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आइसोलेशन कक्ष के बाहर बिना सुरक्षा कीट के काम करने पर मजबूर स्वास्थ्य कर्मी

आइसोलेशन कक्ष के बाहर बिना सुरक्षा कीट के काम करने पर मजबूर स्वास्थ्य कर्मी


जिला अस्पताल में 4  संदिग्ध मरीजों के ब्लड सैंपल भेजा गया रायपुर 


दंतेवाड़ा जिले में स्वास्थ विभाग की मनमानियां खत्म होती दिखाई नहीं दे

रही है स्वास्थ्य विभाग कोरोना जैसी संगीन बीमारी को भी मजाकिया

तौर पर ले रहा है।

दंतेवाड़ा, 25 मार्च | दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में 4 संदिग्ध मरीजों के ब्लड सैंपल भेजा गया रायपुर मरीजों को रखा गया है आइसोलेशन कक्ष में रखा गया है जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव/नेगेटिव है यह भी पता नही है उन्हें एक वेंटिलेशन के साथ आइसोलेशन कक्ष में रखा गया है जब कि यहाँ 4 कक्ष है जिसमे एक ही सर्वसुविधायुक्त है। इस आइसोलेशन वार्ड के बाहर पूर्ण व्यवस्था भी नही है ।जब कर्मचारियों से बात किया गया तो यह पता चला कि वेंटिलेशन मशीन को चलाने वाला अस्तपताल कर्मचारी की ड्यूटी वार्ड में नहीं है.


बल्कि नौसिखिये उस वार्ड के वेंटिलेशन को चला रहे है ।कोरोना जहां विश्व में आतंक मचा रहा है वही दंतेवाड़ा जिले में कोरोना मजाकिया रूप से ठहाके लगाता दिखाई दे रहा है यहां पर आइसोलेशन वार्ड में स्थानीय कर्मचारियों की ड्यूटी होनी चाहिये परन्तु स्वास्थ्य विभाग अपने स्थानीय कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा ना होने के कारण वहां ड्यूटी नहीं लगा रहा है बल्कि कंपनी की तरफ से कार्य कर रहे कर्मचारियों से आइसोलेशन वार्ड की सुरक्षा का कार्य करवा रहा है।जिसमें आइसोलेशन वार्ड के बाहर एक ही अस्पताल कर्मचारी कार्यरत है बाकी अन्य कर्मचारी दैनिक मजदूर है, या किसीकंपनी के मार्फत टेंडर स्वरूप कार्य कर रहे हैं ।

इन दैनिक कर्मचारियो से गंभीर समस्या वाले आइसोलेशन वार्ड में कार्य करवाया जा रहा है वह भी किसी सुरक्षा पुख्ता इंतजाम के बिना।उस वार्ड के बाहर सुरक्षा के इंतजाम होने चाहिए परन्तु  मूलभूत सुविधाये भी नही है और वहाँ पर कार्य करने वाले कर्मचारियों के पास पर्याप्त मेडिकल किट भी नहीं है वह अपनी जान पर खेलकर कार्य कर रहे हैं ।जहाँ  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिनों का बंद सुरक्षा के लिए किया है वहाँ स्वास्थ्य कर्मचारियों के पास पर्याप्त व्यवस्था नही होना एक मजाक से कम नही है ।

दंतेवाड़ा जिला अस्पताल अपनी मनमानी कर रहा है और सुरक्षा को ताक पर रखकर करोना जैसी बीमारी का मजाक उड़ा रहा है ना तो अस्पताल के पास है पर्याप्त मास्क है और ना ही पर्याप्त सुरक्षा के इंतजाम है। वहां के कर्मचारियों से पूर्ण सुरक्षा क्यों नहीं है पूछा गया तो वह अपनी नौकरी का बचाव कहते हुए मौन हो गए । इससे साफ दिखता है कि वह किन मर्ज़बूरियो से कार्य कर रहे है।

आइसोलेशन वार्ड के बाहर अस्पताल कर्मचारियों का ना होना एक सवाल खड़ा करता है यदि उन कर्मचारियों को जो दैनिक भुगतान से कार्य कर रहे हैं उन्हें इस बीमारी से बचाव न होते हुए भी कुछ हो जाता है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा क्या उसके लिए अस्पताल प्रशासन जिम्मेदारी ले रहा लेगा या जिन कंपनियों के मार्फत व कार्य कर रहे हैं वो ज़िमेदारी लेंगे। यदि अस्पताल कर्मचारियों को कुछ हो भी जाए तो सुरक्षा की दृष्टिकोण से प्रशासन अपने कर्मचारियों की मेडिकल सुविधाएं और नियमों के तहत बचाव कर सकती परन्तु उनका बचाव किस प्रकार किया जाएगा इसका जवाबदेहि किसका है।