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मनोरंजन के बदलते आशियाने

मनोरंजन के बदलते आशियाने

जयंती रंगनाथन

हर साल फिल्म इंडस्ट्री धमाकेदार फिल्मों के साथ दिवाली का आगाज करती थी। इस साल भी लक्ष्मी, लूडो, छलांग, सूरज पर मंगल भारी  जैसी फिल्में आई हैं, थियेटर में नहीं, ओटीटी प्लेटफॉर्म पर। क्या यह मनोरंजन की दुनिया को नई तरह से देखने की शुरुआत है? पिछले साल बॉलीवुड की कमाई लगभग 4,400 करोड़ रुपये थी, जो साल 2018 के मुकाबले 20 प्रतिशत अधिक थी। इस साल घटकर मात्र 750 करोड़ में सिमट गई है। जाहिर है मार्च के बाद से कोविड की वजह से थियेटर बंद हैं। शुरू में आशंका तेज थी कि क्या निर्माता-निर्देशक अपनी तैयार फिल्मों को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज करेंगे? इसका जवाब भी जल्दी ही मिल गया। जैसे-जैसे लॉकडाउन और कोविड  का आतंक बढ़ता गया, यह साफ होता चला गया कि थियेटर में फिल्मों की रिलीज इस साल संभव नहीं होगी। हालांकि पिछले महीने से देश के कई राज्यों में 50 प्रतिशत क्षमता या ऑक्यूपेन्सी के साथ थियेटर खुल गए हैं, लेकिन इनमें जनता न के बराबर जा रही है। 

इस साल कई बड़ी फिल्में ओटीटी प्लेटफॉर्म यानी नेटफ्लिक्स, अमेजन, हॉट स्टार, जी 5, सोनी लिव आदि पर रिलीज हुईं। बॉक्स ऑफिस पर इन फिल्मों का कैसा हश्र रहा, यह इनके ओटीटी पर देखे गए आंकड़ों से जांचना मुश्किल है। पर अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना की फिल्म गुलाबो-सिताबो को लगभग पांच करोड़ व्यूज मिल चुके हैं। अक्षय कुमार की हाल में आई फिल्म लक्ष्मी को दिवाली धमाका माना जा रहा था। आलोचकों ने इस फिल्म को नकार दिया है। क्या यह फिल्म अगर थियेटर में रिलीज होती, तो पिट जाती? क्या इससे अक्षय कुमार की स्टार वैल्यू कम हो जाती? 

फिल्म पंडित व आलोचक जोगिंदर टुटेजा कहते हैं, ‘ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित होने वाली फिल्मों से स्टार की कीमत तय नहीं होती। स्टार सिस्टम दुनिया भर में बना रहेगा। वेब सीरीज या ओटीटी पर रिलीज होने की वजह से उनकी चमक कम नहीं होती। उम्मीद है कि अगले साल की शुरुआत में फरवरी-मार्च तक थियेटरों में वापस रौनक लौटने लगेगी। इस वक्त सबकी तरह, थियेटरों को भी कोरोना वायरस की वैक्सीन का ही इंतजार है।’

फिलहाल कबीर खान की स्पोट्र्स ड्रामा 83 और रोहित शेट्टी की पुलिस ड्रामा सूर्यवंशी  ऐसी फिल्में हैं, जो ओटीटी पर रिलीज होने के दबाव से बची हुई हैं। ये दोनों फिल्में अगले साल की शुरुआत में थियेटरों में रिलीज होंगी। इस बीच तमाम सावधानियों के साथ लगभग सभी सितारों ने नई फिल्मों की शूटिंग शुरू कर दी है। अमिताभ बच्चन कौन बनेगा करोड़पति  रियलिटी शो का काम खत्म होने के बाद अपनी आने वाली फिल्मों ब्रह्मास्त्र, झुंड  और चेहरे की शूटिंग शुरू करेंगे।

बॉलीवुड में जहां फिल्म रिलीज होने के बाद सत्तर से अस्सी प्रतिशत तक की कमाई घरेलू होती है, वहीं हॉलीवुड में ठीक इसका उल्टा है। हमारे लिए यह बनिस्बत आसान था कि इस साल तैयार हुई अधिकांश फिल्में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो पाईं। इसका मतलब है कि निर्माताओं को नुकसान नहीं हुआ। हां, उनकी कमाई जरूर घट गई। अगर फिल्म थियेटर में हिट हो जाती और चार से छह हफ्ते बाद ओटीटी पर आती, तो उनकी कमाई लगभग तीन गुना बढ़ जाती, लेकिन हॉलीवुड का खेल अलग है। वहां फिल्मों का बजट हमसे चार से बीस गुना अधिक होता है। सिर्फ अमेरिकी बाजार से उन्हें 30 से 40 प्रतिशत की ही कमाई होती है। उनकी असली कमाई चीन, जापान, यूरोप, मध्य-पूर्व और भारत से होती है। इस वक्त हॉलीवुड की हालत बॉलीवुड से ज्यादा खस्ता है। कोविड काल में वहां थियेटर में बस एक ही बड़ी फिल्म रिलीज हो पाई टैनेट, उसकी भी कमाई मात्र 350 मिलियन डॉलर में सिमटकर रह गई। यह फिल्म अपने इंटरनेशनल रिलीज का इंतजार कर रही है। हॉलीवुड की बड़ी फिल्में अपने बजट की वजह से ओटीटी पर रिलीज नहीं हो पा रही हैं। हॉलीवुड के सभी बड़े निर्माताओं ने अपनी फिल्में अगले साल रिलीज करने का निर्णय लिया है।  

फिल्मों के अलावा वेब सीरीज माध्यम शहरी युवाओं में दो साल से लोकप्रिय था, लेकिन कोरोना की वजह से हुए लॉकडाउन, घर पर रहने की विवशता, वर्क फ्रॉम होम आदि की वजह से अचानक इस उद्योग को गति मिल गई। बॉबी देओल, सुष्मिता सेन, चंद्रचूड़ सिंह, अभय देओल, अभिषेक बच्चन जैसे कलाकार, जिन्हें अरसे से फिल्मों में काम नहीं मिल रहा था, वेब सीरीज में काम करने लगे। सैफ अली खान के बाद अब शाहरुख खान भी वेब सीरीज में काम करने को राजी हो गए हैं। 

इन दिनों ओटीटी पर बन रही सीरीज में विविधता आ गई है। वजह है, मेट्रो से आगे निकलकर छोटे शहरों और कस्बों के दर्शकों तक इनकी पहुंच बढ़ गई है। सारे ओटीटी प्लेटफॉर्म मासिक चार्ज लेते हैं। मोबाइल यूजर्स के लिए मनोरंजन का यह सौदा मुफीद भी है। क्या वेब सीरीज की वजह से आने वाले समय में हमारे मनोरंजन को देखने का नजरिया बदलेगा? क्या वेब सीरीज थियेटरों में जाने वाली जनता का रुझान बदल देगी? यह सवाल तब भी आया था, जब नब्बे के दशक में वीडियो पायरेसी की वजह से फिल्में थियेटर के बजाय घरों में वीसीआर पर देखी जाने लगी थीं। लेकिन उस दौर में अक्षय कुमार, शाहरुख खान, आमिर खान और सलमान खान की फिल्में आईं, जो खूब चलीं और एक बार फिर जनता थियेटर की तरफ मुड़ गई।

जोगिंदर टुटेजा कहते हैं, ‘हमारे देश की मात्र पांच से दस प्रतिशत जनता अगर किसी फिल्म को देखती है, तो फिल्म हिट हो जाती है। आज भी देश भर में महज दस से पंद्र्रह प्रतिशत लोग ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्म या सीरीज देख रहे हैं। यह प्रतिशत पिछले साल के मुकाबले तीन गुना बढ़ा है। पर यह कहना गलत या जल्दबाजी होगी कि इसकी वजह से हमारे यहां लोग थियेटर में फिल्म देखने जाना बंद या कम कर देंगे। ये दोनों ही कामयाब रहेंगे और एक-दूसरे के पूरक रहेंगे।’ नोटबंदी के बाद ठीक अगले महीने जब दंगल  फिल्म रिलीज हुई, तब सबने कहा कि बाजार में पैसे ही नहीं हैं। फिल्म पिट जाएगी। पर इस फिल्म ने सिर्फ भारत से 350 करोड़ कमाए।

बड़े बजट की अपनी फिल्म सूर्यवंशी  को थियेटर  में परदे पर देखने को आतुर निर्माता-निर्देशक रोहित शेट्टी कहते हैं, ‘कल को जब थियेटर खुलेंगे, एक बार फिर सितारों की धूम मचेगी, फिल्में आएंगी, हिट होंगी और हम सब बड़े परदे पर फिल्म देखने का पहले की तरह मजा लेंगे। जो मजा और नशा बड़े परदे पर फिल्म देखने का है, वह कभी खत्म नहीं हो सकता।’