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लापरवाह अधिकारी, बेपरवाह सरकार : शासकीय योजना से वंचित हो रहे आदिवासी विद्यार्थी

लापरवाह अधिकारी, बेपरवाह सरकार : शासकीय योजना से वंचित हो रहे आदिवासी विद्यार्थी

खरसिया। कोरोना ने ट्राईबल एरिया में ही आदिवासी बच्चों से शासकीय योजनाओं का लाभ छीन लिया है। एक ओर एजुकेशन डिपार्टमेंट द्वारा संक्रमण की इन विषम परिस्थितियों के मद्देनजर पढ़ाई तुम्हर द्वार के तहत कभी पेड़ की ओट में तो कभी आंट-परछी में विद्यार्थियों को एकत्रित कर शिक्षा दी जा रही है, मध्याह्न भोजन भी सूखे राशन के रूप में प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुंचाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर छात्रावास तथा आश्रम लंबे समय से बंद होने के कारण आदिवासी बच्चे ना तो पौष्टिक आहार जैसी खाद्य सामग्री प्राप्त कर पा रहे और ना ही सही तरीके से ऑनलाइन क्लास संचालित हो पा रही। ऐसे में शिक्षा से भी वंचित हो रहे हैं।

सुदूर वनांचल क्षेत्र में निवासरत इन विद्यार्थियों को सही ढंग से नेटवर्क नहीं मिल पाता। वहीं अधिकारियों के लापरवाह अंदाज में हो रही मॉनिटरिंग को लेकर शिक्षक भी ऑनलाइन क्लास के लिए उत्साहित नहीं देखे जा रहे। ऐसे में ज्यादातर विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंच भी नहीं पा रही। इधर अधिकारी एवं शिक्षक काम के प्रति उदासीन देखे जा रहे हैं, वहीं शासकीय तौर पर भी लंबे समय से बंद पड़े छात्रावास तथा आश्रमों को खोलने कोई पहल नहीं की जा रही। यहां तक की महज 1 महीने ही सूखा राशन आदिवासी विद्यार्थियों तक भेजने के निर्देश के बाद सरकार ने भी इस योजना से अपने हाथ खींच लिए हैं। वहीं इस 1 माह के राशन का खर्च भी अधीक्षक गणों को भुगतना पड़ा।

▪️ इन्हें निर्देश की है प्रतीक्षा

अनुसूचित क्षेत्र में ही आदिवासी विद्यार्थियों के लिए बंद पड़ी शासकीय योजनाओं तथा वनांचल के बच्चों की शिक्षा को लेकर जब अधिकारियों से जानना चाहा तो उन्हें यह भी नहीं पता कि कितने विद्यार्थी ऑनलाइन क्लास से जुड़ पा रहे हैं और कितने विद्यार्थियों ने आश्रमों में पुनः एडमिशन लिया है। दरअसल तो आश्रम शालाओं में अभी भी नवप्रवेशी छात्रों का प्रवेश लगभग नगण्य है, आश्रम अधीक्षकों की कार्य के प्रति उदासीनता के कारण प्रवेश कार्य अब तक पूर्ण नहीं हो पा रहा। वहीं महज एक बार दिशा निर्देश देने के पश्चात अधिकारियों ने यह जानना भी आवश्यक इसलिए नहीं समझा कि उन्हें उच्चाधिकारियों अथवा शासन द्वारा यह सब कुछ जानने के लिए कोई नया निर्देश नहीं मिल पाया। तो क्या इस तरह के बहाने बनाकर अपने कर्तव्यों से विमुख होना तथा वनांचल के बच्चों की शिक्षा के प्रति भरपूर लापरवाही करना उचित कहा जा सकता है?