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मप्र में ब्लैक फंगस के रूप में नयी चुनौती, 573 राेगियों का इलाज जारी

मप्र में ब्लैक फंगस के रूप में नयी चुनौती, 573 राेगियों का इलाज जारी

भोपाल।  कोरोना की दूसरी भयावह लहर से उबरने के प्रयास में जुटे मध्यप्रदेश में अब ब्लैक फंगस नयी चुनौती के रूप में सामने आया है और वर्तमान में इस रोग से ग्रसित 573 रोगियों का इलाज चल रहा है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से ब्लैक फंगस के संबंध में राज्य के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान ये आकड़े सामने आए। श्री चौहान ने बताया कि वर्तमान में राज्य के 5 मेडिकल कॉलेज इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा में इसका नि:शुल्क उपचार किया जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि इसके उपचार के लिए निजी अस्पताल भी चिन्हित किए जाएँ, जहाँ व्यवस्थाएँ संभव हों।
श्री चौहान ने कहा कि ब्लैक फंगस का इलाज अत्यंत महंगा है। अत: प्रदेश में इसके नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। ब्लैक फंगस के इलाज में लगने वाले एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन शासकीय चिकित्सा केन्द्रों के अलावा निजी अस्पतालों को भी उपलबधता अनुसार प्रदान किए जाएंगे। प्रदेश में ढाई हजार एम्फोटेरिसिन इंजेक्शन प्राप्त हो गए हैं तथा 10 हजार इंजेक्शन शीघ्र ही मॉयलान कम्पनी के प्रदेश को प्राप्त हो जायेंगे।
इस मौके पर स्वास्थ्य आयुक्त आकाश त्रिपाठी ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में ब्लैक फंगस के 573 मरीज 5 मेडिकल कॉलेजों में उपचाररत हैं। बैठक में चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि ब्लैक फंगस की जाँच के लिए जिलों में नि:शुल्क 'नेजल एंडोस्कॉपी' की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में भी इसकी नि:शुल्क जाँच के लिए डेस्क बनाई जा रही है।
राज्य के विभिन्न जिलों से मिली खबरों के अनुसार ब्लैक फंगस के इलाज के लिए मरीजों के परिजनों को संबंधित इंजेक्शन और अन्य दवाओं को जुटाने के लिए काफी मशक्कत करना पड़ रही है। इस बीच जिला प्रशासन भी इसके इलाज में उपयोग आने वाले इंजेक्शन और अन्य दवाओं की कालाबाजारी रोकने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।