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मध्यान्ह भोजन बनाने वाले रसोइयों के मानदेय में राज्य सरकार करे बढ़ोतरी - अशोक देवांगन

 मध्यान्ह भोजन बनाने वाले रसोइयों के मानदेय में राज्य सरकार करे बढ़ोतरी - अशोक देवांगन

कार्यरत रसोइयों के मानदेय कम कई स्कूलों से छोड़ रहे हैं काम

राजनांदगांव । सरकारी स्कूलों सभी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मिड डे मील योजना में मध्यान्ह भोजन खाना बनाने वाले कार्यरत रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी नहीं होने से कई स्कूलों से रसोइयों ने काम छोड़ रहे हैं, जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 08 के जिला पंचायत सदस्य व संचार सकर्म विभाग के सभापति तथा आबकारी विभाग समिति के सलाहकार अशोक देवांगन ने छत्तीसगढ़ के राज्य सरकार व पंचायत मंत्री से मांग करते हुए कहा कि महंगाई को देखते हुए रसोइयों को दी जाने वाली मानदेय कम है, रसोइयों के मानदेय को बढ़ाते हुए प्रतिदिन के हिसाब से कम से कम 100 रुपये मिलना चाहिए जबकि अभी प्रतिदिन के हिसाब से रसोइयों को मानदेय के रूप में 40 रुपये ही मिलता है, जबकि स्वीपरो को प्रतिमाह 27 रुपये मिलता है, इसी प्रकार कार्यरत रसोइयों की मानदेय कम से कम प्रत्येक माह 3000 रुपये मिलना चाहिए छत्तीसगढ़ राज्य में कांग्रेस की सरकार आने से रसोइयों को उम्मीद थी, कि रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी होगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ राज्य सरकार बढ़ती हुई महंगाई को देखते हुए सरकारी स्कूलों में सभी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मिड डे मील योजना में मध्यान्ह भोजन खाना बनाने वाले कार्यरत रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी करें, मेरे द्वारा जिला पंचायत की बैठक में 06 अक्टूबर इस बात को रखा गया जिसमें सर्वसम्मति से रसोइयों की मानदेय में बढ़ोतरी को लेकर राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जाए, और साथ ही साथ महंगाई को देखते हुए मेनू मिड डे मील योजना में भी बढ़ोतरी किया जाए।

श्री देवांगन ने आगे कहा कि राज्य सरकार व पंचायत मंत्री बढ़ती हुई महंगाई को देखते हुए सभी सरकारी स्कूलों में मिड डे मील योजना में मध्यान्ह भोजन खाना बनाने वाले कार्यरत रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी किया जाए तभी कई स्कूलों से काम छोड़ रहे रसोइयों को रोका जा सकेगा और साथ ही साथ रसोइयों की जो आर्थिक स्थिति खराब हो रहा है, उसमें सुधार हो सकता है।