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दुकान आपके द्वार..., अब बर्तन और जूते चप्पल की भी चलती-फिरती दुकान

दुकान आपके द्वार...,  अब बर्तन और जूते चप्पल की भी चलती-फिरती दुकान


राजकुमार मल

भाटापारा, 14 जून। सायकल में सब्जी, फल। बाईक में दाल। चार पहिया में कपड़े और मनिहारी सामान। कोरोना काल में बाजार का यह बदला स्वरूप गांवों को खूब पसंद आ रहा है।

कोरोना ने खूब सिखाया। सबक भी दिए और बताया कि प्रतिकूल स्थितियों को किस तरह अनुकूल बनाया जा सकता है। बाजार का बदल चुका स्वरूप, इसका ही एक उदाहरण कहा जा सकता है, जहां उपभोक्ता सामग्रियों की खरीदी के लिए बाजार खुद हमारे दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। परिवर्तन का यह दौर शहरी बाजार को भले ही रास ना आ रहा हो लेकिन ग्रामीण क्षेत्र इसे हाथों-हाथ ले रहा है।


इसलिए दुकान आपके द्वार

कोरोना के शुरुआती दिन और लंबे लॉकडाउन के बीच उपभोक्ता सामग्रियों की पहुंच आसान नहीं थी। रास्ता निकाला। राहत और रियायत के बीच साइकिल और बाईक से गांव तक पहुंच बनाई। प्रतिसाद तेजी से मिला। स्वीकार्यता के बाद, चार पहिया वाहनों ने भी ऐसी सामग्री की खोज की, जिनकी जरूरत रोज पड़ती है। इससे मनिहारी सामान और कपड़ा की आसान पहुंच ग्रामीण क्षेत्र तक पक्की हुई। अब यह चलती-फिरती दुकान स्थाई दुकानों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

बर्तन और जूते चप्पल भी

सब्जी, अनाज, कपड़े और मनिहारी सामान के बाद अब बर्तन और जूते चप्पल वाले भी पहुंच बना रहे हैं। दिलचस्प यह कि सीजन के अनुरूप यह बाजार अपना स्वरूप भी बदल रहा है। बारिश ने दस्तक दे दी है, इसलिए रेनकोट, छतरियां और तिरपाल बेचने वाले भी गांव- देहात तक पहुंच बना रहे हैं। जाहिर सी बात है कि ग्रामीण क्षेत्र का बाजार तेजी से स्वरूप बदल रहा है।