प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-संस्कार, सच्चाई और आनर किलिंग

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-संस्कार, सच्चाई और आनर किलिंग


आधुनिक भारत का तीर्थ कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ के औद्योगिक शहर भिलाई में रहने वाले तेलुगू परिवार में हुई घटना ने संस्कार, सच्चाई और आनर किलिंग से जुड़े उन बातों को एक बार फिर से सोचने के लिए विवश किया है। समाज में रिश्तों को लेकर जो मान्यताएं हैं जो स्वीकार्यता है यदि उससे परे प्रेम से बढ़कर कोई इसकी सीमा को लांघने की कोशिश करता है तो उसे घर, परिवार समाज के लोग सहज नहीं स्वीकारते और कई बार लड़का-लड़की को इसकी सजा अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ती है।

छत्तीसगढ़ में खाप पंचायत जैसी सोच नहीं है यही वजह है कि छत्तीसगढिय़ा समाज में हरियाणा, राजस्थान, पूर्वी उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना की तरह आनर किलिंग की घटनाएं नहीं होती। सगोत्री विवाह और आपसी रिश्तों के कारण हुई इस आनर किलिंग की घटना ने एक बार यह सवाल की खड़ा किया कि गोत्र का निर्धारण क्या पुरुष सत्तात्मक सोच का ही परिणाम है। साइंस कहता है कि बच्चों में माता-पिता दोनों का डीएनए क्रोमोजोन मिलता है।

प्रेम और विवाद का बहुत पुराना और सघन रिश्ता है। सदियों से रिश्ता चला रहा है प्रेम के प्रति लोगों के मन में अरुचि घृणा की हद तक बसी हुई है। आज से नहीं सदियों से घृणा का रिश्ता कायम है। विजातीय तो दूर की बात है सजातीय प्रेम के रिश्ते भी स्वीकार करने में मध्यवर्ग को तकलीफ  जाती है। संस्कार और परंपरा को लेकर मध्यवर्ग के भीतर बहुत दुराग्रही जटिलता है। प्रेम के नाम भर से दोहरी मानसिकता में जी रहा भारतीय व्यक्ति असहज हो जाता है। आक्रमक हो जाता है। फिर उसके भीतर धर्म, जाति, कुल और गोत्र के संस्कार इस हद तक आहत और अपमानित महसूस करते हैं कि वह आक्रामक हो जाता है। सदियों से दबे पितृसत्तात्मक संस्कार जिनमें एक किस्म की सामंती मानसिकता भी अवचेतन में पोषित होती रहती है, सिर उठाने लगती है और उस आक्रामकता को हिंसा के लिए उकसाती है। इस हिंसा में ही उसके कुल गौरव और स्वाभिमान को शरण मिलती है। सामाजिक प्रतिष्ठा का भाव और भय उस घृणा को बढ़ाता है।

भिलाई के न्यू कृष्णानगर में रहने वाले चचेरे भाई-बहन भागकर चेन्नई में पति-पत्नी की तरह रहने लगे। यह रिश्ता मान्य परंपराओं के अनुसार परिवार को नागवार गुजरा। लड़की के भाई और चाचा ने लड़का-लड़की के भिलाई लौटने पर उन्हें पहले जहर देकर मारा फिर दोनों की लाश को जला दिया। भिलाई के कोप्पल परिवार में हुई घटना के पहले दोनों परिवार ने 21 सितंबर को भिलाई के सुपेला थाने में दोनों के लापता होने की सूचना दर्ज करायी थी। 7 अक्टूबर को सुपेला पुलिस ने दोनों को बालिग होने के कारण परिवार को सौंप दिया। उसके बाद लड़की के घर में परिवारजनों से लड़की की लड़ाई हुई और लड़के-लड़की की हत्या कर दी गई। लड़की के भाई और चाचा ने अपना अपराध स्वीकार लिया। उन्होंने कहा कि ये दोनों चचेरे भाई बहन थे, उनका आपस में प्रेम करना पति-पत्नी की तरह रहना हमें स्वीकार नहीं था। यह रिश्ता कलंकित करने वाला था इसलिए हमें हत्या करनी पड़ी।

ये लड़के-लड़की जिस समाज से आते हैं वहां सगे मामा से या बुआ के लड़के से विवाह स्वीकार है। हमारे समाज में प्रचलित अलग-अलग मान्यताओं और संस्कारों के चलते विवाह को लेकर बहुत से अलग-अलग बेरियर हंै। सामान्यत: प्रचलित परंपरा में एक गोत्र में विवाह प्रतिबंधित है। आनर किलिंग संबंधित एक याचिका पर सुनाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दो वयस्क अगर शादी करते हंै तो कोई तीसरा उसमें दखल नहीं दे सकता। न्यायालय ने यह भी बताया गया कि हिन्दू मैरिज एक्ट 1955 की धारा 5 में एक ही गोत्र में शादी न करने को उचित बताया गया है। चिकित्सक भी नजदीकी रिश्तों में विवाह के लिए बच्चे के विकास की दृष्टि से मना करते हैं। हमारे देश में आनर किलिंग के 3 प्रतिशत मामले ही गोत्र से संबंधित होते हैं। 97 प्रतिशत मामलों में धर्म, जाति और अन्य वजह होती है। अधिकतर मामले तथाकथित ऊंची और नीची जाति  के बीच पनपे प्रेम संबंध को लेकर होती है। सरकार ने बढ़ते आनर किलिंग के केस को देखते हुए वर्ष 2010 में विधायिका प्रिवेशन आफ  क्राइम इन द नेम ऑफ  आनर बिल लाया। इस बिल में दंपत्ति के विवाह को अस्वीकार करने के उद्देश्य से किसी भी समुदाय या गांव की सभा जैसे कि खाप पंचायत के आयोजन पर प्रतिबंध लगाने की बात शामिल है। साथ ही इसमें नवविवाहित जोड़ों के बहिष्कार पर प्रतिबंध तथा उनकी समाजिक आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना भी शामिल है और स्वयं को निर्दोष साबित करने का दायित्व आरोपी का होगा। देश में आनर किलिंग पर अंकुश लगाने के लिए जहां अपराधियों को मौत की सजा के साथ-साथ खाप पंचायतों को अवैध घोषित किया गया है। देश में परिवार की इज्जत बचाने के नाम पर हत्या आनर किलिंग के मामले बढ़ गए हैं। 2014 और 2015 के बीच देशभर में इनकी संख्या में करीब सात गुना बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो एनसीआरबी के 2015 के आंकड़ों के अनुसार 2014 में आनर किलिंग के 28 मामले सामने आए थे जो 2015 में बढ़कर 251 हो गए। आनर किलिंग के सबसे ज्यादा 168 मामले उत्तरप्रदेश में दर्ज हुए इसके बाद गुजरात में 25 और मध्यप्रदेश में 14 मामले सामने आए। सितंबर 15 से जून 19 तक तमिलनाडु में 80 केस, कनार्टक में 48 केस तथा तेलंगाना में 36 केस आये।

हमारे देश में प्रेम संबंधों को लेकर पारिवारिक और सामाजिक स्वीकार्यता आसान नहीं है। कदम-कदम पर विरोध और सवालों का सामना करना पड़ता है। प्रेम प्रसंग के कारण होने वाली हत्या की दर बीते डेढ़ दशक में बढ़ी है। एनसीआरबी राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि बीते कई वर्षों में हमारे देश में हत्या के मामलों में कमी आई है लेकिन इसी अवधि में प्रेम संबंधों के मामले में हत्या में बढ़ोत्तरी हुई है। हाल में जारी एनसीआरबी के आंकड़ों से पता चलता है कि 2001 से 2017 के बीच प्रेम-प्रसंग में होने वाली हत्या की दर सबसे अधिक रही है।

भिलाई की घटना में सगोत्र के साथ चचेरे भाई बहन का रिश्ता था। युवा प्रेमियों ने यह कतई नहीं सोचा कि उनका परिवार आसपास का समाज इसे किस दृष्टि से देखेगा। भिलाई पुलिस जहां पर उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज थी जो इन्हें लेकर आई थी वह भी परिवार के गुस्से और मंसूबो को नहीं जान सकेगी। पुलिस चाहती तो इन्हें अलग.अलग संरक्षण गृह में भी रख सकती थी। जब हम सगोत्री रिश्तों की बात करते हैं तो हम स्त्री के जेनेटिक को पूरी तरह नकार देते हैं। पुरूष वादी व्यवस्था के आधार पर परिवार का गोत्र निर्धारित होता है। स्त्री के रक्त संबंधों को कैसे नकारा जा सकता है जबकि एक स्त्री उस गर्भ को धारण करती है। पुरुष और स्त्री के क्रोमोजोन आपस में मिलकर ही संतान का निर्धारण करते हैं। जैनेटिक निर्धारण की सामाजिक सोच दरअसल पुरुष सत्ता की सोच की ही उपज है जिसमें स्त्री पूरी तरह नदारद है जो समाज मामा, बुआ के बेटे के साथ संबंधों की इजाजत देता है वहीं समाज गोत्र के नाम पर उस जैनेटिक को नकारता है जो स्त्री के कारण आता है। मामा बुआ के बच्चों के साथ भी तो वही रक्त संबंध है जो चाचा के बच्चों के साथ। आनर किलिंग के प्रकण उन समाजों में ज्यादा दिखलाई पड़ते हैं जो सामान्यत: संपन्न कृषक होते हैं जिनकी सामाजिक, जाति पंचायत ज्यादा मजबूत होती है।

ये पंचायतें या इस तरह की सोच के लोग परंपरा और परिवार जाति समाज की इज्जत के नाम पर आनर किलिंग जैसे घृणित कदम उठाकर उसे उचित भी ठहराते हैं। यही वजह है कि कथित इज्जत के नाम पर हर पांचवी हत्या भारत में होती है। ये हत्याएं तभी रूक सकती है, जब समाज अपनी जड़ता को छोड़ वैज्ञानिक चेतना से लैस होकर सोचना शुरू करें।