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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - राम नाम की लूट है

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - राम नाम की लूट है

-सुभाष मिश्र
यदि अयोध्या में एकाएक किसी जमीन के रेट पांच मिनट में पांच करोड़ अस्सी लाख से बढ़कर 18 करोड़ पचास लाख हो जाये तो यह रामकृपा ही तो है। जमीन के बढ़ते दाम को लेकर हम भी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय की तरह कह सकते हैं कि यदि रामलला की कृपा बनी रहे तो क्या से क्या नहीं हो सकता। राम सदियों से कुछ लोगों के बहुत काम आ रहे हैं। ये रामनामी लूट है, लूट सके तो लूट।

राम मर्यादा पुरुषोत्तम है। राम हमारे आराध्य हंै। राम भवसागर पार कराने वाले हैं। राम संकटमोचन हंै। मरते हुए आदमी के अंतिम शब्द राम-राम, हे राम होते हैं। घर से श्मशान तक की यात्रा में राम नाम सत्य है, सत्य बोलो गत है, का ही जयघोष सुनाई देता है। रामनामी रथ पर सवार होकर बीजेपी की नैय्या तो पार हो गई। अडवाणी जी बीच भंवर में फंसकर रह गये। अयोध्या में तमाम विवादों के पटाक्षेप के बाद रामलला का भव्य मंदिर बनने जा रहा है। रामलला की आदमकद प्रतिमा लगने जा रही है। जब भी मन उदास होता है, निराशा का अंधकार गहरा होता है तो यह भजन ढाढस बंधाता है। तेरा रामजी करेंगे बेड़ा पार, उदासी मन काहे को डरे।
महर्षि वाल्मिकी हो या गोस्वामी तुलसीदास सभी ने अपने लेखन से राम की महिमा और कथा को जन-जन तक पहुंचाया है। राजनीतिक दल अक्सर रामराज्य लाने की बात करते हैं। बकौल गोस्वामी तुलसीदास दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि व्यापा।

भगवान राम ही क्यों हमारे तैंतीस करोड़ देवी-देवता हमारे द्वार पर खड़े हमारे कल्याण की कामना करते हैं। यही वजह है कि हम भगवान गणेश की सबसे पहले आराधना करते हुए गणपति की सेवा मंगल मेवा, सेवा से सब विघ्न हरे, तीन लोक के सकल देवता, द्वार खड़े यही अर्ज करें। यह आरती गाकर हम आश्वस्त रहते हैं।
लूट हमारे देश में मौलिक अधिकार है जिस पर किसी एक राजनीतिक पार्टी, धार्मिक नेता या किसी एक अफसर की मोनोपल्ली नहीं है। जब जिसको जहां आपदा दिखाई देगी वो वहीं अवसर तलाश लेगा। हमारे देश में लहरों के राजहंसों की कमी नहीं है, वे रेगिस्तान में झील तलाश सकते हैं। प्रतिभावान नेता और अफसर ऐसी-ऐसी जगह से अपने लिए गुंजाइश निकाल लेते हैं जो सरकारी भाषा में ड्राई एरिया समझ जाता है।

दुनिया में किसी का भी शासन हो, कोई भी सत्ता हो, वह ईश्वर, अल्लाह, गॉड आदि के नाम पर ही चलती है। धर्म और धार्मिक सत्ताएं तरह-तरह से अपना वर्चस्व कायम करके जनता धर्म के नाम पर बांधे रखती है, अनुशासित करती है। धार्मिक गुरू, भक्त और भगवान के बीच की ताकतों के हाथों संचालित होकर कभी जन्नत, तो कभी दोजख, कभी हेल तो कभी हैवन, तो कभी स्वर्ग और नरक की अवधारणा के बीच झुलती रहती है। धर्म शोषक वर्ग के हाथों में बहुत धारदार हथियार है। धर्म का उपयोग साधारण मनुष्यों को बहकाने के लिए इस तरह किया जाता है जिससे उनकी आर्थिक, सामाजिक सभी तरह की समस्याएं सुलझ जायेगी। जब धर्म संप्रदाय बन जाता है तो इन संप्रदाय का उपयोग निहित स्वार्थ वाले लोग करते हैं। चतुर लोग भगवान के नाम पर अपना धंधा चलाते हैं। मंदिरों में चढऩे वाला चढ़ावा, मिलने वाली भेंट, मठो और ट्रस्टों की संपत्ति, चंदे पर तथाकथित भक्तोंं और पुजारियों का कब्जा होता है। भगवान की आड़ में ये अपना उल्लू सीधा करते हैं। बहुत से लोग अपना परलोग सुधारने के चक्कर में इस लोक की जमीनी हकीकत से भी बेखबर रहते हैं। ऐसे ही बेखबर लोगों की बेखबरी और धार्मिक अंधश्रद्धा, भक्ति का फायदा लेकर बहुत से लोग धर्म की ध्वजा पकड़कर अपनी वैतरणी पार करते हैं। राम नाम की वैतरणी से पार होने के लिए किसी एक पार्टी का होना जरूरी नहींं है। राम सबके हैं, सबमें राम है। सब मिलकर देश का राम नाम सत्य करने में लगे हैं।

कभी राम मंदिर निर्माण के लिए भोपाल और बाकी जगहों पर कांग्रेस चंदा इकठ्ठा करती है। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा के नेतृत्व में भोपाल के न्यू मार्केट स्थित हनुमान मंदिर में पूजा-पाठ के बाद कांग्रेस नेताओं ने राम मंदिर निर्माण के लिए लोगों से धन मांगे थे। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह राजीव गांधी का सपना था। कांग्रेस नेता लोगों के खुद राशि नहीं ले रहे। वे लोग से अपील कर रहे थे कि आप लोग सीधे किसी को चंदा नहीं दें। सीधे राम मंदिर ट्रस्ट के अकाउंट में राशि ट्रांसफर करें। इससे फायदा यह होगा कि बिचौलिए बीच में नहीं रहेंगे। पहले भी राम मंदिर के नाम पर चंदा हुआ है लेकिन उन पैसों का हिसाब कहां है। राजीव गांधी ने राम मंदिर का ताला खुलवाया था। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश यह बन रहा है। कांग्रेसी भोले हैं उन्हें पता नहीं क्यों यह लगा कि ट्रस्ट के नाम पर सीधे एकाउंट में चंदा जायेगा तो बिचौलिए नहीं रहेंगे। यही भोलापन उन्हें विपक्ष में बैठने पर मजबूर कर गया। उन्हें पता ही नहीं चला चंदा तो चंदा उनके विधायक तक दूसरे के एकाउंट में चले गये और विधानसभा में उनका एकाउंट डेफिसिट में चला गया। वे सोचते हैं कि होइहि सोइ जो राम रची राखा।

आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी राज्यसभा सांसद संजय सिंह और सपा के नेता पवन पांडे ने आरोप लगाया है कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़ा यह विषय करोड़ों लोगों की आस्था से ही जुड़ा है। दो करोड़ में जमीन का बयाना हुआ और उसी दिन फिर साढ़े 18 करोड़ में एग्रीमेंट हुआ। एग्रीमेंट और बयाना दोनों में ही ट्रस्टी अनिल मिश्रा और अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय गवाह हैं।  

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर आरोप लगाया है कि हे राम, ये कैसे दिन... आपके नाम पर चंदा लेकर घोटाले हो रहे हैं। बेशर्म लूटेरे अब आस्था बेच रावण की तरह अहंकार में मदमस्त हैं।
धर्म हमेशा से लोगों की आस्था के साथ-साथ बहुत सारे लोगों के लिए लूट, शोषण का हथियार रहा है। भोली-भाली धर्म-परायण जनता की आस्था का फायदा उठाकर बहुत बार इन्हे मरने तक के लिए छोड़ दिया जाता है जैसा हमने कोरोना काल में हरिद्वारा में हुए कुंभ के मेले के दौरान देखा।   

रामजन्म भूमि जमीन विवाद पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बयान देकर कहा है कि सभी प्रकार की कोर्ट फीस और स्टैंप पेपर की खरीदारी ऑनलाइन हो रही है। 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद अयोध्या में जमीन खरीदने के लिए देश से बहुत सारे लोग आने लगे हैं।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय भले ही बहुत ही नादानी से कहें कि आरोप लगाने वाले तो हम पर गांधी की हत्या का भी आरोप लगाते हैं। हम आरोपों की जांच करा लेंगे। दरअसल वो नहीं जानते- गांधी के राम, वह राम नहीं है जो अयोध्या नरेश के पुत्र हैं। गांधी के अनुसार, मेरे राम, मेरी प्रार्थनाओं के राम, वह ऐतिहासिक राम नहीं हैं जो अयोध्या नरेश दशरथ पुत्र थे। मेरा राम शाश्वत, अजन्मा और अद्वितीय राम है। मैं केवल उसी की आराधना करता हूं। मैं केवल उसका अविलंब चाहता हूं और वही आपको भी करना चाहिए। वह सबके लिए बराबर है। इसलिए मैं नहीं समझ पाता कि मुसलमान या कोई और धर्मावलंबी उसका नाम लेने से आपत्ति कैसे कर सकता है? हां, वह ईश्वर को रामनाम से ही पहचानने के लिए बाध्य नहीं है। वह उसे अल्लाह या ध्वनि के सामंजस्य को बनाए रखने के लिए खुदा कह सकता है। मेरे लिए ....दशरथ पुत्र, सीतापति, राम सर्वशक्तिमान तत्व है। जिसका नाम हृदय में धारण करने से सभी मानसिक, नैतिक और भौतिक व्याधियां दूर हो जाती हैं।