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पाठ्यपुस्तक निगम ने 5 फर्मो को किया ब्लैक लिस्ट

पाठ्यपुस्तक निगम ने 5 फर्मो को किया ब्लैक लिस्ट


रायपुर।
छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम ने 5 फर्मो को ब्लैक लिस्ट में डाल दिया है। जिन फर्मों को ब्लैक लिस्ट में डाला गया है उनमें मेसर्स टेक्नो प्रिंट्स रायपुर, मेसर्स प्रगति प्रिंटर्स रायपुर, मेसर्स रामराजा प्रिंटर्स रायपुर, मेसर्स श्रीराम प्रिंटर्स और मेसर्स शारदा ऑफसेट प्रिटर्स प्रा.लिमि. शामिल है। इसकी सूचना भी अलग-अलग विभागों को दे दी गई है।
मेसर्स शारदा ऑफसेट प्रिंटर्स प्रा.लिमि. रायपुर के विरूद्ध शिक्षा सत्र 2020-21 में जमा की गई 20 लाख की बैंक गारंटी के संबंध में विभिन्न प्रकार की शिकायतें प्राप्त हुई थी। जिसकी तथ्यों की समीक्षा और संबंधित बैंकों से प्राप्त सूचना अनुसार मुद्रक द्वारा की गई। अनियमितता के विरूद्ध निगम द्वारा मेसर्स शारदा ऑफसेट प्रिंटर्स प्रा.लिमि. रायपुर तीन वर्षों के लिए सूचीबद्ध ब्लैक लिस्ट में डाला गया है। पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी ने निगम का काम संभालने के बाद अपने पहले विस्तृत बयान में कहा है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के मुताबिक निगम स्कूली बच्चों को नि:शुल्क मिलने वाली किताबों की उत्कृष्टता बढ़ाने की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ निगम क्वालिटी और किफायत दोनों को साथ लेकर चल रहा है।

इस वर्ष के लिए छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा किए गए सुधार और बेहतरी की कोशिशों की जानकारी देते हुए बताया कि इस बार किताबों का कागज बीते बरसों के मुकाबले बेहतर रहेगा, ताकि सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी अधिक सफेद कागज पर छपी किताबें मिलें। इसके साथ-साथ इस कागज में आर-पार झांई (पारदर्शिता) भी कम रहेगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष कागज खरीदी में पिछले बरस तक के 85 फीसदी ब्राइटनेस की तुलना में 90 फीसदी ब्राइटनेस, और 80 फीसदी ओपेसिटी के मुकाबले 90 फीसदी ओपेसिटी का कागज लिया जा रहा है।
उन्होंने आगे जानकारी दी कि इस वर्ष के तीनों टेंडर, कागज खरीदी, पुस्तक छपाई, एवं अन्य विविध छपाई, हो चुके हैं और स्थानीय जीएसटी पंजीयन की शर्त की वजह से राज्य शासन को जीएसटी के रूप में एक बड़ी राशि प्राप्त होगी। अब तक यह शर्त नहीं थी। कागज की खरीदी में इस वर्ष निगम बीआईएस (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड) के पैमानों पर खुला टेंडर करके कागज खरीदी कर रहा है। बीते बरसों में 4-5 फर्में ही कागज सप्लाई टेंडर में भागीदारी करती थीं, जबकि इस वर्ष 14 फर्मों ने हिस्सा लिया है। पर्यावरण के हित में इस वर्ष निगम ने वर्जिन वुड पेपर के बजाय ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के मापदंड के अनुसार कागज के उपयोग का निर्णय लिया है। इस बार के किताबों के कवर के लिए 220 जीएसएम पेपर के बजाय 250 जीएसएम का कवर पेपर लगाया जा रहा है जिससे किताबें ज्यादा सुरक्षित रहेंगी।
शैलेष नितिन त्रिवेदी ने बताया कि पिछले बरसों में विविध-मुद्रण के तहत सालाना करीब सौ करोड़ का काम निगम द्वारा होता था, इस वर्ष इसके रेट काफी कम हुए हैं जिससे पिछले वर्ष जितना काम होने पर 10 से 20 करोड़ की बचत होगी। उन्होंने बताया कि अब तक छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम किताबों की छपाई के लिए प्रिंटर्स को पॉजिटिव बनाकर देता था जिसमें करीब एक करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होता था। इस बार निगम ने टेंडर की शर्तों से पॉजिटिव हटा दिया है और डीवीडी पर मुद्रण सामग्री देकर सीटीपी से बेहतर क्वालिटी की प्लेट बनवाकर छपाई की शर्त जोड़ी है। निगम ने प्रिंटरों से काफी मोल-भाव करके टेंडर की दरों को कम करवाया है। अलग-अलग किताबों के स्लैब में बीते बरसों के मुताबिक 9 से 14 फीसदी तक ही रेट बढऩा मंजूर किया गया है, और इसके एवज में पॉजिटिव बनाने का खर्च हटेगा और छपाई की क्वालिटी में गुणात्मक सुधार होगा।
पिछले वर्ष कागज 68900 रुपये प्रति टन की रेट पर लिया गया था, इस वर्ष उसी कंपनी से 65990 रुपये प्रति टन पर खरीदा जा रहा है। इस बार का कागज अधिक सफेद है, और उसकी पारदर्शिता कम रहेगी जिससे कि बच्चों को पढऩे में आराम रहेगा। इस खरीदी में 3 करोड़ से अधिक की बचत हो रही है। निगम ने कागज पर निगम के वाटरमार्क के साथ-साथ पेपर मिल के नाम को भी देने की शर्त भी रखी है जिससे मिलों को अपने कागज की क्वालिटी के प्रति अधिक सचेत रहना पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के मुख्यालय एवं संबंधित डिपो में निजी सुरक्षा एजेंसी की जगह पर भूतपूर्व सैनिकों को रखा गया है जिससे छत्तीसगढ़ के भूतपूर्व सैनिकों को रोजगार मिल रहा है। छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम ने कर्मचारियों को दी जाने वाली लंबित प्रोत्साहन राशि जारी कर दी है, और निगम के कर्मचारियों को पदोन्नति और समयमान वेतनमान का काम भी किया है।