अफसरनामा : रायपुर का अगला कलेक्टर कौन ? ब्यूरोक्रेसी और राजनीति से जुड़ी कही-अनकही खबरों पर संपादक अनिल द्विवेदी का विश्लेषण.

अफसरनामा : रायपुर का अगला कलेक्टर कौन ? ब्यूरोक्रेसी और राजनीति से जुड़ी कही-अनकही खबरों पर संपादक अनिल द्विवेदी का विश्लेषण.
  • ब्यूरोक्रेसी और राजनीति से जुड़ी कही-अनकही खबरों का विश्लेषण.


    सबसे बड़ा न्याय ईश्वर का

    अंतत: राज्य शासन के प्रमुख सचिव, आइएएस डॉ.आलोक शुक्ला को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिल ही गई. न्यायालय ने शुक्ला की पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग के मामले में लगी याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि राज्य सरकार को रिलेक्शेसन और पोस्टिंग करने का अधिकार है. हालांकि भाजपा नेता और अधिवक्ता नरेश चंद्र गुप्ता इस फैसले से संतुष्ट नही हैं और उन्होंने उपरी अदालत में पुर्नयाचिका दायर करने का मन बनाया है.
    किवदंती है कि न्याय मिलने से ज्यादा जरूरी न्याय मिलते दिखना भी जरूरी है. यह फैसला इसी का समानांतर लग रहा है. ईमानदार, मेहनती और परिणामदायी अफसर रहे आइएएस आलोक शुक्ला एमबीबीएस डॉक्टर हैं और बाद में आइएएस बने. लेकिन रमन सरकार ने ऐसे अधिकारियों को मानो कालापानी दे रखा था सो महाराज उपेक्षित ही बने रहे यानि कुछ एक साल छोड़ दें तो 10 साल तक डॉक्टर साहब लूपलाइन में पड़े रहे. वे कहते थे कि इससे अच्छा तो मैं डॉक्टरी ही करता रहता. पर कहते हैं ना कि दिन घूरे के भी फिरते हैं. रमनराज खत्म हुआ तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दूरदर्शी और न्यायवादी दृष्टिकोण अपनाते हुए आइएएस डॉ.आलोक शुक्ला, आइएएस टुटेजा सहित उन सभी अफसरों को अपना खासमखास बनाया जिन्हें अब तक प्रदेश के हित में कुछ करने का मौका नही मिला था. डॉ.शुक्ला पर भूपेश बघेल इतने मेहरबान हुए कि 20 साल के छत्तीसगढ़ में रिटायरमेंट के बाद इतने पदों पर काबिज होने वाले आलोक शुक्ला पहले आइएएस हो गए!

    एक हाथ ले : एक हाथ दे

    पुलिस महानिदेशक डी एम अवस्थी के ना चाहते हुए भी राज्य सरकार ने प्रदेश के तीन आइपीएसों को डीजी के लिए पदोन्नत कर दिया. ये भाग्यशाली अफसर हैं : आइपीएस अशोक जुनेजा, आइपीएस संजय पिल्लै और आइपीएस आर के विज. विज साहब तो इतने खुश हुए कि डीजी की नई ड्रेस के साथ फोटो खिंचवाई. चूंकि पार्टी बाहर नही मन सकती थी इसलिए घर पर ही अपने हाथों से रेसिपी बनाकर पार्टी एंजॉय की. हालांकि इसे पूरे मामले में आइपीएस मुकेश गुप्ता के रूख को लेकर कई तरह की चर्चाएं गर्म हैं. सूत्र बताते हैं कि केन्द्र सरकार ने फरवरी माह में ही डीजी का पद भरने की इजाजत दे दी थी लेकिन डीजीपी अवस्थी की अनिच्छा के चलते डीपीसी रूकी रही. अवस्थी जब नही माने तो सरकार ने तीन बड़े आइएएसों को बिठाकर डीपीसी ओके कर दी लेकिन अवस्थी ने इसमें हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया. दरअसल महाराज को डर था कि यदि उनकी परफार्मेंस खराब रही तो सरकार इन तीनों में से किसी को उनका विकल्प बना सकती है.
    अपुष्ट खबर यह भी है कि जिस दिन डीपीसी बैठी, उसके 12 घण्टे पहले गुप्ता ने एक कानूनी नोटिस भेजकर डीपीसी की वैधानिकता पर सवाल खड़े किए थे. उसके बाद सरकार ने मामले को लंबित कर दिया था. इस तनातनी का फायदा मुकेश गुप्ता ने उठाया और सरकार से संबंध बेहतर कर लिए. इस कहानी का क्लाइमेक्स यह हे कि मुकेश गुप्ता दावा कर रहे हैं कि वे डीजी बनकर रहेंगे. दूसरा बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार सुपर न्यूमेरिकल पोस्ट बनाकर जुनेजा का डीजी पद बचा लेगी. गुप्ता 1988 बैच के आइपीएस हैं और जुनेजा 89 बैच के आइपीएस इसलिए गुप्ता उनसे एक साल सीनियर हैं. ऐसे में विभागीय जांच पूरी होते ही मुकेश गुप्ता डीजी बन जाएंगे. बहरहाल चर्चा है कि मुकेश गुप्ता के रिश्ते भूपेश बघेल सरकार से सुधर रहे हैं. तो दूसरी ओर डॉ.रमनसिंह खेमे में एक नया डर पैदा हो गया है. बताते हैं कि मुकेश गुप्ता के पास पिछली सरकार के धतकर्मों की कई रिपोर्ट रखी हुई हैं जो भूपेश बघेल सरकार को समझौते के तौर पर पेश की जा सकती हैं. यदि ऐसा हो गया तो आने वाले समय में भाजपा के कुछ नेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

    सूरज के निकले पसीने

    छत्तीसगढ़ की पहली अजीत जोगी सरकार में एक नारा चला था : अमीर धरती के गरीब लोग. फिर कमल फूल वाली पार्टी यानि भाजपा का राज आया. 15 साल तक नारा चला : अमीर धरती के अमीर लोग. हालांकि इसमें अमीर और अमीर होते चले गए और गरीब वहीं के वहीं रह गए. शिव और राज का ही कमाल था कि खजिन संपदा की भरपूर रेवड़ियां बंटी. खदानें बांटी और हीरा—पन्न भी लुटाया. जनता समझ गई तो राम—राम कर दिया. अब आई है बघेल सरकार. नारा गढ़ा गया : न्याय करेंगे. न्याय हुआ भी. पूरे प्रदेश में खनिज, रेत, हीरा, कोयला जैसी संपत्तियों पर दोनों हाथों से लूटमार चालू है. अच्छी खासी दलाली खाने की खबर है. 25 रूपये प्रति ट्रेक्टर का रेट फिक्स हुआ है. इस गंगा में सबसे ज्यादा हाथ धोए महासमुंद में सूर्य की तरह चमकते एक नेता ने. जिसकी दलाली के हाथ सेल और एनएमडीसी तक पहुंच गए. दोनों केन्द्र सरकार के नवरत्न उद्योग. अफसरों को तकलीफ हुई तो सीबीआई को इत्तिला कर दिया गया. इसके बाद तीन सदस्यीय अफसरों की एक टीम सूर्य' के उपर निगाह रखे हुए है. महाराज भी समझ गए हैं इसलिए बचने के लिए आकाओं का चक्कर काटते नजर आ रहे हैं.

    कलेक्टर का आदेश चर्चा में!

    धमतरी जिले के कलेक्टर, आइएएस जे पी मौर्य का एक आदेश कर्मचारियों के बीच इन दिनों खासा चर्चा में है. समझ में नही आ रहा कि यह आदेश साहब की कृपा है या सजा. दरअसल मौर्य ने एक आदेश निकालते हुए कहा है कि अधीक्षक के पद पर कार्यरत एच.एम. आनेश्वरी जोकि विगत दिनों रिटायर हो गए हैं— के लिए मौर्य ने उसी दिन एक आदेश निकालते हुए कहा कि जब तक किसी सक्षम अधिकारी द्वारा इनकी संविदा वृद्धि नही की जाती तब तक ये अपने पद पर कार्य करते रहेंगे. यहां तक भी ठीक कहा जा सकता परंतु दूसरी शर्त में कलेक्टर कहते हैं कि जितनी अवधि तक अधीक्षक काम करेंगे, उस अवधि का वेतन, भत्ता इत्यादि देय नही होगा. अब ऐसा कौन सा जिला होगा देश में जहां सरकार संविदा पर काम करवाए और उसका भुगतान भी ना करे. गजबय है कि अधीक्षक बिना वेतन के काम करने को कैसे तैयार हो गए! एक अन्य मामले में कलेक्टर के पीए एस एल देवांगन भी विगत 4 सितम्बर को रिटायर हो गए हैं लेकिन वे भी काम जारी रखे हुए हैं!

    साइंस ने खारिज किया भारतीय सुंदरियों को

    विश्व सुंदरियों की पहचान करने वाली संस्था 'स्टार्ब ने दुनिया की 10 सबसे खूबसूरत महिलाओं की सूची जारी की है जिन्हें साइंस के मानकों पर फिट पाया गया है. आश्चर्य कि ऐसी सुंदरियों में केटी पेरी का नाम भी है जो इन दिनों गर्भवती हैं. दुर्भाग्य कह लें कि भारत की एक भी नवयौवना को साइंस के हिसाब से सुंदर नही पाया गया. रोबोट' जैसी सुपरहिट फिल्में देने वाले भारतीयों के लिए यह खबर चौंकाने वाली हो सकती है! पूरब और पश्चिम की यही खासियत है कि पश्चिम में महिलाएं विज्ञान के हिसाब से फिट हैं और भारत में धर्म के हिसाब से.

    लास्ट पंच : रायपुर कलेक्टर के दिन पूरे हो गए हैं लगता है! कोरोना समस्या को ना रोक पाना बड़ी असफलता माना जा रहा है. रायपुर जिला से जुड़े एक विधायक से हाट टॉक होने के बाद मुख्यमंत्री अब गंभीर हो गए हैं. सो पता लगाइए कि अगला कलेक्टर कौन हो सकता है! तीन वरिष्ठ आइएएसों ने तो मना कर दिया है!


    Anil Dwivedi, Editor.