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दुकानों के आबंटन पर नेता प्रतिपक्ष किशुन यदु के सवाल : आखिर बगैर ईश्‍तहार प्रकाशन के कैसे मंगाए गए आवेदन

दुकानों के आबंटन पर नेता प्रतिपक्ष किशुन यदु के सवाल : आखिर बगैर ईश्‍तहार प्रकाशन के कैसे मंगाए गए आवेदन

राजनांदगांव। मुख्‍यमंत्री स्‍वालं‍बन योजना के तहत निर्मित दुकानों के आबंटन पर आरोपों से घिरी महापौर हेमा देशमुख और निगम प्रशासन लगातार घिरता जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष किशुन यदु ने महापौर द्वारा हालही में दी दुकानों के आबंटन को लेकर दी गई सफाई को लेकर कई सवाल उठाएं हैं। उन्‍होंने शहर के विभिन्‍न इलाकों में दुकानों के निर्माण कार्यों को पूर्व महापौर मधुसूदन यादव के कार्यकाल की उपलब्धि करार देते हुए कहा कि मौजूदा महापौर और सत्‍तापक्ष ने अब तक इस योजना का श्रेय लेने की कोशिश करने और दुकानों का नियम विरुद्ध आबंटन का कार्य ही किया है। 

नेता प्रतिपक्ष किशुन यदु ने कहा कि महापौर श्रीमती हेमा देशमुख अपनी ही सत्‍ता-सरकार के दौर में हाशिएं पर हैं। शहर के लिए वे ऐसी किसी नई योजना या निर्माण कार्यों की स्‍वीकृति नहीं दिला पाईं हैं। पूर्व महापौर मधुसूदन यादव ने अपने कार्यकाल में बेरोजगारों को रोजगार उपलब्‍ध करवाने और निगम की आय बढ़ाने की ओर कई प्रयास किए। उन्‍होंने ही इनकी स्‍वीकृति दिलवाई और निर्माण शुरु करवाया। इसका ही नतीजा है कि शहर में कई स्‍थानों पर दर्जनों दुकानों का निर्माण जारी है। अब जब इनके आबंटन की प्रक्रिया शुरु हुई तो मौजूदा महापौर और निगम अमले के अधिकारी इसमें खेल कर रहे हैं। 

उन्‍होंने कहा कि महापौर श्रीमती देशमुख दुकानों के आबंटन में पारदर्शिता का दावा कर रहीं हैं लेकिन सच्‍चाई इसके उलट है। उनका यह दावा इसलिए भी खोखला साबित हो जाता है कि सत्‍तापक्ष की ही निगम के बाजार विभाग की चेयरमेन श्रीमती सुनीता फड़नवीस ने दुकानों के आबंटन के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। उन्‍होंने तो दुकानों के आबंटन को ही गलत करार देते हुए इसकी शिकायत जिला प्रशासन से भी की है। दूसरी ओर इन दुकानों के आबंटन के लिए 5 से 7 लाख रुपए की उगाही किए जाने की खबर सामने आ रही है। तय है कि आबंटन की इस पूरी प्रक्रिया में बड़ा खेल हुआ है। 

बगैर ईश्‍तहार प्र‍काशित किए लिए आवेदन

दुकानों के आबंटन की प्रक्रिया और नियमों को लेकर भी नेता प्रतिपक्ष ने कई सवाल उठाएं हैं। उन्‍होंने कहा कि कमला कॉलेज चौक में निर्मित 24 दुकानों के आबंटन की प्रक्रिया जांच के घेरे में है। नियमत: इन दुकानों के आबंटन से पहले अखबार में आवेदन मंगाए जाने को लेकर ईश्‍तहार प्रकाशित करवाया जाना था जो कि नहीं किया गया। इससे इतर महापौर कहतीं हैं कि आबंटन के लिए 198 आवेदन आए। आश्‍चर्यजनक है कि आवेदन लेने के लिए कोई तिथि निर्धारित नहीं की गई थी। दूसरा बिंदु यह है कि, दुकानों के आबंटन में लॉटरी की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसके इतर एमआईसी में अपनी मनमानी करते हुए सूची तैयार कर ली गई। यहीं नहीं दुकानों के क्रमांक आबंटन के लिए भी लॉटरी निकाली जाने का प्रावधान है लेकिन ऐसा नहीं किया गया। और अगर ऐसा किया गया है तो पारदर्शिता का दावा करने वाली महापौर इस पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों और जिस दिन यह पूरी की गई उसकी जानकारी दें। 

क्‍या पार्षदों से सूची ली जाएगी!

नेता प्रतिपक्ष श्री यदु ने कहा कि महापौर ने पार्षद से प्राप्‍त सूची के हिसाब से दुकानों के आबंटन का दावा किया है। हालांकि पार्षद पहले ही कह चुकी हैं कि उनसे कोई सूची नहीं मांगी गई थी और उन्‍होंने अपनी ही ओर से सूची निगम प्रशासन को सौंपी थी। शासन-प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों के तहत दुकानों के आबंटन के लिए पार्षद से सूची लिए जाने का कोई प्रावधान ही नहीं है। अगर, महापौर की मानसिकता यह है कि वे स्‍थानीय पार्षदों द्वारा तैयार सूची को प्राथमिकता देंगी तो वे यह भी बताएं कि आने वाले दिनों में विभिन्‍न क्षेत्र में होने वाले दुकानों के आबंटन के दौरान भी वहां के पार्षदों से सूची ली जाएगी।