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ब्रेकिंग : पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बड़ी राहत, बढ़ती कीमत पर लगी रोक, तेल कपंनियों ने लिया फैसला, पेट्रोल पुन: 90 पर और डीजल 80 पहुंचा

ब्रेकिंग : पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बड़ी राहत, बढ़ती कीमत पर लगी रोक, तेल कपंनियों ने लिया फैसला, पेट्रोल पुन: 90 पर और डीजल 80 पहुंचा

पेट्रोल - डीजल की बढ़ती कीमतों को ब्रेक लगा है. कीमतें आसमान छू रही थी लेकिन अब राहत देने वाली खबर आ रही है. अब तेल कंपनियों ने रविवार को पेट्रोल-डीजल के भाव को अपरिवर्तित करने का फैसला लिया है. इस फैसले के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 90.58 रुपये और डीजल 80.97 रुपये पर है.

कंपनी के इस फैसले के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब तेल की कीमतें स्थिर है इनकी कीमत नहीं बढ़ रही इसलिए भी कंपनियों ने यह फैसला लिया है. देश के शीर्ष महानगरों में पेट्रोल सबसे महंगा है. यहां पेट्रोल 97 रुपये की कीमत पर बना हुआ है. यहां डीजल 88.06 पर है.

वित्त मंत्री सीतारमण ने एक सवाल के जवाब में कहा कि बढ़ती पेट्रोल और डीजल की कीमतों की वजह से वह 'धर्म संकट' (दुविधा) में फंसी हैं. यह एक ऐसा मामला है, जिसे लेकर हर कोई एक जवाब सुनना चाहता है कि कीमत में कटौती कब की जाएगी.

वित्त मंत्री ने कहा कि यह मामला केंद्र और राज्य दोनों से जुड़ा है. इसलिए दोनों को मिलकर इस समस्या का हल निकालना चाहिए. वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि तेल उत्पादक देशों ने कहा है कि उत्पादन में अभी और कमी आने वाली है. इससे पेट्रोल की कीमत पर दबाव बढ़ेगा और कीमत में तेजी आएगी.

पेट्रोल की खुदरा कीमत में 60 फीसदी और डीजल की कीमत में 54 फीसदी तक टैक्स लगता है. इसमें केंद्र और राज्य दोनों का हिस्सा शामिल होता है. चेन्नई में वित्त मंत्री ने कहा कि ओपेक देशों ने उत्पादन का जो अनुमान लगाया था, वह भी नीचे आने की संभावना है. इस कारण चिंता फिर से बढ़ रही है. तेल के दाम पर सरकार का नियंत्रण नहीं है. इसे तकनीकी तौर पर मुक्त कर दिया गया है. तेल कंपनियां कच्चा तेल आयात करती हैं, रिफाइन करती हैं और बेचती हैं.

भारत में पेट्रोल-डीजल का खुदरा भाव वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के भाव से लिंक है. इसका मतलब है कि अगर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल का भाव कम होता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा. अगर कच्चे तेल का भाव बढ़ता है, तो पेट्रोल-डीजल के लिए ज्यादा खर्च करना होगा, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता. जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल का भाव चढ़ता है, तो ग्राहकों पर इसका बोझ डाला जाता है. वहीं, जब कच्चे तेल का भाव कम होता है, उस वक्त सरकार अपनी रेवेन्यू बढ़ाने के लिए ग्राहकों पर टैक्स का बोझ डाल देती है.