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फेडरेशन की महारैली के बाद कर्मचारियों की मांगों पर मंत्रालय में हलचल शुरू

फेडरेशन की महारैली के बाद कर्मचारियों की मांगों पर मंत्रालय में हलचल शुरू

रायपुर, 24 दिसंबर। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आवाहन पर 14 सूत्री मांगों की ओर शासन का ध्यान आकृष्ट करने हेतु 1 दिसंबर 11 दिसंबर को क्रमशः कलम रख मशाल उठा आंदोलन के तहत मशाल रैली एवं 11 दिसंबर को जिलों में वादा निभाओ रैली के बाद मांगों पर सकारात्मक निर्णय ना होने के कारण 19 दिसंबर को रायपुर राजधानी में महारैली वादा निभाओ रैली के रूप में निकाली गई तत्पश्चात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को संबोधित मांग पत्र जिला प्रशासन के प्रतिनिधि को सौंपा गया वादा निभाओ रैली के बाद मंत्रालय में 14 सूत्री मांगों पर कार्यवाही प्रारंभ करते हुए अनियमित कर्मचारियों के संबंध में जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सभी विभाग प्रमुखों व जिलों से मंगाई जा रही है। 

फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा एवं प्रमुख प्रवक्ता विजय कुमार झा ने बताया है कि चरणबद्ध आंदोलन के बाद राजधानी रायपुर में कर्मचारियों का सैलाब वादा निभाओ महारैली में टूटा इसके पश्चात मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया सामान्य प्रशासन विभाग ने 14 सूत्री मांगों के संबंध में सभी विभागों से जानकारी मंगाई है जो बिंदु जिस विभाग से संबंधित है उनसे अभिमत सही जानकारी एकत्र की जा रही है दूसरी ओर अनियमित कर्मचारियों के संबंध में भी सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी अपर मुख्य सचिव सचिव विभागाध्यक्षों से जानकारी मांगी है इसके पूर्व भी शासन द्वारा 2 वर्ष पूर्व जानकारी मंगाई गई थी 2 साल के शासनकाल में मंत्रालय में निचले स्तर के अधिकारियों जिला संभाग एवं मंत्रालय विभाग प्रमुख द्वारा जानकारी ना दिए जाने से प्रदेश में कितने अनियमित कर्मचारी हैं उस पर व्यापक भ्रम व्याप्त है कुछ कर्मचारी नेता 180000 अनियमित कर्मचारी तो कुछ लोग 135000 अनियमित कर्मचारी होने का दावा करते हैं वास्तविक रुप से प्रदेश के लगभग 85,000 अनियमित कर्मचारी नियमितीकरण की मांग के लिए विगत 5 वर्षों से संघर्षरत है किंतु पूर्ववर्ती सरकार तथा वर्तमान में 2 वर्ष के कार्यकाल में अनियमित कर्मचारियों के वास्तविक आंकड़े का संकलन भी ना होना प्रदेश के निचले स्तर के अल्प वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है 16 दिसंबर को जारी सामान्य प्रशासन के परिपत्र से इस बात का संतोष है कि चरणबद्ध आंदोलन के बाद शासन स्तर पर नियमितीकरण के लिए हलचल जारी हुआ है वर्तमान में प्रदेश में सीधी भर्ती पर रोक होने के कारण अनियमित कर्मचारियों को उनकी योग्यता अनुसार रिक्त पदों पर नियमित किया जाना चाहिए किसी कारणवश यदि नियमित नहीं किया जा सकता तो कम से कम जॉब सिक्योरिटी सेवा गारंटी नियमित कर्मचारियों जैसे 62 वर्ष तक सेवा करने का अवसर तो प्रदान करना ही चाहिए इसी प्रकार 35 हजार से ऊपर स्कूल सफाई कर्मचारी भी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के रिक्त पदों पर नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं उन्हें भी यदि तत्काल नियमितीकरण नहीं किया जा सकता तो कम से कम अंशकालिक के स्थान पर पूर्णकालिक घोषित करने से इन आरक्षित वर्गों के अधिकांश स्कूल सफाई कर्मचारियों को मात्र ₹2000 मासिक मानदेय प्राप्त होता है वह बढ़कर ₹10000 मासिक हो जावेगा तथा 2 घंटे के स्थान पर पूरा 8 घंटा नियमित कर्मचारियों की भांति स्कूलों में कार्य कर अपनी सेवाएं दे सकते हैं।

 फेडरेशन के नेता कमल वर्मा विजय कुमार झा सतीश मिश्रा संजय सिंह राजेश चटर्जी बीपी शर्मा ओंकार सिंह पंकज पांडे एनएच खान यशवंत वर्मा कैलाश चौहान इदरीश खान देवलाल भारती आरके रिछारिया रामकिशोर कोसले सत्येंद्र देवांगन अजय तिवारी आदि नेताओं ने 14 सूत्री मांगे जिन में महंगाई भत्ता सातवां वेतनमान का एरियर पदोन्नति क्रमोन्नति नियमितीकरण अनुकंपा नियुक्ति कोरोना पीड़ित परिवारों के बीमा राशि जैसे संवेदनशील मामलों पर शासन स्तर पर कार्यवाही प्रारंभ होने को आंदोलन की परिणति निरूपित करते हुए शीघ्र अनिश्चितकालीन आंदोलन के पूर्व कर्मचारी हित में आदेश प्रसारित करने की मांग मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से की है।