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मिठाई कारोबारियों के बचाव में सामने आया हिन्दू युवा मंच

मिठाई कारोबारियों के बचाव में सामने आया हिन्दू युवा मंच

राजनांदगांव। हिन्दू युवा मँच जिला इकाई ने खाद्य विभाग के सौतेले व्यवहार की शिकायत करते हुए हर साल मिठाई कारोबारियों को कार्यवाही के नाम पर परेशान करने के खिलाफ आवाज उठाई है।

कलेक्टर को सौंपे गये ज्ञापन में संबंधित विभाग पर भेदभाव और पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए हिन्दू युवा मंच ने विभागीय कार्यप्रणाली और उनकी उदासीनता को उजागर करने का प्रयास किया है।

उक्ताशय की जानकारी देते हुए हिन्दू युवा मंच के जिलाध्यक्ष किशोर माहेश्वरी, शहर अध्यक्ष सुरेश लोहमार और शहर संयोजक राजा ताम्रकार ने संयुक्त रूप से बताया कि, दीपावली त्यौहार के शुरू होते ही खाद्य विभाग की खानापूर्ति की कार्यवाही शुरू हो जाती है।

यह क्रम पिछले कई दशक से हम देखते और सुनते जा रहे हैं। कार्यवाही के नाम पर खाद्य विभाग सिर्फ मिठाई कारोबारियों और होटल संचालकों को ही निशाने पर रखकर एकतरफा कार्यवाही कर साल में एक बार अपने विभाग की उपस्थिति दीवाली के मौके पर दर्ज कराते हैं। अब कुछ दिनों में खाद्य एवं औषधि विभाग का जिम्मेदार अमला अपनी हरकत पर आ जायेगा।

गिने-चुने मिठाई दुकानों से मिठाई के सैंपल लेगा और जाँच के नाम पर ऊपर भेजने का हवाला देगा, लेकिन जांच में मिठाई के सैंपल मानक मापदंडों के अनुसार सही पाए गए या नहीं इसकी रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं होती। कुल मिलाकर विभागीय अमले का यह प्रोपोगंडा है जो मिठाई कारोबारियों में दहशत का वातावरण निर्मित करने के उद्देश्य से रचा जाता है।

कार्यवाही के नाम पर बेशक पैसों की भी अनैतिक माँग होती होगी। पिछले कई दशक से यही होता आया है। जैसे मानो खाद्य विभाग के अंदर सिर्फ मिठाई कारोबारी और होटल संचालक ही आते हों और दूसरे खाद्य और औषधि क्षेत्र से जुड़े व्यापारी दायरे से बाहर।

गौरतलब हो कि, मिठाईयां तो आवश्यकतानुसार रोज ही बनती होगी। अगर अनियमितता होनी होगी तो बाकि दिनों में भी हो सकती है। इस तरह सिर्फ दीवाली के मौके पर ही दिखावे की कार्यवाही क्यों। बाकि दिनों विभागीय अमला क्या दफ्तर में मुफ्त की रोटियां तोड़ने का ही काम करता है और मुफ्त की पगार लेता है।

विडंबना है कि, मिठाई कारोबारियों को ही कार्यवाही की मार झेलनी पड़ती है, जबकि खाद्य एवं औषधि के अंतर्गत फल, सब्जी, मांस, दवाईयां और सभी छोटे बड़े होटल संचालक और ठेले खोमचे वाले भी इस दायरे के अंतर्गत आते हैं। बावजूद विभाग द्वारा सिर्फ और सिर्फ मिठाई कारोबारियों को कार्यवाही के नाम पर हर बार परेशान किया जाता है। दूध, फल, सब्जियों का इन्होंने कभी भूलकर भी निरीक्षण नही किया होगा और न ही उनकी गुणवत्ता कभी परखी होगी।

नकली दवाइयों और एक्सपायरी दवाईयों का जखीरा इन्होंने आखरी बार पकड़कर कब कार्यवाही की होगी। विभाग और उसके अमले को ठीक से याद भी नहीं होगा। मांस की बिक्री भी इसके दायरे में आती है, लेकिन क्या कभी मांस बिक्री की गुणवत्ता और तय मानकों का अनुपालन न करने पर विभाग ने माँस विक्रेता पर कभी कार्यवाही की।

फिर अकेले मिठाई व्यापारियों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों। गली-मोहल्ले से लेकर व्ययस्ततम मार्गो पर हो रही मांस की बिक्री और उनके तय स्थान के संबंध में हिन्दू युवा मँच के पदाधिकारियों ने कहा है कि, मांस की बिक्री तय स्थान में ही होनी चाहिए।

मांस विक्रेताओं और जनसमान्य को होने वाली परेशानी को देखते हुए आने वाले समय में नगर पालिका निगम को मामले से अवगत कराकर मांस विक्रेताओं के पुनर्वास और व्यवस्थापन कराने दुकानों का आबंटन करने भविष्य में मांग की जाएगी।