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वर्ष 2020 में इतिहास में सबसे भ्रष्टतम कमलनाथ सरकार को गिराने में संधिया की रही अहम भूमिका ?

 वर्ष 2020 में इतिहास में सबसे भ्रष्टतम कमलनाथ सरकार को गिराने में संधिया की रही अहम भूमिका ?

भोपाल ।  वर्ष 2003 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी की फायर ब्रांड नेत्री सुश्री उमा भारती के नेतृत्व में प्रदेश के बंटाढार के नाम से चर्चित दिग्विजय सिंह की सरकार को जो अपदस्थ करने में सफलता प्राप्त की उसके बाद से भले ही उमा भारती को चंद माह बाद भाजपा के नेताओं ने चले द्वंद के चलते उमा भारती को सत्ता से हटाने में सफलता प्राप्त कर प्रदेश की सत्ता की कमान शिवराज सिंह चौहान के हाथों में सौंपी गई !

इसके बाद से लेकर ऐसा कोई अवसर कांग्रेस के नेताओं को प्राप्त नहीं हुआ कि वह 15 वर्षों तक सत्ता पर काबिज हो सके। इन 15 वर्षों के सत्ता के वनवास के दौरान वर्ष 2018 में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह और कमलनाथ की सूझबूझ से कमलनाथ के नेतृत्व में 17 दिसम्बर 2018 में बनी कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के बाद प्रदेश के इतिहास का वह काला अध्याय शुरू हुआ !

जिसके चलते प्रदेश में चली कमलनाथ के नेतृत्व की एक वर्ष 197 दिन की सरकार का वह काला अध्याय आज भी चर्चाओं में है जब प्रदेश के इतिहास में इस सरकार को सबसे भ्रष्टतम सरकार की संज्ञा दी जा रही है। हालांकि 2018 में हुए चुनाव के दौरान दिग्विजय सिंह और कमलनाथ ने अपने पुत्र मोह के चलते जिन युवा जोशीले स्वर्गीय राजमाता विजयाराजे सिंधिया के वंशज जिनकी सूझबूझ व युवा वर्ग में आकर्षण के चलते कमलनाथ की सरकार प्रदेश की सत्ता पर काबिज हुई, लेकिन जिन ज्योतिरादित्य सिंधिया की बदौलत कांग्रेस के 15 वर्षों के सत्ता के वनवास के बाद सरकार तो बनी लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक विधायकों की अनदेखी और भेदभाव होने लगा, जिसको सिंधिया और उनके समर्थकों ने एक वर्ष 197 दिन तक तो सहन किया और फरवरी 2020 आते-आते भारतीय जनता पार्टी के  दिग्गजों ने कांग्रेस में व्याप्त असंतोष को भांप लिया और इसके बाद इस प्रदेश के कमलनाथ के नेतृत्व वाली भ्रष्टतम सरकार को अपदस्थ करने के लिये भाजपा के नेताओं ने उच्च स्तरीय नेताओं ने रणनीति तैयार की और इसके चलते कांग्रेसी विधायकों से सम्पर्क करने के लिये भाजपा की टीम बनाई गई इस टीम का नेतृत्व शिवराज सिंह चौहान के संकटमोचन कहे जाने वाले भाजपा के नेता और पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा जिन्हें आर उनके स्टाफ को कमलनाथ सरकार ने ई-टेण्डरिंग घोटाले के नाम पर घेरने की भरसक कोशिश की लेकिन डॉ. नरोत्तम मिश्रा की चतुराई के कारण मुख्यमंत्री कमलनाथ और सुपर चीफ मिनिस्टर दिग्विजय सिंह के हाथ नाकामयाबी ही हाथ लगी, उन्हीं डॉ. नरोत्तम मिश्रा के नेतृत्व में प्रदेश की भ्रष्टतम सरकार को अपदस्थ करने के लिये जिन विधायकों की टीम बनाई गई !

उनमें भूपेन्द्र सिंह व अरविंद भदौरिया जैसे रणनीतिकारों को शामिल किया गया और आखिर 23 मार्च को वह दिन आ ही गया जब सिंधिया और उनके समर्थक मंत्रियों और विधायकों के अथक सहयोग से प्रदेश के इतिहास की भ्रष्टतम कमलनाथ सरकार जिसने अपने कार्यकाल के दौरान जहां वल्लभ भवन को दलाली का अड्डा बना रखा था तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के नेताओं ने बड़े-बड़े काउंटर खोल रखते थे वहां पर मनचाही बोली लगाकर कई अधिकारियों ने अपनी मलाईदार पोस्टें प्राप्त करने में सफलता हासिल की, ता वहीं इसी दौरान कमलनाथ सरकार में चले तबादला उद्योग की तो यह स्थिति रही कि जहां मंत्री से लेकर वह कार्यकर्ता जो कांग्रेस के 15 वर्षों के सत्ता के वनवास के दौरान प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में समय पास किया करते हुए वहां आने वाले नेताओं की सेवा सत्कार में जुटे रहते थे !

उसका लाभ ऐसे कार्यकर्ताओं को मिला और उन्होंने इस तबादला उद्योग के जरिये चंद दिनों में ही उनकी आर्थिक स्थिति बदल गई जिसके चलते वह दो से तीन हजार रुपये की शर्टें पहने दिखाई दिये तो वहीं इसी कांग्रेस सरकार के चलते दो पहिया वाहन तक खरीदे और सरकार जाते-जाते चार पहिया वाहन में फर्राटे भरते नजर आ रहे हैं। यह स्थिति केवल उन कार्यकर्ताओं की नहीं रही बल्कि कई मंत्रियों और उनके नाते-रिश्तेदारों की रही जिन्होंने राजधानी के कई होटलों में अपना अड्डा जमाकर तबादला उद्योग में दलाली का काम जमकर किया, तो वहीं मंत्री भी दिखावे बीमारी के नाम पर अस्पताल में भर्ती होकर वहां तबादला उद्योग के नाम पर अधिकारियों से सौदा मोल भाव करते रहे। इस तरह के गोरखधंधे के लिये उन दिनों लोक निर्माण विभाग और जल संसाधन विभाग काफी चर्चाओं में रहा जिसमें जमकर मनमानी पदस्थापना के नाम पर अधिकारियों से जमकर वसूली की गई, तो वही जल संसाधन विभाग के मंत्री हुकुम सिंह कराड़ा ने तो तबादला उद्योग के नाम पर जो खेल खेला वह भी एक इतिहास है, कराड़ा ने एक अधिकारी के दो जिलों में स्थानान्तरण आदेश निकालने में कोई कोताही नहीं बरती, मजे की बात तो यह है कि इस तरह के गोरखधंधे में जहां मंत्री ओर मंत्री के पीए के दलालों ने उक्त अधिकारी से तबादला उद्योग के नाम पर वसूली करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, कमलनाथ सरकार के एक साल 197 दिन के कार्यकाल का यदि इतिहास पर नजर दौड़ाई जाए तो शायद ही कोई ऐसा दिन हो जिसमें मंत्रियों, उनके रिश्तेदारों और सत्ता के दलालों ने ही नहीं बल्कि कमलनाथ के ओएसडी ने भी जमकर माल कमाया, प्रदेश के राजनैतिक इतिहास में भी इस दौरान लोकसभा चुनाव के दौरान कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़ और भाजपा के नेता विजय शाह के सहयोगी अश्विनी शर्मा के यहां जब छापा पड़ा तो उस दौरान जप्त की गई !

करोड़ों रुपये की धनराशि के साथ-साथ जो दस्तावेज आयकर की टीम ने जब्त किये थे जांच के दौरान उन्होंने जो राज उगले जिसकी गूंज सीबीडीटी की जांच रिपोर्ट से उजागर हुई और उस रिपोर्ट के अनुसार अब जहां चार आईपीएस अधिकारी और 64 कांग्रेसी नेताओं के चेहरे पर पड़ा नकाब उजागर हो रहा है तो वहीं कमलनाथ की भ्रष्टतम सरकार के दौरान तमाम योजनाओं की राशि में हेराफेरी कर उसकी रकम दिल्ली में बैठे कांग्रेसी नेताओं तक ही नहीं बल्कि प्रदेश के गृह मंत्री के शब्दों में कहें तो फटी जेब वाले नेता जिन्होंने कमलनाथ सरकार को सत्ता में लाने के लिए मंदसौर में किसानों की कर्जमाफी और दस में मुख्मयंत्री को हटाने की बात कही थी उस नेता तक पहुंचने की खबरें सुर्खियों में हैं। प्रदेश के राजनैतिक इतिहास की कमनलाथ की भ्रष्टतम सरकार को अपदस्थ करने के लिये स्वर्गीय राजमाता के वंशज ज्योतिरादित्य सिंधिया की अहम भूमिका रही जिसके चलते प्रदेश की भ्रष्टतम कमलनाथ की सरकार तो अपदस्थ हुई है बल्कि कांग्रेस के उन नेताओं के चेहरे पर पड़े नकाब को उठाने का काम भी ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक विधायकों ने किया। यह अलग बात है कि अपनी भ्रष्टतम सरकार के पतन होने के बाद अब कमलनाथ जिन्होंने कांग्रेस की इस प्रदेश में नैया डुबोई आज इन दिनों काफी सक्रिय दिखाई दे रहे हैं और जो अपने कार्यकाल के दौरान वल्लभवन भवन के उसी कमरे में बैठे रहते थे आज वह सड़कों पर नजर आ रहे हैं और जिन किसानों और बेरोजगारों को भत्ता देने का झुनझुना पकड़ाकर सत्ता तो जरूर पा ली थी लेकिन उनके हक पर डाका डालने के बाद आज वह किसान व बेरोजगारों का हितैषी होने का ढोंग रचने की नौटंकी कर रहे हैं? प्रदेश के इतिहास में कमलनाथ सरकार के एक साल 197 दिन वह काले इतिहास में लिखे जाएंगे जो सरकार प्रदेश के  इतिहास में सबसे भ्रष्टतम रही, हालांकि यह एक वर्ष 197 दिन की सरकार के काले बादल कमलनाथ सरकार के नेतृत्व वाली सरकार के जरूर 23 मार्च 2020 को छंट गये लेकिन उसके परिणाम आज भी इस प्रदेश के जनमानस और कांग्रेसी नेताओं को भुगतने पड़ रहे हैं जो कांग्रेस के सत्ता के 15 वर्षों के वनवास के बाद सत्ता का सुख भोगने के लिये कमलनाथ सरकार के दौरान सक्रिय रहे और भ्रष्टतम सरकार को अपदस्थ करने के लिये ज्योतिरादित्य सिंधिया व उनके समर्थकों की भूमिका रही वह वर्ष 2020 में काफी चर्चाओं में रही।