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छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों को शासन से अभी कोई राहत नहीं

छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों को शासन से अभी कोई राहत नहीं


रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के अधीन काम करने वाले दाई लाख से अधिक कर्मचारी-अधिकारियों को शासन की ओर से फिलहाल कोई राहत नहीं मिलने वाली है। अभी हाल ही में कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की ओर से अपनी मांगों के समर्थन में तीन चरण में धरना प्रदर्शन कर रायपुर में विशान रैली व धरना प्रदर्शन भी किया गया, किन्तु शासन को दिये गये उनके ज्ञापन के जवाब में वित्त विभाग की ओर से 4 दिसंबर को जारी पत्र में 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता एरियर्स, सातवें वेतनमान की तीसरी किश्त और एक जुलाई 2020 से रोकी गई वेतन वृद्धियों के बारे में शासन ने कहा है कि राज्य शासन द्वारा वित्तीय संसाधन की उपलब्धता के आधार पर यथा समय उचित निर्णय लिया जायेगा।
 उल्लेख है कि 21 नवंबर को छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आयोजित हुए बैठक में शासन के उपेक्षा पूर्ण रवैये के लोकतांत्रिक विरोध एवं मांगों के निराकरण हेतु शासन का ध्यान आकृष्ट करने के लिये चरणबद्ध आंदोलन करने का निर्णय पारित हुआ था।
कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की मुख्य मांगे  जिनमे लिपिक संवर्ग के वेतन विसंगति का निराकरण साथ ही शिक्षक एवं स्वास्थ संवर्ग सहित अन्य कर्मचारी संवर्ग का वेतन विसंगति निराकृत किया जाये। प्रदेश के कर्मचारियों एवं पेंशनरों को जुलाई 19 का 5 प्रतिशत एवं जनवरी 20 का 4 प्रतिशत कुल 9 प्रतिशत महंगाई भत्ता स्वीकृति आदेश जारी किया जाये। छत्तीसगढ़ वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 का बकाया एरियर्स, 4 किश्त के भुगतान हेतु आदेश जारी किया जाये। सभी विभागों में लंबित संवर्गीय पदोन्नति, क्रमोन्नति, समयमान एवं तृतीय समयमान वेतनमान का लाभ समय सीमा में प्रदान किया जाये। सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी आदेश एवं सहायक शिक्षक पद पर नियुक्त शिक्षकों को तृतीय समयमान वेतनमान स्वीकृति आदेश जारी किया जाये। शासकीय वेतन के दौरान कोरोना संक्रमण से मृत कर्मचारियों एवं अधिकारियों के परिवार को राजस्थान सरकार के आदेश के तर्ज पर 50 लाख अनुग्रह राशि स्वीकृति आदेश जारी किया जाये। कोरोना ड्यूटी में लगाये गये शासकीय सेवकों को कोरोना भत्ता दिया जाये। अनियमित कर्मचारियों को नियमित किया जाये। जन घोषणा पत्र में उल्लेखित चार स्तरीय पदोन्नत वेतनमान स्वीकृति आदेश जारी किया जाये। साथ ही घोषणा पत्र में उल्लेखित अन्य मांगों को पूरा किया जावें। छत्तीसगढ़ वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के मूलवेतन के आधार पर 10 प्रतिशत गृह भाड़ा भत्ता सहित अन्य समस्त भत्ता स्वीकृति आदेश जारी किया जाये। राज्य में पुरानी पेंशन योजना लागू किया जावें। तृतीय श्रेणी के पदों पर 10 प्रतिशत के बंधन को मुक्त करते हुये समयसीमा के भीतर अनुकंपा नियुक्ति के समस्त लंबित प्रकरणों का निराकरण किया जावें। चतुर्थ श्रेणी के कार्यभारित/आकस्मिक सेवा के कर्मचारियों को नियमित पदों पर पदस्थापना कर समायोजित करते हुए नियमित कर्मचारियों के समान वेतन भत्ते एवं पेंशन कर लाभ दी जावें। प्रदेश के पटवारियों को पदोन्नति एवं लैपटाप के साथ उनके कार्यालयों में कम्प्यूटर की समस्त सुविधा दी जावें। पेंशनरों को त्वरित पेंशन भुगतान हेतु 20 वर्षों से लंबित राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49 को विलोपित कर पेंशनरी दायित्वों का मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के बीच बंटवारा तत्काल किया जाये। साथ ही, सेंट्रल पेंशन प्रोसेसिंग सेल भारतीय स्टेट बैंक गोविंदपुरा भोपाल से पृथक कर रायपुर छत्तीसगढ़ में स्थापित कर छत्तीसगढ़ के प्रकरणों का निपटारा शामिल था। इसके संर्दभ में मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया गया था। बुधवार को कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने अपनी लंबित मांगो के पूरा नहीं होने पर फिर प्रदेश स्तरीय आंदोलन की चेतावनी देते हुए मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा है।