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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - टीकाकरण महाअभियान : देर आयद-दुरुस्त आयद

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से  - टीकाकरण महाअभियान : देर आयद-दुरुस्त आयद

-सुभाष मिश्र

दाग देहलवी का एक शेर है -
बड़ी देर कर दी मेहरबां आते-जाते
तुम्हे देखकर थम गई मेरी जान जाते-जाते

इवेंट प्रेमी सरकार ने विश्व योग दिवस अंतत: वो दिन आ ही गया जिसका बड़ी बेसब्री से देश की वयस्क यानी वोटर जनता प्रतीक्षा कर रही थी। योग दिवस को टीकाकरण महाअभियान का योग निकला। हम तो यही कहेंगे देर आयद-दुरुस्त आयद।
आपदा को अवसर में बदलने वाले हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन के साथ ही सही एक बड़े इवेंट के रूप में टीकारण महाअभियान की शुरुआत की। समूचे टीकाकरण को लेकर अब तक की कहानी बड़ी पेचिदा और दुखदायी है। टीके को लेकर केंद्र और राज्य के बीच में टकराव, हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट की फटकार और बहुत सारे लोगों का कोरोना संक्रमण से मर जाना जैसी दुख भरी कहानियां शामिल हैं।

सरकार ने जबसे कोरोना वायरस हमारे देश में आया है, उसके बाद से ऐसा कोई अवसर नहीं छोड़ा जब इसे इवेंट न बनाया हो। पहली लहर में कोरोना वारियर्स के सम्मान की बात हो तो अस्पतालों पर हवाई पुष्प वर्षा से लेकर लोगों में व्याप्त भय को दूर करने के नाम पर घर के बाहर निकलकर ताली, थाली बजाना, दिया जलाना। कोरोना कालखंड में 29 मार्च से अब तक 9 बार मन की बातके अलावा कई बार राष्ट्र के नाम संबोधन से लेकर अप्रैल 2021 में टीकाकरण सप्ताह, एक मईमजदूर दिवस से 18 से 45 वर्ष के लोगों के लिए टीकाकरण की शुरुआत और अब 21जून को विश्व योग दिवस के अवसर पर टीकाकरण महाअभियान की शुरुआत। इस बीच राम जन्मभूमि शिलान्यास के अन्य कार्यक्रम से लेकर पांच राज्यों में चुनावी सभाओं, रैलियों का आयोजन। आपदा में अवसर की जो बात हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते थे, उसे उन्होंने ही सबसे पहले अमल में लाया। खैर देर आयद-दुरुस्त आयद की कहावत को चरितार्थ करते हुए अब पूरे देश में तैयारी के साथ सभी के लिए टीकाकरण की शुरुआत हो गई है। पूरी दुनिया जान गई है कि कोरोना संक्रमण से बचाव का रास्ता वैक्सीनेशन से होकर ही गुजरता है। जब तक देश के अधिकांश लोगों को टीके की दोनों डोज नहीं लग जाती तब तक देश सुरक्षित नहीं है। बहुत अरसे बाद में आज कोरोना पॉजिटिव की संख्या 702887 आई है जो कि बाकी दिनों से कम है किन्तु यह इतनी भी कम नहीं है कि हम बेफिक्र होकर खुली सड़क पर चौड़ा सीना ताने बिना मास्क और दोगज दूरी के फासले से निकल पड़े।

एम्स दिल्ली के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने शनिवार को कहा कि अगर कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन नहीं किया गया और भीड़ को नहीं रोका गया तो भारत छह से आठ सप्ताह में कोरोनावायरस की तीसरी लहर देख सकता है। जब तक आबादी के एक बड़े हिस्से काटीकाकरण नहीं हो जाता, तब तक कोविड-उपयुक्त व्यवहार का आक्रामक रूप से पालन करने की आवश्यकता है। हमें टीकाकरण शुरू होने तक एक और बड़ी लहर को रोकने के लिए आक्रामक तरीके से काम करने की जरूरत है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में वर्तमान में 7,02,887 सक्रिय मामले हैं, जबकि पिछले 24 घंटों में 78,190 डिस्चार्ज होने के साथ 2,88,44,199 मरीजों को अब तक छुट्टीदे दी गई है। जबकि राष्ट्रीय कोविड -19 की वसूली दर में सुधार हुआ है और यह 96.16 प्रतिशत हो गया है।
कोरोना महामारी के दौरान मरने वालों के सही आंकड़ों का मिलना अभी बाकी है। बहुत से राज्यों में नये सिरे से आंकड़ों की पड़ताल हो रही है। जिसमें काफी अंतर दिखाई दे रहा है। इस बीच केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि वह कोरोना से मरने वालों को चार लाख रुपए मुआवजा नहीं दे सकती। मुआवजे के चक्कर में बहुत से लोगों के सरकारी रिकार्ड में 3 लाख 88 हजार लोग ही मरे हंै पर श्मशान, कब्रिस्तान के आंकड़े कुछ और ही सच्चाई बयां कर रहे हैं।
कोरोना से बड़ी संख्या में मरने वाले शायद यही कह रहे हैं -
श्मशान तेरी वीरानगी क्यों नहीं जाती
हम तो मर-मर कर तुझे आबाद किये जाते हैं

बहुत से मरने वालों की आत्मा भोलाराम के जीव की तरह कोर्ट से उचित मुआवजे के चक्कर में भी यही किसी दफ्तर की फाईलों में अटकी है। अब सरकार ने साफ कर दिया है कि वो कोरोना से ेमरने वालों के परिवार को चार लाख मुआवजा नहीं देगी।

केंद्र सरकार ने टीकाकरण को लेकर पूर्व में अपनाई गई रणनीति और गलतियों से सबक लेकर न्यायालयों के दिशा-निर्देश के बाद टीकाकरण महाअभियान में 18 वर्ष से ऊपर के सभी लोगों को टीका लगाने का प्रबंध किया है। अब पहले की तरह टीकाकरण के लिए किसी प्रकार के पंजीयन की जरूरत नहीं है। कोई भी व्यक्ति किसी भी केंद्र पर अपने आधार कार्ड, मतदाता परिचय पत्र, पहचान पत्र के आधार पर टीका लगा सकता है। कोरोना की दूसरी लहर की भयावहता के बाद अब लोगों में टीकाकरण को लेकर जागरूकता आई है, जिसके परिणामस्वरूप आज देश के बहुत सारे टीकाकरण केंद्रों पर सुबह से ही टीका लगवाने वालों की लंबी-लंबी लाईन लगी है। आंध्र प्रदेश में दस लाख से अधिक लोगों ने आज टीके लगवाये। सरकार ने दिसम्बर अंत तक देश की 95 करोड़ वयस्क आबादी को टीके लगाने का लक्ष्य रखा है। टीकाकरण अभियान में अभी भी ग्रामीणों क्षेत्रों में व्याप्त भ्रांति इस लक्ष्य की प्राप्ति में बाधक बनी हुई है। उम्मीद की जा सकती हैकि सभी के आपसी प्रयास और जागरूकता कार्यक्रम के चलते टीकाकरण का लक्ष्य पूरा हो जायेगा। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी योग दिवस के अपने संबोधन में कहा कि दुनिया के अधिकांश देशों के लिए योग दिवस कोई उनका सदियों पुराना सांस्कृतिक पर्व नहीं है। इस मुश्किल समय में, इतनी परेशानी में लोग इसे भूल सकते थे, इसकी उपेक्षा कर सकते थे लेकिन इसके विपरीत, लोगों में योग का उत्साह बढ़ा है, योग से प्रेम बढ़ा है। कोरोना में योग आत्मबल का माध्यम बना।
जब कोरोना के अदृश्य वायरस ने दुनिया में दस्तक दी थी, तब कोई भी देश, साधनों से, सामर्थ से और मानसिक अवस्था से, इसके लिए तैयार नहीं था। हम सभी ने देखा है कि ऐसे कठिन समय में, योग आत्मबल का एक बड़ा माध्यम बना। डॉक्टरों और मरीजों ने अपनी सुरक्षा के लिए योग को जरिया बनाया।

हमारे देश में 16 जनवरी में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का अपना टीकाकरण शुरू कर दिया है, हमने दूसरी लहर के बारे में विशेषज्ञ चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया, लोगों को वैक्सीन के उपयोग से भ्रमित किया और फिर स्पष्ट रूप से आगे की योजना नहीं बनाई। अब पिछली गलतियों से सबक लेकर मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, अब गुजरात और हरियाणा जैसे भाजपा शासित पांच राज्यों ने विशेष अभियान चलाकर महाअभियान में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया है।  
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार पहले दिन कोविड-रोधी टीके की 80 लाख से अधिक खुराकें दी गईं। कोविड-19 टीकाकरण अभियान के लिए देश के वैक्सीन निर्माताओं द्वारा जुलाई में लगभग 13.5 करोड़ खुराक उपलब्ध कराई जाएंगी। राज्यों को 13.5 करोड़ खुराक में से 75 प्रतिशत अग्रिमयोजना के लिए जुलाई में मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी। यह लोगों की उम्मीद का टीका है जो लोगों में नई उर्जा और जिजीविषा का संचार करेगा।