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राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना, पंजीयन कार्य 1 सितम्बर से

राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना, पंजीयन कार्य 1 सितम्बर से

गरियाबंद । छत्तीसगढ़ राज्य में ग्रामीण आबादी का एक बड़ा हिस्सा कृषि मजदूरी पर निर्भर है। राज्य में खरीफ सत्र में कृषि मजदूरी का पर्याप्त अवसर रहता है। रबी सत्र में फसल क्षेत्राच्छादन कम होने के कारण कृषि मजदूरी के लिए अवसर भी कम हो जाता है। कृषि मजदूरी कार्य में संलग्न ग्रामीणों में अधीकतर लघु सीमांत अथवा भूमिहीन कृषक है। इनमें से भूमिहिन कृषि मजदूर को अन्य की अपेक्षा रोजगार के कम अवसर ग्राम स्तर पर प्राप्त होते है। प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भूमिहीन कृषि मजदूरों की व्यथा को समझकर 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इनके लिए राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना लागू करने की घोषणा की गई है।यह योजना वित्तीय वर्ष 2021-22 से लागू की जाएगी। इस योजना के तहत पंजीकृत परिवार के मुखिया को प्रतिवर्ष 6 हजार रूपये अनुदान सहायता राशि दी जाएगी। इस हेतु पंजीयन का कार्य 01 सितम्बर 2021 से प्रारंभ होगा और पंजीयन का कार्य 30 नवम्बर 2021 तक चलेगा।

राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के कियान्वयन हेतु शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देश में कहा है कि ग्रामीण आबादी का एक बड़ा हिस्सा कृषि मजदूरी पर निर्भर है। खरीफ सत्र में ही कृषि मजदूरी के लिए पर्याप्त अवसर रहता है, रबी सत्र मे फसल क्षेत्राच्छादन कम होने के कारण कृषि मजदूरी के लिए अवसर भी कम हो जाता है। कृषि मजदूरी कार्य में संलग्न ग्रामीणों में अधिकतर लघु, सीमांत अथवा भूमिहीन कृषक हैं। इसमें से भूमिहीन कृषि मजदूर को अन्य की अपेक्षा रोजगार के कम अवसर ग्राम स्तर पर उपलब्ध होते हैं। राज्य शासन द्वारा ऐसे वर्ग को संबल प्रदाय करने की दृष्टि से राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना वित्तीय वर्ष 2021-22 से प्रारंभ किया जा रहा है। योजनांतर्गत कट ऑफ डेट (पात्रता दिनांक) 01 अप्रैल 2021 होगा। 01 अप्रैल 2021 की स्थिति में योजनांतर्गत निर्धारित पात्रता होनी चाहिए। योजना अंतर्गत पात्रता केवल छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को होगी।

ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे सभी मूल निवासी भूमिहीन कृषि मजदूर परिवार इस योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु पात्र होंगे, जिस परिवार के पास कृषि भूमि नहीं है। पट्टे पर प्राप्त शासकीय भूमि यथा वन अधिकार प्रमाण पत्र को कृषि भूमि माना जाएगा। ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के अंतर्गत चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, घोबी, पुरोहित जैसे-पौनी-पसारी व्यवस्था से जुड़े परिवार, वनोपज संग्राहक तथा शासन द्वारा समय-समय पर नियत अन्य वर्ग भी पात्र होंगे, यदि उस परिवार के पास कृषि भूमि नहीं है। भूमिहीन कृषि मजदूर से अभीप्राय ऐसा परिवार जो कोई कृषि भूमि धारण नहीं करता और जिसकी जीविका का मुख्य साधन शारीरिक श्रम करना है और उसके परिवार का जिसका की वह सदस्य है, कोई सदस्य किसी कृषि भूमि को धारण नहीं करता है। इसी तरह परिवार से आशय किसी व्यक्ति का कुटुम्ब अर्थात् उसकी पत्नी या पति, संतान तथा उन पर आश्रित माता-पिता से है। कृषि भूमि धारण नहीं करना से आशय, उस परिवार के पास अंश मात्र भी कृषि भूमि नहीं होना है।

कृषि भूमिहीन परिवारों की सूची में से परिवार के मुखिया के माता या पिता के नाम से यदि कृषि भूमि धारित है अर्थात् उस परिवार को उत्तराधिकार हक में भूमि प्राप्त करने की स्थिति होगी, तब वह परिवार भूमिहीन परिवार की सूची से पृथक् हो जाएगा। आवासीय प्रयोजन हेतु धारित भूमि, कृषि भूमि नहीं मानी जाएगी। ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के मुखिया को अनुदान सहायता राशि प्राप्त करने हेतु आवेदन पत्र के साथ ''राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजनाÓÓ पोर्टल पर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। अपंजीकृत परिवारों को योजनांतर्गत अनुदान की पात्रता नहीं होगी। पंजीकृत हितग्राही परिवार के मुखिया की मृत्यु हो जाने पर उक्त परिवार के द्वारा पात्रता अनुसार नवीन आवेदन योजनांतर्गत प्रस्तुत किया जाना होगा।

यदि पंजीकृत हितग्राही परिवार के मुखिया के द्वारा असत्य जानकारी के आधार पर अनुदान सहायता राशि प्राप्त की गई हो, तब विधिक कार्यवाही करते हुए उक्त राशि उससे भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूल की जाएगी। योजनांतर्गत हितग्राही परिवारो के पंजीयन के कार्य 01 सितम्बर से 30 नवम्बर 2021 तक किया जायेगा। पंजीयन हेतु आवश्यक दस्तावेज-आधार कार्ड, बैंक पासबूक के छाया प्रति के साथ आवेदन सचिव, ग्राम पंचायत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। आवेदन मे यथा संभव मोबाईल नम्बर का भी उल्लेख किया जाना होगा। हितग्राही परिवार आवेदन की पावती ग्राम पंचायत सचिव से प्राप्त कर सकेगा।राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के पोर्टल में प्रर्दशित प्रक्रिया के अनुसार मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत के द्वारा पंजीयन की कार्यवाही की जायेगी। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन एवं निगरानी हेतु राज्य स्तरीय व जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति गठित कर समिति को कार्य दायित्व सौंपे गये हैं।