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संपन्नता के प्रतीक धान के कटोरे को कंगाली की ओर धकेलने का है मंडी संशोधन विधेयक - रंजना साहू

संपन्नता के प्रतीक धान के कटोरे को कंगाली की ओर धकेलने का है मंडी संशोधन विधेयक - रंजना साहू

धमतरी, 29 अक्टूबर। क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य के विधानसभा के पटल पर मुखरता के साथ जनमानस की प्रखर आवाज बन चुकी विधायक रंजना डिपेंद्र साहू ने विधानसभा विशेष सत्र में मंडी संशोधन विधेयक पर कहा है कि भाजपा की 15 साल के कार्यकाल में पूर्व मुख्यमंत्री माननीय रमन सिंह ने जिस धान के कटोरे को लबालब करने के लिए अनेक किसान हितैषी योजनाओं का सूत्रपात करते हुए भूमिपुत्रों की सेवा की है, उसे कंगाली की ओर धकेलने का संयंत्र है मंडी संशोधन विधेयक। जिस स्पेक्टर राज की खात्मा पूर्ववर्ती सरकार ने की थी। उसकी वापसी कर पीछे के दरवाजे से मंडी सचिव/ भारसंधारण अधिकारी को असीमित अधिकार देते हुए किसानों व व्यापारियों को परेशान कर आर्थिक नुकसान पहुंचाने का कुत्सित प्रयास प्रतीत होता है। वहीं दूसरी ओर केंद्र द्वारा पास किया गया कृषि विधेयक किसानों को जो छूट देते हुए अपनी उपज को कहीं भी भेजने की स्वतंत्रता प्रदान करता है, उसे भी रोक कर किसानों को अपनी उपज को औने पौने दाम में बेचने को मजबूर करेगी मंडी संशोधन विधेयक।

 विधायक श्रीमती साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ के सभी किसानों के हित में मंडी संशोधन विधेयक उचित नहीं है और ना ही व्यापारियों के व्यापार को प्रोत्साहित करने वाला है। व्यापारियों द्वारा हिसाब-किताब, आवक-जावक जैसे अनेक कागजी पेंचिंंदगी के बीच व्यापारियों को प्रताड़ित कर मंडी व किसानों के बीच जोड़ने वाली कढ़ी आड़त प्रथा पर भी कुठाराघात करते हुए समूल मंडी को ही खत्म करने का एक षड्यंत्र का नाम मंडी संशोधन अधिनियम के रूप में दिखता है। यह कृषि वर्ग के हितैषी के रूप में संशोधन के मसौदा तैयार किया गया है यह नहीं लगता। इसलिए इस संशोधन अधिनियम केवल राजनीतिक प्रतिकार का एक भोथरा हथियार है जिसे राज्य की जनता, किसान, व्यापारी सब नकार रहे हैं।