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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से भूपेश बघेल की जनता के लिए यायावरी

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से भूपेश बघेल की जनता के लिए यायावरी

सरकार के पास टॉप टू बॉटम यानी पंचायत से लेकर मंत्रालय तक बहुत सारी एजेंसी, बहुत अमला होता है, लोगों की खोज खबर लेंने, उनसे संपर्क करने के लिए। इसके  बावजूद प्रदेश की जनता कभी जनदर्शन के नाम पर तो कभी जन निवारण शिविर के नाम पर तो कभी आपकी सरकार आपके द्वार के नाम और प्रशासन गांव की ओर के जरिये एकत्र होती और उन्हें फिर भी वैसी राहत, मदद नहीं मिल पाती जैसी उम्मीद लेकर वह आती है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के राज में लोग मुख्यमंत्री निवास में गुरुवार को होने वाले जनदर्शन में दूर-दूर से अपनी समस्या के समाधान के लिए आते थे और उनकी समस्या लगभग स्थानीय होती थी, जिसका निराकरण ब्लाक, तहसील, जिला स्तर पर हो सकता था, किन्तु उन्हें मुख्यमंत्री के पास जनदर्शन में ही आकर थोड़ा बहुत संतोष मिलता था। मुख्यमंत्री से मिलना बहुत से लोगों के लिए जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल हो जाता था। छत्तीसगढ़ सरकार ने हमर छत्तीसगढ़ योजना के जरिये पूरे प्रदेश के पंचायत प्रतिनिधियों को राजधानी बुलाया, बहुत कुछ दिखाया और मुख्यमंत्री से भी उनके घर में मेल मिलाप करवाया।


ऐसा बहुत कम हुआ है कि जब कोई मुख्यमंत्री खुद रात्रि विश्राम करके सीधे जनता, जनप्रतिनिधि और अफसरों से जिलों में जाकर मिलता रहा हो। भूपेश बघेल जमीनी नेता हैं, वे लगातार राजधानी से बाहर अलग-अलग जिलों में विशेषकर आदिवासी आबादी बहुल्य जिलों में लोगों से सीधे मिल रहे हैं। भूपेश बघेल किसी राजमहल के नेता नहीं हैं, जो दरबार लगाएं या जनदर्शन दें। वे खेत-खलिहान में आम लोगों की तरह पले बढ़े हैं। उनकी सोच में गांव का गरीब, खेतहर मजदूर, किसान और वे लोग हैं जिन तक शासन कम ही पहुंच पाता है। भूपेश बघेल की अपने छत्तीसगढ़ की जनता से मिलने की ये यायावरी ने थोड़े ही दिनों में बस्तर और सरगुजा संभाग के 11 जिलों का धुआंधार दौरा कर, ढाई हजार किलो की यात्रा कर, 9 स्थानों पर रात्रि विश्राम किया। जो लोग भूपेश बघेल तक नहीं आ सकते ऐसे लोगों से मिलने भूपेश बघेल खुद जा रहे है।

विनोद कुमार शुक्ल की एक कवितांश हैं-

जो मेरे घर कभी नहीं आएँगे

मैं उनसे मिलने

उनके पास चला जाऊँगा।

जो लगातार काम से लगे हैं

मैं फुरसत से नहीं

उनसे एक जरूरी काम की तरह मिलता रहूँगा।

भूपेश बघेल लोगों से जरूरी काम की तरह मिल रहे हैं। उनका दौरा हवा हवाई नहीं है। ठेठ छत्तीसगढ़ी देशज अंदाज में लोगों से मिलने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में यूं ही 15 साल की भाजपा सरकार को 90 सीटों की विधानसभा में सबसे कम 15 सीटों पर लाकर बिठाया है। ये अलहदा बात है  कि इतना बड़े बहुमत को संभालना, उनके हितो का, ईगो का ध्यान रखना भी एक चुनौतीपूर्ण काम है, जिसे भूपेश बघेल एक नट की तरह बखूबी साध रहे हैं। अपने कड़े संघर्ष, संपर्क और संगठन क्षमता की वजह से आज पूरे देश में सबसे ज्यादा बहुमत से कांग्रेस छत्तीसगढ़ में काबिज है। जिसे कोई भी बड़ा व्यापारी कथित चाणक्य खरीद-फरोख्त करके सत्तामुक्त नहीं कर सकता। भूपेश बघेल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए इसी तरह का दौरा कर संगठन को साधा। मुख्यमंत्री बनने के बाद अब वे सत्ता को साध रहे हैं।


अपने जिला भ्रमण के दौरान उन्होंने समाज प्रमुखो, संगठन के पदाधिकारियों, मैदानी अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी सरकार के बारे में फीडबेक लिया। जो लोग योजाओं के क्रियान्यवन में पूरी ईमानदारी, संवेदनशीलता के साथ लगे हैं, उनका मनोबल बढ़ाया। अपनी सत्ता के साथियों के साथ मौका मिलने पर कैरम की गोटियों पर स्टाइकर के जरिये हाथ भी आजमाया। छत्तीसगढ़ की जनता का पूरे कोरोनाकाल में जिस तरह से ध्यान रखकर हौसला अफजाई की गई उसी का विस्तार यह यात्रा है। इस यात्रा के जरिये मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के लोगों को विश्वास दिया रहे हैं कि उन्होंने सही नेतृत्व को चुना है।


अक्सर देख गया है कि चुनाव के दौरान नेता जनता के चरणों में होता है और जीतने के बाद जनता नेता के चरण ढूंढती है, और उनके कर कमल होकर केवल उद्घाटन, शिलान्यास या बड़े-बड़े मंचों आयोजनों में ही दिखाई देते हैं। जो नेता जमीनी होते हैं, जनता के दुख-दर्द से सीधे जुड़े होते हैं, वे हमेशा जनता के बीच लोकप्रिय होते हैं। हमारे देश में बहुत से नेता आसमानी सुलतानी है। बहुत से लोगों को विरासत में नेतागिरी मिली है। अपने बूते अपना जनाधार खड़ा करने वाले नेता कम हैं। जनता का वास्तविक नेता कभी भी जनता से दूर नहीं हो सकता। उसे जनता के बीच जाकर ही प्राणवायु मिलती है। वह जानता है कि उसकी असली ताकत उसका अपना जन समुदाय है। ऐसा जननेता के रहते हुए भी छत्तीसगढ़ की अफसरशाहों के ये हाल है कि कोरोना संक्रमण के बहाने उन्होंने नवा रायपुर नामक टापू में खुद को सुरक्षित करके बाकी सबका आना प्रतिबंधित कर रखा है। सवाल यहां यह भी है कि क्या मुख्यमंत्री कोरोना संक्रमण से परे हैं? देश का घर जननेता किसी न किसी बहाने जनता के बीच पहुंच रहा है किन्तु अफसरशाही क्वारंटाइन है।


17 दिसंबर 2018 को मुख्यमंत्री बनने के बाद भूपेश बघेल ने अपने दौरे की शुरूआत बिलासपुर से की थी। रायपुर के बाद बिलासपुर छत्तीसगढ़ का सबसे प्रमुख शहर और न्यायधानी है। अलग-अलग कार्यक्रम के जरिये पूरे राज्य में पहुंचने वाले भूपेश बघेल ने 2020 के अंत में दिसंबर माह में सरगुजा संभाग का तीन दिनों तक लगातार दौरा किया। मुख्यमंत्री ने सरगुजा और बस्तर संभाग के जिलों का सघन दौरा कर 5936 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। अपने दौरे के समय उन्होंने खुलकर लोगों से बात की और जगह-जगह स्थानीय जरूरतों के अनुसार करोड़ों रुपये की लागत के विकास कार्यों की स्वीकृति जारी की। इस दौरान उन्होंने अपनी सरकार के दो साल के कार्यकाल के बारे में लोगों से पूछा, साथ ही खेती-बाड़ी से जुड़े कार्यों के अलावा अपनी गोधन न्याय योजना, गौठान के बारे में किसानों से रूबरू मिलकर बातचीत की। पूरे राज्य के लोगों से मिलने की अपनी प्राथमिकता को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नये साल की शुरूआत चार जिलों जिनमें रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा और जांजगीर-चांपा शामिल है में सघन दौरे से की।


भूपेश बघेल ने अपने सघन दौरे की शुरूआत जब सरगुजा संभाग से की तो लोगों को ढाई-ढाई साल की किस्से कहानी को हवा देने का मौका मिला। सत्ता के गलियारों में अफवाहों का बाजार गर्म करने वाले लोगों को लगाकर भूपेश बघेल महल में सेंध लगाने में लगे हैं, किन्तु उनके दौरे निरंतर होने लगे तो अफवाहों पर अपने आप विराम लगा। छोटे राज्य और सोशल मीडिया पर अफवाहों का बाजार हमेशा गर्म रहता है। तमाम अफवाहों के बावजूद शीर्ष नेतृत्व से लेकर जमीनी कार्यकर्ता, यहां की जनता हकीकत से वाकिफ है। सब जानते हैं की मोदी जी के प्रभामंडल वाली भाजपा को रोकने का सामर्थ और संगठन क्षमता किसमें है। देश में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की दिक्कत यह है कि वह स्वयं अफवाहों को जन्म देकर ऐसी स्थिति निर्मित कर देता है कि लोग कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति का मध्यप्रदेश, राजस्थान की तरह हर जगह मजा लेना चाहते हैं। किस्सा एं ढाई साल उसी का विस्तार है।


मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने भ्रमण के दौरान नवगठित गौरेला-पेंड्रा मरवाही जिले की ग्रामपंचायत जोगीसार कैंपा मद से नरवा विकास योजना के अंतर्गत जैतरणी नाला पर 36 लाख 53 हजार रुपए की राशि से निर्मित स्टाप डेम का निरीक्षण किया। यह वही जोगीसार है, जहां राज्य के पहले मुख्यमंत्री ने जन्म लिया था। जैतरणी नाला पर ही 4 करोड़ 99 लाख रुपये की राशि के कराए गए भूजल संरक्षण कार्यों का लोकापर्ण भी किया। फिर ग्रामीणों से मुलाकात की उनसे बातचीत की। कोरबा जिले के अपने प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने जशपुर जिले के प्रवास के दौरान रणजीता स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में जिले को 792 करोड़ रुपए 86 लाख रुपए की लागत के 196 विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी।


जांजगीर दौरे के समय उन्होंने सम्मेलन में 1083 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। रायगढ़ जिले को 1146 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की दी सौगात।


भूपेश बघेल के पास अपने दौरे के समय बात रकने के लिए बहुत सारे मुद्दे है। सबसे बड़ा मुद्दा धान खरीदी का है। दो साल के अपने कार्यकाल में सरकार ने किसानों के लिए कर्जमाफी, धान खरीदी, सुराजी गांव, राजीव गांधी किसान न्याय योजना और गोधन न्याय योजना वन आश्रितों के कल्याणकारी योजनाओं, नरवा-गरवा-घुरवा-बाड़ी, ग्रामीण विकास, दाई-दीदी क्लीनिक, सार्वभौम पीडीएस, गढ़ कलेवा योजना, पौनी पसारी योजना, पढ़ई तुंहर दुआर जैसी अनेक योजनाएं लागू की, जिनसे गांवों है। सरकार की पकड़ निरंतर मजबूत हो रही है।


छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा हमारा संकल्प कहने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने संकल्प को दोहराते हुए बिलासपुर एयरपोर्ट का नामकरण बिलासा बाई केंवटीन के नाम पर करने की घोषणा की। उन्होंने बिलासपुर की सेंट्रल लायब्रेरी का नामकरण पूर्व विधायक स्व. पंडित शिवदुलारे मिश्र के नाम पर किया। गोधन न्याय योजना के जरिये दो रुपए किलो गोबर खरीदकर पूरे देश में नई पहल करने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को यदि कोरबा प्रवास के दौरान तानाखार विधानसभा के ग्राम पोलामी का एक आदिवासी किसान मिलकर सौ रुपए भेंट देकर ये कहता है कि मेहा गोबर बेच के 32 हजार रुपए कमाए... हावंव। उही म के सौ रुपए आप ल भेंट करना चाहथो। तो भूपेश बघेल का खुश होना लाजमी है वरना तो लोग गोबर और चारा को एक करके अभी से घोटाले तलाश रहे हैं, और भूपेश बघेल हैं कि रूकने का नाम नहीं ले रहे हैं, उनकी यात्रा निरंतर जारी है।