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कथित मानवधिकार कार्यकर्ता ने स्थानीय नेताओं की दलगत भावना को ठेस पहुंचाई ?

कथित मानवधिकार कार्यकर्ता ने स्थानीय नेताओं की दलगत भावना को ठेस पहुंचाई ?

चांपा... घीसे पीटे मांग  को लेकर कथित मानवधिकार कार्यकर्ता विकास तिवारी द्वारा नगर विकास की मांग करते हुए गत 3 मई को धरना प्रदर्शन किया गया ।


धरना मे विकास तिवारी द्वारा प्रधानमंत्री, सांसद, मुख्यमंत्री विधानसभा अध्यक्ष , विधायक एवं नपाध्यक्ष का फोटो लगा बैनर का उपयोग किया गया जो चर्चा का विषय बना हुआ है ।

कुछ लोगों ने मांग को सही ठहराते हुए समर्थन दिया तो वहीं बेनर को देखकर स्थानीय नेताओं ने धरना से दूरी बना ली । इस धरना को लेकर नगर के कुछ लोगों से चर्चा की गई तो अनेक सवाल खड़े हो गए ।

कुछ लोगों ने इस धरना को नौटंकी करार देते हुए समाचार मे बने रहने एवं वाहवाही बटोरने का काम कहा । कुछ लोगों ने कहा कि धरना प्रदर्शन करना न करना हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है ।

लेकिन धरना मे  प्रधानमंत्री सांसद एवं विधायक के साथ मुख्यमंत्री विधानसभा अध्यक्ष एवं नपाध्यक्ष की तस्वीर लगाना कहां तक उचित है? 

दो अलग विचार धारा से जुड़े नेताओं का एक साथ तस्वीर लगाने के पीछे आखिर क्या मंशा है ?

क्या इस प्रकार के कृत्य पर कोई कार्यवाही की जा सकती है अथवा नहीं ? 

क्या इससे कार्यकर्ताओं की दलगत भावना (दोनों दलों) को ठेस नहीं पहुंची ?

कथित मानव अधिकार कार्यकर्ता विकास तिवारी ने प्रशासन से धरना की अनुमति ली है । लेकिन धरना स्थल पर पोस्टर मे प्रधानमंत्री ,सांसद ,विधायक मुख्यमंत्री विधानसभा अध्यक्ष, नपाध्यक्ष की तस्वीर लगाने संबंधी कोई उल्लेख नहीं किया है। 

व्यक्तिगत आंदोलनकर्ता के रूप मे धरना की अनुमति लेने वाले विकास तिवारी ने धरना स्थल पर लगे पोस्टर मे अपना नाम क्यों प्रकाशित नहीं किया ? 

दोनों विपरीत विचार धारा से जुड़े स्थानीय नेताओं का इस संबंध में क्या विचार है ? 

क्या स्थानीय नेताओं को (दोनों दलों ) अपने देश तथा प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं का एक साथ तस्वीर प्रकाशन स्वीकार है ? वह भी स्थानीय समस्या ( आंदोलन ) को लेकर ?

विकास तिवारी द्वारा नगर विकास की मांग करते हुए उक्त धरना प्रदर्शन में जो पोस्टर बैनर उपयोग किया गया उसे लेकर स्थानीय नेताओं मे नाराजगी बनी हुई है । विकास तिवारी द्वारा अधिकारी को जो ज्ञापन सौंपा गया है उसमें भी दोनों दलों के नेताओं की तस्वीर दिखाई दे रही है । 

फिलहाल इस धरना को लेकर तरह तरह की चर्चा व्याप्त है । और कुछ स्थानीय नेता अपने दलगत भावना को ध्यान मे रख कर विकास तिवारी पर कार्यवाही किए जाने पर विचार विमर्श भी कर रहे हैं।