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अफ़सोस कि मैं सामंती संस्कृति को पूरी तरह से ध्वस्त नहीं कर सका: न्यायमूर्ति बनर्जी

अफ़सोस कि मैं सामंती संस्कृति को पूरी तरह से ध्वस्त नहीं कर सका: न्यायमूर्ति बनर्जी

चेन्नई। उच्चत्तम न्यायालय के आदेश के बाद यहां से मेघालय के रवाना होने वाले मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव बनर्जी ने बुधवार को अफसोस जताया कि वह सामंती संस्कृति को पूरी तरह से ध्वस्त नहीं कर सके।

न्यायमूर्ति बनर्जी ने उच्च न्यायालय के सभी कर्मचारियों को यहां अपने विदाई संदेश में कहा, “मुझे खेद है कि आपको मेरे लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। मैं आपके पूर्ण सहयोग की सराहना करता हूँ। मुझे अफसोस है कि मैं उस सामंती संस्कृति को पूरी तरह से ध्वस्त नहीं कर सका जिसमें आप सेवा अपनी सेवाएं दे रहे हैं।”

पीठ में अपने सहयोगियों के लिए न्यायमूर्ति बनर्जी ने कहा, “मैं माफी मांगता हूं। पहले में आपसे दूरी बनाए रखने में असमर्थ रहने के लिए और दूसरा व्यक्तिगत रूप से आपको अलविदा न कहने के लिए।”

उन्होंने कहा “अंतत: आप में से कुछ जो मेरे किसी भी कार्य से आहत हुए हों, कृपया यह जान लें कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से आहत नहीं किया गया...मैंने उन कार्यों को करने के लिए संस्था के लिए हित में समझा।”

न्यायमूर्ति बनर्जी ने कहा, “मैं इस खूबसूरत और गौरवशाली राज्य में सभी का हमेशा ऋणी रहूँगा, हमें पिछले 11 महीनों से अपनों के बीच रहने का सौभाग्य मिला है और जिस कृतज्ञता और गर्मजोशी के साथ पूरे कार्यकाल के दौरान आपने साथ दिया, वह स्वागत योग्य है।”