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भारत के वैक्सीनेशन के टारगेट से पिछड़ी दुनिया

भारत के वैक्सीनेशन के टारगेट से पिछड़ी दुनिया

न्यूयॉर्क। 24 सितंबर को न्यूयॉर्क (New York) में क्वाड समिट (Quad Summit) होने जा रही है. इसमें अमेरिका के साथ जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत भी शिरकत कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi), अमेरिकी प्रेसिडेंट जो बाइडन (Joe Biden), ऑस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मॉरिसन और जापानी पीएम प्रधानमंत्री योशिहिडे सुगा के साथ मुलाकात करेंगे. इन नेताओं की बातचीत का एक बड़ा एजेंडा कोविड-19 (Covid-19) भी होगा. चारों लीडर कोरोना महामारी की रोकथाम और इसकी वैक्सीन डोज को तेजी और सरलता से उपलब्ध कराने के हल ढूंढेंगे. इस बार मीटिंग में पीएम मोदी के फैसलों पर सभी की निगाहें टिकी होंगी. अमेरिका पहले ही भारत से कोरोना वैक्सीन के एक्सपोर्ट को बढ़ाने का आग्रह कर चुका है. बाइडन प्रशासन की योजना है कि आगामी ग्लोबल मीटिंग में कोविड महामारी के खिलाफ पीएम मोदी अहम भूमिका निभाएं.

वैक्सीन का सबसे बड़ा उत्पादक है भारत
भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता देश है. लेकिन इस साल मार्च में भारत में स्थिति भयावह हो जाने के बाद मोदी ने वैक्सीन के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया था. उस वक्त कोरोना की दूसरी लहर से भारत में लाखों में मौतें हुईं थीं. अमेरिका का मानना है कि विकासशील देशों में जल्द से जल्द टीकाकरण हो जाएं, इसके लिए वैक्सीन का ज्यादा से ज्यादा एक्सपोर्ट होना जरूरी है. बाइडन प्रशासन के सीनियर अधिकारी ने कहा कि हम भारत से द्विपक्षीय और दूसरे अन्य चैनलों से कोविड वैक्सीन की सप्लाई और इसे एक्सपोर्ट करने की समय-सीमा पर चर्चा कर रहे हैं.

भारत का स्टैंड क्या है?
मोदी सरकार को उस वक्त आलोचना का सामना करना पड़ा था, जब उसने 60 मिलियन वैक्सीन डोज विदेशों में एक्सपोर्ट किए थे. हालांकि सीएनएन-न्यूज 18 के सूत्र बताते हैं कि कोरोना वैक्सीन खासकर सीरम की कोविशील्ड का एक्सपोर्ट अब तभी किया जाएगा, जब तक साल के आखिर तक देश के सभी वयस्कों को दोनों डोज लग जाएंगे.
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अमेरिका भी लगा चुका है बैन
भारत की तरह अमेरिका भी कई महीनों तक अपने वैक्सीन प्रोग्राम को ड्राइव करने के लिए इसके निर्यात पर रोक लगा चुका है. अमेरिका ने बूस्टर के लिए करोड़ों डोज रिजर्व कर रखे हैं, जिस पर WHO भी चिंता जता चुका है. WHO के मुताबिक, 5 बिलियन से ज्यादा कोविड डोज में से 75% डोज पर सिर्फ 10 देशों का कब्जा है.

मोदी के साथ नरम रुख अपनाएगा अमेरिका
कोविड वैक्सीन एक्सपोर्ट के मामले में बाइडन प्रशासन ने कई अहम फैसले लिए हैं. वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, उनका प्रशासन पीएम मोदी के लिए नरम रुख अपनाएगा. उन्होंने बताया कि आगामी मीटिंग में बाइडन की कोशिश होगी कि बाकी देश COVAX को वैक्सीन वितरण का मुख्य हथियार मानें. टीम बाइडन का लक्ष्य है कि सरप्लस सप्लाई हाेने पर विकसित या अमीर देश वैक्सीन को डोनेट करें ना कि बेचें.

भारत-अमेरिका वैक्सीन संबंध
इस साल अप्रैल में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने गेल स्मिथ को वैक्सीन डिप्लोमेसी एफर्ट्स का हेड बनाया था. बाइडन ने क्वॉड वैक्सीन पार्टनरशिप की घोषणा की थी, इसका मकसद 2022 के आखिर तक इंडो-पेसिफिक रीजन में अरबों वैक्सीन के फाइनेंस, मैन्युफेक्चरिंग और उसकी डिलिवरी का काम देखना था. इस प्लानिंग का केंद्र भारत था. लेकिन हालात तब थोड़े तनावपूर्ण हो गए, जब अमेरिका वैक्सीन के कच्चे माल के निर्यात पर लगा बैन हटाने को तैयार नहीं हुआ.