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हमेशा की तरह महत्वपूर्ण व सामयिक विषय आईएमए बनाम पतंजलि पर नोंकझोंक जारी - चितरंजन पटेल

हमेशा की तरह महत्वपूर्ण व सामयिक विषय आईएमए बनाम पतंजलि पर नोंकझोंक जारी -  चितरंजन पटेल

सक्ती, 27 मई। अधिवक्ता हाईकोर्ट  चितरंजन पटेल ने कहा कि  हमेशा की तरह महत्वपूर्ण व सामयिक विषय आईएमए बनाम पतंजलि पर नोंकझोंक जारी है...सच में यह एक प्रकार से चिकित्सक जगत के इंसानियत विहीन व्यापारी संगठन बनाम राष्ट्रवादी विचारधारा युक्त व्यापारी संगठन का मसला है... नि:संदेह पतंजलि  ने एक पेशेवर व्यापारी की तरफ चिकित्सा क्षेत्र में मूल भारतीय चिकित्सा पद्धति के महत्त्व को स्थापित करने के साथ देश के लोगों में आरोग्य के सनातन संस्कृति को भी पुनर्जीवित किया है उससे तथाकथित विदेशी पृष्ठभूमि के चिकित्सक संगठन जो सदा से विदेशी तंत्र से पोषित होकर उसके लिए ही काम करने के उद्देश्य की प्रमुखता के साथ सरकार को नीति नियम बनाने के लिए बाध्य करती रही हैं तथा इस आड़़ में धर्मांतरण जैसे कुत्सित प्रयास के साथ तथाकथित सेवा के आड़ में सहभागी रहती चली आ रही है... ऐसी स्थिति में महामारी काल में इस शीतयुद्ध का उबाल आना आना स्वाभाविक ही है... नि:संदेह पतंजलि ने अपनी दवा का सफल व्यवसायी की तरह भलीभांति प्रचार किया है ... पर यह भी बताया कि यह सब दवा हम अपने रसोई के मसालों और घर के आसपास घास फुंस,पौधों और लताओं के जड़,फलफूल और पत्तों से घर पर भी तैयार कर सकते हैं... याने आरोग्यता के लिए आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई है ... मतलब साफ है स्वस्थ रहने के लिए बाजार पर आश्रित न रहने के साथ ही व्यापारी चिकित्सकों पर आश्रित न रह कर आत्मनिर्भरता के लिए लोगों के आत्मबल और विश्वास को जगाया है...

परिणामस्वरूप आज तथाकथित एलोपैथी के पक्षधर भी अपने घरों में सीरप, टेबलेट को हटाकर कदाचित काढ़ा, आसव पर आश्रित हो गए हैं... फिर क्यों ? ऐ दोगलापन ... तथाकथित विदेशी दवा कंपनियों के दलाल के रुप में स्थापित तथाकथित चिकित्सक संगठन जो नित प्रतिदिन सुगर, बीपी आदि शरीर के सामान्य प्रक्रियाओं का हौआ बताकर आतंकित कर जनमानस का मानसिक, शारीरिक और आर्थिक शोषण कर रहे हैं... उनकी बातों को क्यों तबज्जो देना... ये इतने खतरनाक लोग हैं इन्हें इंसानियत से कोई लेना देना नहीं है ... केवल और  केवल धन बटोरना मकसद है... इसलिये कभी वेक्शीन को हानिकारक बता देते हैं फिर दो दिन बाद वेक्शीन के बिना जीना मुश्किल कहते हैं... हद तो तब हो गई है कि कल इन लोगों के ही एक रिपोर्ट में वेक्शीनेशन करवा चुके लोगों के जीवन को बड़ा खतरा बता रहे हैं...

ऐसा डराके कोई नई दवाई बाजार में ले आयेंगे... रेमडीशिविर का हश्र हम सब जान चुके हैं... कुल मिलाकर भारत के आत्मनिर्भर, परंपरागत देशी मुफ्त ईलाज को आत्मसात करने हेतु प्रेरक सनातन भारतीय संस्कृति के पक्षधर हर व्यक्ति इन विदेशी संस्कृति के पालित पोषित मृतात्मा समान महानुभावों को गड़ना स्वाभाविक है... समझना हम सबको है कि पुरातन योग, आयुर्वेद को अपना कर अपने आपको स्वस्थ, सबल और समर्थ बनाएं... ताकि इनके इंसुलिन, केपसूल, सीरप, सिरींज के मकड़ जाल के शोषण से मुक्त हों... स्वस्थ भारत... समर्थ भारत... जय हिंद... वंदेमातरम