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वजन त्यौहार महत्वपूर्णः गर्भवती महिलाओं से बच्चों में आता है कुपोषण

वजन त्यौहार महत्वपूर्णः गर्भवती महिलाओं से बच्चों में आता है कुपोषण

बच्चों के पोषण स्तर का पता लगाने में वजन त्यौहार महत्वपूर्णः रेणु प्रकाश
रामाटोला और टप्पा गांव में लगी फल, सब्जियों की प्रदर्शनी

राजनांदगांव। वजन त्यौहार के दौरान बच्चों में सुपोषण हेतु शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव कराने की दिशा में गांव-गांव में प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि, प्रसव के पहले और प्रसव के बाद माताएं स्वास्थ्य केन्द्र में ही रहें जिससे बच्चे को सही समय पर टीका लगाया जा सके और कुपोषण तथा अन्य बीमारियों से बचाया जा सके। इसी कड़ी में डोंगरगढ़ विकासखंड के गांवों में भी जागरुकता अभियान चलाया गया। पौष्टिक फल व सब्जियों की प्रदर्शनी लगाई गई।
कुपोषण मुक्ति के लिए जिले में 7 जुलाई से वजन त्यौहार मनाया जा रहा है, जो 16 जुलाई तक चलेगा। वजन त्यौहार को उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत यहां शून्य से 5 वर्ष तक के बच्चों का वजन कर उनके पोषण स्तर का पता लगाया जा रहा है। वहीं 11 से 19 वर्ष तक की किशोरियों में हिमोग्लोबिन की जांच की जा रही है। इसी तरह कुपोषित बच्चों तथा एनीमिक माताओं का चिन्हांकन कर उन्हें सुपोषित करने का प्रयास किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश ने बताया, वजन त्यौहार के दौरान बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव पर जोर दिया जा रहा है। डोंगरगढ़ ब्लाक के रामाटोला और टप्पा गांव में कोरोना से बचाव हेतु आवश्यक नियमों का पालन करते हुए आयोजित किए गए वजन त्यौहार में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस मौके पर ग्रामीणों को सुपोषण के लाभ बताए गए तथा महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया गया। पौष्टिक फलों व हरी सब्जियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। वजन त्यौहार में शामिल होने वाले बच्चों का विशेष सत्कार किया जा रहा है। वजन त्यौहार में आम नागरिकों के साथ जनप्रतिनिधि भी उत्साह से शामिल होकर लोगों को जागरुक कर रहे हैं। सभी पालकों से अपने 5 वर्ष तक के बच्चों को आंगनबाड़ी ले जाकर उनके पोषण स्तर का आंकलन करवाने का आग्रह किया जा रहा है जिससे कुपोषण को हराया जा सके। उन्होंने कहा, बच्चों के पोषण स्तर के आंकलन के लिए वजन त्यौहार काफी महत्वपूर्ण है। वजन कराने से बच्चों के विकास की सही जानकारी मिलती है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने कहा, कुपोषण गर्भवती महिलाओं से बच्चों में आता है। इसलिए माताओं की सही देखभाल कर उन्हें पौष्टिक भोजन देना आवश्यक है। कुपोषण के स्तर के आधार पर बच्चों को आवश्यकता अनुसार पौष्टिक आहार और स्वास्थ सुविधाएं मुहैय्या कराई जाएंगी जिससे बच्चों में कुपोषण दूर किया जा सके। इसी तरह वजन त्यौहार में बच्चों का वजन लेकर उनका पोषण स्तर ज्ञात कर सॉफ्टवेयर में दर्ज किया जाएगा। इसी आधार पर कुपोषित बच्चों का डाटा बेस तैयार होगा जिससे कुपोषण दर कम करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने में मदद मिलेगी।

खान-पान में पौष्टिक आहार को करें शामिल
वजन त्यौहार के अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका व मितानिन घर-घर जाकर कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन कर रही हैं। बच्चे की आयु के अनुसार उनके वजन और ऊंचाई के आधार पर बच्चों के गंभीर कुपोषित, मध्यम कुपोषित या सामान्य होने का आंकलन किया जा रहा है। अभिभावकों को बच्चे के सुपोषण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। बच्चे और शिशुवती माताओं को खान-पान में पौष्टिक आहार को शामिल करने के लाभ बताए जा रहे हैं। साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका व मितानिन स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी सलाह भी दे रही हैं। कुपोषण व अन्य बीमारियों से बचाव हेतु बच्चों को दिन में 4-5 बार थोड़ा-थोड़ा खाना खिलाने, आसपास साफ सफाई रखने तथा खाने से पहले हाथ धोने जैसी आदतों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है।