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समूह की महिलाओं को दिया गया नेपियर घास उत्पादन व रखरखाव के संबंध में प्रशिक्षण

समूह की महिलाओं को दिया गया नेपियर घास उत्पादन व रखरखाव के संबंध में प्रशिक्षण


दोरनापाल कृष्णा नायक 

मिसमा ग्राम गोठान में हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम

दोरनापाल।  शासन द्वारा चलायी जा रही योजना नरवा, गरूवा, घुरवा एवं बाड़ी के अन्तर्गत संचालित गौठानों में पशुओं के लिए वर्षभर ग्रामों में चारा उपलब्ध कराने हेतु पशुधन विकास विभाग द्वारा 80 चारागाहों में नेपियर रूट का रोपण किया गया है। विकासखंड सुकमा के 21 चारागाह व कोंटा के 20 चारागाह एवं छिंदगढ़ के 39 चारागाह में कुल 241.50 एकड़ में रोपण की कार्यवाही की गई जिसमें 3 लाख 25 हजार नेपियर रूट लगाये गए हैं। शासन द्वारा दिये गये निर्देशानुसार गौठान प्रबंधन समिति, स्व-सहायता समूह एवं ग्रामीणों को   प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि ग्रमीण वर्षभर चारा का उपयोग कर सके। जिसमें कोंटा विकासखंड के गौठान मराईगुडा-1, ढोण्डरा में प्रशिक्षण दिया जा चुका है और विकासखंड सुकमा एवं विकासखंड छिंदगढ़ में प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रगतिशील है। गौठान में संचालित इन योजनाओं से महिला समूहों को रोजगार से जोड़ा जा रहा है और प्रशिक्षण कार्यक्रम के जरिए इन्हें और सशक्त करने का कार्य किया जा रहा है।

इसी तारतम्य में विगत दिवस ग्राम गौठान मिसमा में प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसम स्वसहायता समूह की महिलाओं को चारे के महत्व के बारे में, कटाई व साइलेज बनाने के साथ ही शासन की अन्य हितग्राही मूलक योजनाओं बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना, बकरी पालन योजना, नर बकरा पालन योजना के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उपसंचालक पशुधन विकास विभाग डॉ.एस.जहीरूद्दीन ने बताया की नेपियर घास एक बहू उद्देश्य चारे की फसल है।

इसके पौधे गन्ने की तरह लंबाई में बढ़ते है एवं पौधे से 40-50 तक पत्ते निकलते है। इसे हाथी घास के नाम से भी जाना जाता है।  नेपियर घास अधिक पौष्टिक एवं उत्पादक होती है। इसलिए जब अन्य हरे चारे उपलब्ध नहीं होते उस समय नेपियर का महत्व अधिक बढ़ जाता है इसके चारे से हे भी तैयार की जा सकती है। उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम में लिंगेश्वरी स्वसहायता समूहः मिसमा, गुलाब स्वसहायता समूह मिसमा, सीता स्वसहायता समूह दुब्बाटोटा, दन्तेश्वरी दुर्गा स्वसहायता समूह सामसेटटी, शीतला मैया स्वसहायता समूह एवं आस-पास के स्वसहायता समूह उपस्थित रही। जिसमें शासन की योजना के बारे में महिलाओं को लाभ लेने हेतु प्रेरित किया गया तथा चारागाह के महत्व के संबंध में गोंडी भाषा में जानकारी दी गई।