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भारत में तेजी से फैल रहा ब्लैक फंगस,वाराणसी में एक मरीज का आधा चेहरा हटाना पड़ा 

भारत में तेजी से फैल रहा ब्लैक फंगस,वाराणसी में एक मरीज का आधा चेहरा हटाना पड़ा 


स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि पिछले साल कोविड -19 के प्रकोप के बाद से महाराष्ट्र में एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक फंगल संक्रमण, म्यूकोर्मिकोसिस के कारण 52 लोगों की मौत हो गई है। Mucormycosis, जिसे ब्लैक फंगस के रूप में भी जाना जाता है, कुछ ठीक होने के बाद विषय के बारे में बहुत बात की गई और बरामद किए गए कोरोनोवायरस रोगियों को बीमारी से संक्रमित पाया गया, जिनके लक्षणों में सिरदर्द, बुखार, आंखों के नीचे दर्द, नाक या साइनस की भीड़ और दृष्टि का आंशिक नुकसान शामिल हैं।

पहली बार, राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने ब्लैक फंगस से होने वाली मौतों की एक सूची तैयार की है, "अधिकारी ने कहा ,इस वक्त गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, झारखंड और राजस्थान में ब्लैक फंगस के मामले सामने आ रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना से ठीक होने वाले मरीज ब्लैक फंगस का शिकार हो रहे हैं. इसमें मरीज की आंख की रोशनी जा सकती है. जबड़े और नाक की हड्डी गल सकती है. समय पर उपचार नहीं होने पर जान भी जा सकती है. हालांकि, समय पर इलाज किया जाए तो मरीज ठीक हो सकता है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर किसी को नाक में जलन, त्वचा में लालपन, आंखों में सूजन व दर्द, आंख व नाक के नीचे लाल-काले धब्बे, बुखार, खांसी, सिर दर्द, सांस लेने में तकलीफ या सीने में दर्द की तकलीफ हो तो चिकित्सक से सलाह लें. अगर समय पर उपचार शुरू नहीं किया गया तो यह दिमाग तक जाता है. ब्लैक फंगस बीमारी में डॉक्टरों की टीम उपचार करती है, जिसमें आंख, नाक, गले के डॉक्टर होते हैं

मध्य प्रदेश में कोरोना के कहर के बीच अब ब्लैक फंगस का खतरा भी बढ़ रहा है. प्रदेश में 12 मई तक ब्लैक फंगस के 50 मामले सामने आ चुके हैं, जिसके बाद सरकार सतर्क हो गई है. बुधवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 'ब्लैक फंगस के संक्रमण की घटनाएं सामने आ रही हैं जो बहुत भयानक है. अभी तक प्रदेश में 50 रोगियों की पुष्टि हुई है.