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नेता जी खाली उपस्थिति देंगे कि कुछ लोगों की जान भी बचाएंगे - लालू गबेल

नेता जी खाली उपस्थिति देंगे कि कुछ लोगों की जान भी बचाएंगे - लालू गबेल


सामाजिक कार्यकर्ता की कोरोना काल में नेताओं को नसीहत

सक्ती, 21 मई।  सामाजिक कार्यकर्ता लालू गबेल ने राजनेताओं को कोरोना काल में ऐसी नसीहत दी कि सबको सोचना पड़ेगा। वर्तमान में कोरोना का जो भयानक तांडव मानव जीवन पर टूट पड़ी है, उसको सामाजिक कार्यकर्ता लालू गबेल बहुत करीब से देख रहे, श्री गबेल कोरोना को लेकर शासन प्रशासन ही नही सभी पक्ष विपक्ष नेताओं की जमीनी हकीकत को भी भाप रहे। श्री गबेल कहते है कि कोरोना का तांडव भारत में एक साल से भी ऊपर हो गया लेकिन कोरोना से निपटने सारी व्यवस्था राजनीति तक सिमट गई हैं। सारे नेता जी लोग अभी अभी कोरोना हॉस्पिटल कोविड सेन्टरों और वैक्सिनेशन सेन्टरों के दौरे पर है, लेकिन उद्देश्य खाली उपस्थिति तक ही है, कोरोना और कोरोना की व्यवस्था पर जमीनी हकीकत को झांक नही रहे है, बस हाथ हिलाए और चले गए। उन सभी नेताओं को मैं पूछना चाहता हूँ कि कोरोना से लोग इतने मर रहे, न जाने कितने घर बेघर बर्बाद हो गए, कितनो के पूरा संसार उजड़ गये इन सब की जमीनी हकीकत पर नजर क्यों नहीं डालते नेता जी लोग। जनता के ठेकेदारों आज जनता की जान जा रही,बर्बाद बेघर हो रही फिर भी राजनीति ही करते हो।

लोगो की जान क्यूं नही बचाते हो, जान बचाने राजनीति क्यों नहीं करते हो। किसको नही पता है कि कोरोना की ईलाज के लिए अगर कुछ नही है तो वह है हॉस्पिटल और हॉस्पिटल की व्यवस्था। लेकिन हॉस्पिटल और हॉस्पिटल की व्यवस्था पर किसी भी नेताओं की नजर नही जाती। कोरोना मरीज को ऑक्सीजन चाहिए कोरोना मरीज को वेंटिलेटर चाहिए कोरोना मरीज को इंजेक्शन और दवाई चाहिए कोरोना मरीज को अच्छे देखभाल चाहिए कोरोना मरीज को एक अच्छा अस्पताल चाहिए नेता जी, लेकिन कोई एक भी नेता नही जो इन सब पर सोचे कि जब सबको पता है कोरोना से बचने पर्याप्त ऑक्सीजन और वेंटिलेटर बहुत आवश्यक है तो कोई नेता सरकार के हो या विपक्षी दलों के सभी कोरोना हॉस्पिटल में ये प्रमुख व्यवस्था पर बात क्यों नही करते। क्यों ऑक्सीजन और वेंटिलेटर के बिना लोग मर रहे। क्यों इंजेक्शन, दवाइयों की कालाबाजारी और अनुपलब्धता हो रही आखिर क्यों सरकारी तंत्र के नेताओं की नजर इन व्यवस्थाओं पर नही पड़ रही।

जब सारी की सारी सरकारी योजनाओं को कोरोना से निपटने लगाया जा रहा है तो जो एकदम जरूरी है ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, इंजेक्शन, दवाई, डॉक्टर और सभी कोरोना हॉस्पिटलों की अच्छी व्यवस्थाओं पर क्यों नही लग रही। क्यों अभी तक सरकारी कोविड सेन्टरों में इन सब सुविधाओं का आभाव है। जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय लोग समय पर उचित ईलाज नही मिलने पर मर रहे। आखिर कोविड सेन्टरों की दुर्दशा इन नेताओं को क्यों नही दिखती की जगह जगह बने कोविड सेन्टरों में सारी व्यवस्था है कि नही और नही तो क्यो नही, सोचते भी नही होंगे।

सामाजिक कार्यकर्ता लालू गबेल ने कहा कि कोरोना से निपटने जितने कोविड सेंटर सरकार बनाई है उतने में पर्याप्त ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, इंजेक्शन, दवाई की व्यवस्था कर दी होती तो बहुत से जान बच गए होते। विडंबना यहाँ तक है कि जिलों के भी प्रमुख कोविड सेन्टरों में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, इंजेक्शन, दवाइयों की आभाव है। जबकि सरकार द्वारा कोरोना के नाम पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा। 

श्री गबेल ने कहा कि किसी को कोई मतलब नही है जनता की मौतों पर, नेता जी लोग लांसो पर भी राजनीति का रंग चढ़ा दे रहे है। कोई एक नेता चाहते तो भी जनता की मौत का सिलसिला थम जाता।

श्री गबेल ने कहा कि एक सांसद एक विधायक भी अगर चाहते तो उनके एकसाल के निधि में 20-20-30-30 वेंटिलेटर खरीदे जा सकते है सैकड़ो ऑक्सीजन मशीनें लिए जा सकते है, इनकी सक्रियता से इंजेक्शन,दवाइयों, फ्लोमिटर आदि की कालाबाजारी थम जाती, इनके पहल से बहानेबाज डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ,सफाई कर्मचारी और अन्य प्रशानिक व्यवस्था सुधर जाती, अगर ये चाहते तो निजी हॉस्पिटलों में जो कोरोना के नाम लूटमार है वो रुक जाता, लेकिन ऐसा नेता जी लोगो के फितरत में ऐसा कहाँ।

सामाजिक कार्यकर्ता लालू गबेल ने नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि अगर जनता की थोड़ी भी चिंता है तो सारे नेता अपने विधानसभा और संसदीय क्षेत्र में अच्छे हॉस्पिटल जहाँ संसाधन के अभाव में कोई मेरे ना और अच्छे स्कूल जहाँ अच्छी शिक्षा के साथ सेवा भाव का संस्कार मिले को सर्वोच्च प्राथमिकता दे। और वर्तमान में सभी कोविड सेन्टरों को कोरोना के ईलाज हेतु सभी व्यवस्था को दुरुस्त कराए और जल्द से जल्द वैक्सिनेशन कार्य को पूर्ण करने में जोर दे ताकि जनता की जीवन सुरक्षित रहे।

श्री गबेल ने कहा कि सभी राजनैतिक दलों के नेता लोग राजनीति जीवन देने के लिए करें जीवन लेने के लिए नही। कोरोना उतना खतरनाक नही है, जितना उसके ईलाज में अव्यवस्था चल रही।