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नशा छोड़कर स्वस्थ्य जीवन जीने के लिए खुशहाल हुए लोग

नशा छोड़कर स्वस्थ्य जीवन जीने के लिए खुशहाल हुए लोग

रायपुर। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को समझना और उनका निराकरण करना वर्तमान समय में बहुत जरूरी है। कोरोनाकाल में हर व्यक्ति मानसिक तनाव और चिंता से गुजर रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए बलौदाबाजार के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं लोगों को पहुंचाई जा रही हैं। जिसमें वह लोग भी शामिल हैं जो मानसिक बीमारी की वजह से अत्याधिक नशा सेवन करते हैं। बेहतर मानसिक इलाज के फलस्वरूप कई लोगों ने नशा सेवन छोड़कर स्वस्थ्य जीवन अपनाया है और अन्य लोगों को भी नशाखोरी नहीं करने की सीख दे रहे हैं।

जिला चिकित्सालय में ऐसे लोगों का इलाज किया जाता है और विशेष काउंसिलिंग कर मानसिक विकारों को दूर करने का प्रयास किया जाता है। ताकि नशा सेवन करने वाले लोग चिकित्सकीय लाभ लेकर नशे से दूर रहकर समाज की मुख्य धारा में शामिल हो सकें। राज्य सरकार भी अब प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात डॉक्टरों को मानसिक बीमारियों और मानसिक रोगियों की पहचान करने तथा ऐसे रोगियों का इलाज सुविधा मुहैय्या कराए जाने का प्रयास कर रही है। सरकारी प्रयास की बदौलत ही जिले के सभी ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य केन्द्रों में मानसिक रोगियों को परामर्श प्रदान किया जा रहा है। डॉ. राकेश कुमार प्रेमी मनो चिकित्सक (एनएमएचपी) और कार्यक्रम कंसल्टेंट डॉ. सुजाता पांडेय ने बताया, जिले में मानसिक रोग को लेकर लोगों में जागरूकता आई है और मानसिक बीमार व्यक्तियों विशेषकर हर तरह की नशा का सेवन करने वाले व्यक्ति इससे लाभान्वित भी हो रहे हैं।

नशा छोड़कर हर समस्या का मिला समाधान- जिला चिकित्सालय में पूरी तरह नशा सेवन ( शराब एवं अन्य नशा) छोडऩे वाले लोगों ने बताया नशा करना समस्या का समाधान नहीं है बल्कि नशा नहीं करने से हर समस्या का समाधान मिला। तहसील पलारी जिला बलौदाबाजार के रहने वाले 37 वर्षीय शेष नारायण वर्मा बताते हैं उन्हें इलाज नहीं कराने के पहले भीड़भाड़ ,ज्यादा लोगों के सामने जाने और गाड़ी पर बैठने पर डर लगता था। लेकिन शराब पीकर लोगों के सामने जाने और गाड़ी पर बैठने में नहीं डर लगता था। इस तरह वह शराब का अत्याधिक सेवन करने के आदी हो गए।  उनकी इस आदत ले लोग उन्हें शराबी कहकर उनसे घृणा करने लगे।

दो साल पहले जिला चिकित्सालय में उनका इलाज शुरू हुआ और वह पूरी तरह स्वस्थ्य हैं और शराब पीना भी छोड़ दिया है।  इसी तरह 35 वर्षीय उमा शंकर भी हैं, अत्याधिक शराब सेवन से मानसिक रूप से अस्वस्थ्य होने की वजह से चार माह पूर्व ही वह जिला अस्पताल पहुंचे। यहां उनका इलाज अभी चल रहा है लेकिन उन्होंने शराब पूरी तरह से छोड़ दिया है। अब समाज, घर परिवार के अन्य लोगों को नशा नहीं करने और ऐसी परिस्थिति में मानसिक रोगों का इलाज संभव है, इसकी सीख लोगों को दे रहे हैं।

भर्ती कर इलाज की सुविधा जल्द- सीएमएचओ डॉ.खेमलाल सोनवानी ने बताया नशे की लत एक मानसिक बीमारी है। अधिकांश लोग मानसिक समस्याओं से जूझते हुए शराब या अन्य प्रकार के नशे का सेवन करने लगते हैं। आजकल नशे के प्रकार भी बढ़ रहे हैं, और नशे की लत गंभीर मानसिक बीमारी है जिसका इलाज जिला चिकित्सालय में किया जाता है। जल्द ही जिला अस्पताल में भर्ती कर नशे की लत के शिकार ऐसे मरीजों का इलाज भी शुरू किया जाएगा।

स्पर्श क्लिनिक में विशेष इलाज- जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम , बलौदाबाजार के अंतर्गत जिला चिकित्सालय  में स्पर्श क्लिनिक संचालित है। जिला नोडल अधिकारी एवं मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ राकेश कुमार प्रेमी द्वारा नशामुक्ति के लिए नशा सेवन करने वाले लोगों का इलाज किया जा रहा है। अप्रैल 2020 से 23 दिसंबर 2020 तक नशा मुक्त इलाज के क्रम में  53 व्यक्तियों ( शराब सेवन 26, तंबाकू /गुड़ाखू /बीड़ी  27) का इलाज चल रहा, जिसमें से  24 लोग ऐसे हैं जिनके द्वारा किसी प्रकार का नशा सेवन नहीं किया जा रहा है। इन्य 29 लोगों का  फॉलोअप के माध्यम से इलाज किया जा रहा है।