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स्वतंत्रता दिवस पर 1,380 शूरवीरों को गैलेंट्री अवॉर्ड : 23 आईटीबीपी के जवानों को भी मिलेगा पुरस्कार

स्वतंत्रता दिवस पर 1,380 शूरवीरों को गैलेंट्री अवॉर्ड : 23 आईटीबीपी के जवानों को भी मिलेगा पुरस्कार

नई दिल्ली । 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 1,380 जवानों को गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने 662 पुलिस कर्मियों को वीरता के लिए पुलिस पदक, 628 जवानों को राष्ट्रपति पुलिस पदक और 88 कर्मियों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक देने का एलान किया है। इसके अलावा 662 कर्मियों को सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक दिया जाएगा। सीमा पर तैनात आईटीबीपी के  23 जवानों को वीरता के लिए पुलिस पदक से नवाजा जाएगा , इनमें से 20 को मई-जून, 2020 में पूर्वी लद्दाख की झड़पों में बहादुरी के लिए सम्मानित किया गया है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के 257 सहित कुल 630 सुरक्षा कर्मियों को उनकी बहादुरी के लिए पदक से सम्मानित किया गया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस कर्मियों को आतंकवाद के खिलाफ अभियान और कानून-व्यवस्था से संबंधित कार्यों के लिए वीरता पदक प्रदान किए गए हैं। देश भर में उग्रवाद विरोधी और नक्सल विरोधी अभियानों में शामिल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को अब तक 152 पदक दिए जा चुके हैं। आईटीबीपी के प्रवक्ता विवेक पांडे ने कहा कि आईटीबीपी को 23 वीरता पदक मिले हैं, जिनमें से 20 मई-जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की झड़पों के दौरान बहादुरी के लिए दिए गए हैं। पांडे ने कहा, यह आईटीबीपी के लिए सीमा पर आमने-सामने/झड़पों/ सीमा सुरक्षा कर्तव्यों में अपने जवानों की बहादुरी के लिए वीरता पदकों की सबसे अधिक संख्या है।

पिछले साल 15 जून 2020 को एलएसी पर गलवान घाटी झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। इस झड़प में भारी संख्या में चीनी सैनिक भी मारे गए थे। आईटीबीपी के जिन अधिकारियों को यह पुरस्कार दिए गए हैं, उनमें किशोर सिंह बिष्ट (कमाडेंट) रिंकू थापा (द्वितीय कमान) शरत कुमार त्रिपाठी (डिप्टी कमांडेंट), अरबिंद कुमार महतो, अक्षय आहूजा, पंकज श्रीवास्तव और धर्मेंद्र कुमार विश्वकर्मा (सहायक कमांडेंट) शामिल हैं। पांडे ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में, आईटीबीपी के सैनिकों ने न केवल खुद को बचाने के लिए ढालों का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया, बल्कि पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) के अग्रिम सैनिकों को भी जमकर जवाब दिया।भीषण झड़पों के दौरान स्थिति को नियंत्रण में लाया। आईटीबीपी के जवानों ने कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी और घायल सैनिकों को भी पीछे की ओर ले गए।