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हाईकोर्ट ने मानस ट्रस्ट पर सरकारी आदेश को रद्द किया, अशोक गजपति राजू को बहाल किया

हाईकोर्ट ने मानस ट्रस्ट पर सरकारी आदेश को रद्द किया, अशोक गजपति राजू को बहाल किया

विजयवाडा।  आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने सोमवार को राज्य सरकार के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें सुश्री पी संचिता को मानस और सिंहचलम देवस्थानम ट्रस्ट बोर्डों का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था और सरकार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और तेलुगु देशम पार्टी के वरिष्ठ नेता पी अशोक गजपति राजू को इस पद पर बहाल करने का आदेश दिया।

वाई एस जगन मोहन रेड्डी की अध्यक्षता वाली सरकार ने मार्च 2020 में मानस और सिंहचलम देवस्थानम ट्रस्ट बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष को बर्खास्त करने का आदेश पारित किया था और सुश्री पी संचिता को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया।

श्री अशोक गजपति राजू ने सरकारी आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और तर्क दिया कि वह मानस और सिंहचलम देवस्थानम के विरासती ट्रस्टी है और सरकार उन्हें कदापि हटा नहीं सकती। उच्च न्यायालय ने दलीलें सुनने के बाद सरकारी आदेश को खारिज कर दिया और सरकार को अशोक गजपति राजू को मानस और सिंहचलम देवस्थानम ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में बहाल करने का निर्देश दिया।

इस दौरान तेलुगू देशम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एन चन्द्रशेखर रावत ने सोमवार को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश का स्वागत किया जिसमें मानस ट्रस्ट और सिंहचलम देवस्थानम के संबंध में वाईएसआरसीपी सरकार द्वारा जारी किए गए सरकारी आदेश को खारिज कर दिया गया।

श्री नायडू ने कहा अंतत: कानूनी प्रकिया और न्यायपालिका ने मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी की हजारों एकड़ प्रमुख भूमि और मंदिरों से संबंधित कई करोड़ की संपत्तियों को लूटने की नापाक योजनाओं पर पूर्ण विराम लगा दिया, जो कि उनके मनमाफिक अध्यक्ष चुनने के बाद मानस ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे हैं।

तेदेपा प्रमुख ने एक बयान में कहा कि उच्च न्यायालय का आदेश उन हजारों छात्रों और कर्मचारियों के लिए नया जीवन होगा, जो कई पीढ़ियों से पूसापाडु वंश की उदारता से लाभान्वित हो रहे थे।

श्री नायडू ने कहा कि मनसा के कर्मचारियों के दुख भरे दिनाें से निजात मिलेगी क्योंकि निहित स्वार्थों ने भी उनका वेतन रोक दिया है। उन्होंने इसे पूर्व केंद्रीय मंत्री पी अशोक गजपति राजू और मानस ट्रस्ट द्वारा प्रदान की जा रही धार्मिक गतिविधियों पर निर्भर सभी लोगों की जीत करार दिया।