोग करना चाहती है.