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किसानों को सब्सिडी या कंपनियों की जेब भरने का खेल - अधिवक्ता शत्रुहन साहू

किसानों को सब्सिडी  या कंपनियों की जेब भरने का खेल - अधिवक्ता शत्रुहन साहू

धमतरी, 20 मई।  केंद्र की मोदी सरकार द्वारा रासायनिक खाद DAP (अमोनियम डाई फास्फेट)  की कीमत में 58.33  फीसदी 1200 रूपये से 1900 रूपये कुल 700 रूपये की दाम बढ़ाने के बाद किसानों को 700 रूपये की प्रति बोरी सब्सिडी देने की घोषणा किया है जिस पर समाजसेवी एवं संयुक्त किसान मोर्चा के कानूनी सलाहकार अधिवक्ता शत्रुहन साहू ने प्रेस नोट जारी कर केन्द्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार किसानों को सब्सिडी देने के बहाने कंपनियों की जेब भर रही है  इससे किसानों के बजाय केवल फर्टिलाइजर कंपनियों को ही लाभ हो रहा है   यदि किसानों को लाभ पहुंचाना ही था तो खाद की कीमत बढ़ाने की आवश्यकता ही क्या थी ? 

शुरू से ही केंद्र सरकार कॉरपोरेट घराने के इशारे पर काम कर रही है पहले तो कृषि कानून लाकर (एमएसपी ) न्यूनतम समर्थन मूल्य को समाप्त कर खेती किसानी को पूंजीपतियों के हवाले करने का प्रयास किया किंतु विगत 175 दिनों से दिल्ली के बोर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन के दबाव में जब कृषि कानून लागू नहीं कर पाए तो चोर दरवाजे से DAP का दाम बढ़ाकर प्रति बोरी सब्सिडी और बढ़ा दी लेकिन खाद का दाम 1 रुपया भी नहीं घटाया और सारा का सारा धन फर्टिलाइजर कंपनियों की जेब में  देकर किसान हितैषी होने का दिखावा कर रही है किंतु किसान अब अच्छी तरह समझ चुके है कि हाथी के दांत खाने के कुछ और दिखाने के कुछ और है यदि सरकार वास्तव में किसानों के हित में कुछ करना चाहते हैं तो तीनों कृषि कानून को वापस लेकर एमएसपी की गारंटी का अधिकार देने वाले कानून प्रदान कर सारी सब्सिडी किसानों को सीधे उनके खाते में दें।

किसान मोर्चा के टिकेश्वर साहू असफाक हाशमी भुनेश्वर साहू सनत नीर्मलकर राम विशाल साहू निशांत भट्ट दिग्विजय साहू सतवंत महिलांग भिखारी राम साहू रसूल खान मूलचंद साहू मनोज भतपहरी ने कहा कि ये कंपनियां  जब चाहे तब रेट बढ़ा देती हैं और चाहे केन्द्र सरकार हो या राज्य सरकार किसानो के सब्सिडी के नाम पर हजारों करोड़ों रुपए प्रति वर्ष इन कंपनियों के खाते में डालकर किसान हितैषी होने का वाहवाही लूटते है! फर्टिलाइजर कंपनियों को दी जा रही 80,000 करोड रुपए की सब्सिडी यदि किसानों को सीधे दी जाए तो ना सिर्फ किसान को आर्थिक फायदा होगा बल्कि जहर मुक्त खेती की ओर भी किसान आगे बढ़ेंगे। इसके लिए इन कंपनियों की लूट को बंद करवाना पड़ेगा।