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रोचक जानकारीः चप्पल को हवाई चप्पल क्यों कहते है ?

रोचक जानकारीः चप्पल को हवाई चप्पल क्यों कहते है ?

हम सब हवाई जहाज के बारे में तो अक्सर चर्चा करते कि किस हवाई जहाज से सफर करने पर टिकट कितना सस्ता मिलेगा? किस हवाई यात्रा के दौरान सुविधाएं ज्यादा मिलेगी लेकिन क्या कभी आपने हवाई चप्पल के बारे में सोचा है? आखिर यह हवाई चप्पल जो हर अमीर से अमीर और गरीब से गरीब इंसान की जिंदगी का अहम हिस्सा है यह आई कहां से और यह बनती कैसे हैं. आज हम आपको हवाई चप्पल के बनने की यही दिलचस्प कहानी बताने जा रहे हैं.

इन्हें क्यों कहा जाता है 'हवाई चप्पल'

इसे अंग्रेजी में स्लिपर कहते हैं और हिन्दी में चप्पल. इनकी स्ट्रिप्स अंग्रेजी के अक्षर वी  या  वाय आकार की होती हैं. अब आते हैं इस सवाल पर कि आखिर इसे हवाई चप्पल क्यों कहा जाता है? कई इतिहासकारों के मुताबिक इसे हवाई चप्पल अमेरिकी आइलैंड 'हवाई' की वजह से मिली है. अमेरिका में हवाई नाम का एक आईलैंड है जहा ‘टी’ नाम का एक पेड़ होता है. इसी पेड़ से जो रबरनुमा फैब्रिक बनता उससे चप्पल बनाया जाता है. इसलिए इसे हवाई चप्पल कहते हैं. कई लोगों का यह भी कहना है कि यह हवा जितनी हल्कि होती है इसलिए इसका नाम हवाई चप्पल है.

अमेरिकी आईलैंड ‘हवाई’ से इन चप्पलों को यह नाम मिला है. हवाई में ‘टी’ नाम के एक पेड़ से रबरनुमा फैब्रिक बनता था जिससे चप्पलें बना करती थीं.

कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सस्ती हवाई सेवा देने वाली एक योजना की घोषणा करते हुए कहा था कि इससे हवाई चप्पल पहनने वाला गरीब आदमी भी हवाई यात्रा कर सकेगा. यह योजना कहां तक पहुंची इसकी तो कोई खबर नहीं है लेकिन प्रधानमंत्री के इस कथन से एक बात साफ पता चलती है कि हवाई चप्पलों का आम आदमी से जितना करीब का रिश्ता है, हवाई यात्रा से उतना ही दूर का. अब मजे-मजे में यह भी कहा जा सकता है कि जब तक मोदी जी की यह योजना शुरू नहीं हो जाती तब तक आम आदमी को हवाई चप्पल पहनकर जमीन पर ही चलना है, जैसा कि वह एक जमाने से करता आ रहा है. अब सवाल है कि जब एक जमाने से आम लोग ऐसा ही करते आ रहे हैं तो इन्हें हवाई चप्पल कहा क्यों जाता है? इस बार के सिर-पैर के सवाल में यही पड़ताल करते हैं कि यह नाम आखिर आया कहां से है.

फ्लिप-फ्लॉप या स्लिपर, जिनकी स्ट्रिप्स अंग्रेजी के अक्षर व्ही या वाय आकार की होती हैं, भारत में हवाई चप्पल कही जाती हैं. इस डिजाइन की चप्पलों का इतिहास बहुत पुराना है. चीन, भारत, इजिप्ट, जापान, अमेरिका सहित तमाम देशों का इतिहास टटोलने पर इस तरह की चप्पलों का जिक्र या चित्र मिलते हैं. हर जगह पर इन चप्पलों को अलग-अलग नाम दिया गया है.

Do you know what the word 'Hawai' means in 'Hawai Chappal'? It has its own  history

इतिहासकार मानते हैं कि अमेरिकी आईलैंड ‘हवाई’ से इन चप्पलों को यह नाम मिला है. हवाई में ‘टी’ नाम के एक पेड़ से रबरनुमा फैब्रिक बनता था जिससे चप्पलें बना करती थीं. हालांकि इनका डिजाइन हवाई चप्पल कही जाने वाली चप्पलों से अलग था. वैसे हवाई चप्पलों के तार हवाई के साथ-साथ जापान से भी जुड़ते हैं. हवाई चप्पलों का डिजाइन जापान में पहनी जाने वाली फ्लैट स्लिपर्स ‘ज़ोरी’ या हाईहील सैंडल्स ‘गेटा’ से मिलता-जुलता है. बताया जाता है कि 1880 में खेत और कारखानों में काम करने के लिए जापान के ग्रामीण इलाकों से मजदूर हवाई लाए गए और उन्हीं के साथ चप्पलों का यह डिजाइन भी हवाई पहुंचा.

इसके करीब पचास साल बाद 1932 में कोबलर एल्मर स्कॉट ने हवाई में चप्पल बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रबरनुमा फैब्रिक को जापानी डिजाइन में ढाला और हवाई चप्पलें अस्तित्व में आईं. इस नई डिजाइन की चप्पलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल सबसे पहले दूसरे विश्वयुद्ध की लड़ाई लड़ने वाले अमेरिकी सैनिकों द्वारा किया गया. इसके बाद ये चप्पलें दुनियाभर में मशहूर हो गईं. कुछ इतिहासकार यह भी मानते हैं कि अमेरिकी सैनिक ही जापान से ‘ज़ोरी’ लेकर आए थे जो बाद में बेहद पॉपुलर हुईं.


हवाई चप्पलों के इस नाम को लोकप्रिय बनाने का श्रेय ‘हवाइनाज’ को भी जाता है. यह एक ब्राजीलियन शू-ब्रांड है जो फ्लिप-फ्लॉप चप्पलें बनाता है. साल 1962 में हवाइनाज ने कामकाजी लोगों के लिए रबर के फ्लिप-फ्लॉप लॉन्च किए. ये वही सफेद या नीले रंग के नीली स्ट्रिप वाली चप्पलें थीं जो हवाई चप्पलों का सबसे पॉपुलर और कॉमन डिजाइन है. हवाइनाज के कारण ही भारत और दुनिया की कुछ और जगहों पर इन चप्पलों को हवाई चप्पल कहा जाता है. भारत में हवाई चप्पलों को घर-घर पहुंचाने का काम बाटा ने किया जो हवाइनाज से करीब दस साल पहले ही इन्हें लॉन्च कर चुका था. तब तो इन्हें लोगों तक पहुंचने में थोड़ा वक्त लगा था, लेकिन फिर धीरे-धीरे ये भारत के तकरीबन हर परिवार तक पहुंच ही गईं. हालांकि बाकी दुनिया इन्हें अलग-अलग नामों से भी पुकारती है लेकिन हमारे लिए ये हवाई चप्पल ही हैं.