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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -टीकाकरण अभियान: बहुत कठिन है डगर पनघट की

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से  -टीकाकरण अभियान: बहुत कठिन है डगर पनघट की

-सुभाष मिश्र
अंधविश्वास, अफवाह, आशंका, आडंबर, अशिक्षा और अपनी मूर्खताओं पर अभिभूत होकर अवैज्ञानिक सोच के बीच कोरोना महामारी से निपटने के लिए चलाये जा रहे टीकाकरण अभियान को कैसे सफलता मिलेगी, यह सबसे चुनौतीपूर्ण कार्य है। टीकाकरण अभियान की डगर पनघट की बहुत कठिन दिखलाई देती है। इस डगर को आसान बनाने के लिए सभी स्तरों पर बहुत से प्रयास प्रलोभन भी है, किन्तु अब तक की रफ्तार बताती है की दिल्ली अभी दूर है। 16 जनवरी 2021 के बाद से अभी तक देश की 24 करोड़ 27,2693 लोगों को टीके लगे हैं जिनमें टीके की दूसरी डोज अभी तक 4 करोड़ 72 लाख लोगों को ही लग पाई है। 21 जून से केंद्र सरकारी ओर से योग दिवस के अवसर पर राष्ट्रव्यापी नि:शुल्क टीकाकरण अभियान की शुरुआत होगी।

हमारे देश में टीकारण अभियान की शुरूआत 16 जनवरी 2021 से हुई। भारत में जब कोरोना के मामले कुछ दिनों से 3 लाख से अधिक सामने आने लगे और जब लोगो की मौते होने लगी तब हमारे देश के लोगो को टीके का महत्व समझ में आया तब तक टीके को लेकर बहुत सी शंका-आशंका, विवाद हो चुका था।
कोरोना वायरस अकेले नहीं आया उसने अपने साथ बहुत सारी अफवाहें, भ्रम और आशंकाए लाया जिनका जवाब अभी तक दिया जा रहा है। हमारे देश में जनवरी 2020 में कोरोना का पहला मामला आया जबकि विश्व के कुछ देशों में सन् 2019 से ही कोरोना के प्रकरण आ रहे थे। समझदार देशों ने इससे निपटने वैक्सीन बनाने का काम शुरू कर दिया और अप्रेल 20 आते-आते वैक्सीन के आर्डर भी संबंधित कंपनियों को देने शुरू कर दिये। हमारे देश में इस मामले में बड़ी चूक हुई।
सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया ने 11 मिलियन खुराक की आपूर्ति की और भारत बायोटेक ने पहले चरण में 5.5 मिलियन खुराक की आपूर्ति की, जो 16 जनवरी को शुरू हई और सबसे पहले फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को लक्षित किया। इसके विपरीत, नवंबर के अंत तक, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ ने विभिन्न टीकों की 500 मिलियन खुराक का अग्रिम-आदेश दिया था, जो उस स्तर पर उपयोग के लिए भी मंजूरी नहीं दी गई थी। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल के अनुसार सरकार ने सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया से कोविशील्ड की 25 करोड़ खुराक और भारत बायोटेक से कोवैक्सिन की 19 करोड़ खुराक खरीदने का आदेश दिया है। यह आर्डर, दोनों निर्माताओं के पास पहले से सुरक्षित वैक्सीन आर्डर के अतिरिक्त है, इस साल जनवरी से जुलाई तक कुल 53.6 करोड़ टीकों की आपूर्ति की जाएगी।
टीकाकरण कार्यक्रम में सरकारों से चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि जब से भारत में वैक्सीन पर काम शुरू हुआ, तभी से कुछ लोगों ने ऐसी बातें कहीं जिससे आम लोगों के मन में शंका पैदा हुई। कोशिश ये भी हुई कि वैक्सीन निर्माताओं का हौसला पस्त हो, बधाएं आए। भारत की वैक्सीन आई तो अनेक माध्यमों से शंका और आशंका को बढ़ाया गया। भांति-भांति के तर्क प्रचारित किए गए। इन्हें भी देश देख रहा है। जो लोग वैक्सीन को लेकर आशंका और अफवाहें फैला रहे हैं, वो भोले-भाले, भाई-बहनों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसी अफवाहों से सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने इस आशंका, भ्रम और भय को दूर करने का आव्हान करते हुए कहा है कि मैं आप सबसे, प्रबुद्धों से और युवाओं से अनुरोध करता हूं कि वैक्सीन को लेकर जागरूकता बढ़ाने में सहयोग करे।  
देश के ग्रामीण इलाकों में वैक्सीन को लेकर उपजे डर, अंधविश्वास और अफवाहें टीकाकरण अभियान को खटाई में डाल सकतीं हैं। कई ग्रामीण इलाकों के लोग इस अभियान का विरोध कर रहे हैं। टीकाकरण के कारण होने वाले दुष्प्रभाव और डोज लेने के बाद भी मौतों की रिपोर्ट ने अफवाहों को और हवा दी है कि कोविड वैक्सीन घातक है।

भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में लोग टीकाकरण से दूर भागते नजर आए। बीजेपी ने झारखंड में टीकाकरण के संबंध में भ्रम फैलाने के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। राजधानी रांची से सटे हुए ग्रामीण क्षेत्रों में टीका से संबंधित भ्रम के कारण स्वास्थ्य कर्मियों से मारपीट की जा रही है तो फिर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में क्या स्थिति होगी। भारतीय समाज में जब-जब महामारी आती है, तो सिर्फ महामारी ही नहीं आती, बल्कि उसके साथ आती है बहुत सारी भ्रांतियां, अंधविश्वास और ऊटपटांग आडंबर। भारत में जब 19वीं सदी में चेचक जैसी महामारी ने पैर पसारा, तो ज़्यादातर ग्रामीण इलाको में इसे देवी या माता का नाम देकर कई प्रकार के अंधविश्वासों से जोड़ा गया। तब से लेकर आज तक, यदि किसी को ऐसा कुछ भी होता है, तो ज़्यादातर लोगों के मुंह से निकलता है कि- माता आ गई है।

जब देश आक्सीजन के संकट से जूझ रहा था बहुत से लोग धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ, हवन करके कथित आक्सीजन का वातावरण उत्पन्न करने की कोशिश भी करते नजर आये।
कुछ महाज्ञानी किस्म के लोग एक चम्मच घी, जलती लकड़ी में डालने पर व अनुष्ठान करने से 10 टन ऑक्सिजन उत्पन्न होती है, और जितना घी उपयोग होगा उतनी ही अधिक ऑक्सीजन बनेगी, तो कहीं यह भी दावा किया गया कि कंडे पर घी डाल कर जलाने पर 2-3 किलोमीटर हवा में बैक्टेरिया मर जाते हैं तो किसी ने गाय के सांस छोडऩे, गोबर से भी ऑक्सीजन निकलने की बात भी कही।

पंजाब के ग्रामीण इलाकों में लगातार बढ़ रहे कोरोना के कहर को रोकने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने कोरोना मुक्त गांव अभियान के अंतर्गत 100 फ़ीसदी टीकाकरण लक्ष्य को हासिल करने वाले प्रत्येक गांव को 10 लाख रुपए की विशेष विकास अनुदान देने की घोषणा की।  
देश में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने वैक्सीनेशन अभियान को तेज कर दिया है। इस समय देश में 18 से ज्यादा उम्र वाले सभी नागरिकों को वैक्सीन लगाई जा रही है। ऐसे में सरकार अब आपको घर बैठे 5,000 रुपये जीतने का मौका दे रही है। सरकार की ओर से जो भी व्यक्ति वैक्सीन लगवाने का फोटो एक अच्छी टैगलाइन के साथ शेयर करेगा उसे इनाम 5,000 रुपये का कैश प्राइज मिलेगा। सरकार को इसे पल्स पोलियो जागरूकता अभियान की तरह जनअभियान बनाकर सभी वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।
प्रसंगवश ताज भोपाली का ये शेर -
मैं चाहता हूं निज़ाम-ए-कुहन बदल डालूं
मगर ये बात फक़त मेरे बस की बात नहीं
उठो बढ़ो मेरी दुनिया के आम इंसानों
ये सब की बात है दो-चार दस की बात नहीं