लॉक डाउन के दौरान पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ग्रामीण क्षेत्र में गेहूं खरीदकर,कर रहे है स्टॉक

लॉक डाउन के दौरान पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ग्रामीण क्षेत्र में गेहूं खरीदकर,कर  रहे है स्टॉक


मंडी अधिकारियों ने की कार्रवाई

रायगढ़, 09 अप्रैल | पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजेश पुरुषोत्तम अग्रवाल लॉक डॉउन के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों से 250 क्विंटल (550 कट्टा ) गेहूं इकट्ठा कर ट्रक के माध्यम से अपने राइस मिल में उसका परिवहन करवा रहे थे । ना तो परिवहन की कोई अनुमति थी और ना ही इसका मंडी शुल्क पटाया गया था । ऐसे में मंडी अधिकारियों एवं प्रशासन की ओर से ट्रक को जप्त करने की कार्यवाही की गई है।आपको बता दें कि पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजेश अग्रवाल सारंगढ़ क्षेत्र के ग्राम सालर के निवासी हैं यहां वह अपना राइस मिल संचालित कर रहे हैं ।

जिसके लिए उन्होंने अमझर के कुछ किसानों से गेहूं इकट्ठा किया और उसे बिना मंडी शुल्क पटाए एवं लाक डाउन के दौरान बिना किसी वैध अनुमति के ट्रक के माध्यम से ले जा रहे थे। जिसकी सूचना मिलने पर मंडी सचिव एम एल चंद्रा एवं प्रशासन की टीम ने वाहन को रोककर ट्रक चालक से दस्तावेज मांगे जिसमें न तो मंडी शुल्क का कोई दस्तावेज मिला और ना ही परिवहन संबंधी कोई दस्तावेज दिखाए गए। ऐसे में गेहूं लदे गाड़ी को जप्त कर लिया गया है।

क्या कहते हैं तहसीलदार भगत

इस संबंध में जानकारी देते हुए सारंगढ़ के तहसीलदार भगत ने बताया कि अजेश अग्रवाल की गाड़ी को अवैध परिवहन करते हुए पकड़ा गया है। इसमें गेहूं लोड था और बिना मंडी शुल्क पटाए एवं बिना परिवहन की अनुमति के उसे अपने मेल भेजा जा रहा था जिस पर जब्ती की कार्रवाई की गई है। साथ ही जांच के पश्चात अन्य प्रावधानों के अंतर्गत भी कार्यवाही की जाएगी।

राजनैतिक रसूख पर अटकी अधिकारियों की कलम

जहां एक और अनुविभागीय प्रशासन एवं मंडी की ओर से उक्त कार्रवाई करते हुए मंडी प्रांगण में जप्त सुदा वाहन को खड़ा करा दिया गया है। वहीं राजनीतिक रसूख कार्रवाई के आड़े आ रहा है। इस पूरे मामले के संबंध में जब हमने एसडीएम से बात करनी चाही तो उन्होंने भी इस संबंध में कोई भी चर्चा करने से इनकार कर दिया। बहरहाल मंडी सूत्रों के हवाले से जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक अब तक केवल वाहन को मंडी परिसर में खड़ा कराया गया है। जबकि शेष कार्यवाही अधिकारियों को करना है।

जनप्रतिनिधियों से ऐसी उम्मीद नहीं थी

जिला पंचायत के अध्यक्ष जैसे ओहदेदार कुर्सी पर रह चुके अजेश अग्रवाल से ऐसी उम्मीद नहीं थी कि वह नियम कानूनों को तार-तार करते हुए अपने मुनाफे के लिए ऐसा कोई कार्य करेंगे बहरहाल अब यह मामला सामने तो आ चुका है लेकिन, राजनीतिक रसूख के कारण अधिकारी इस कार्यवाही को पूरे प्रावधानों के अंतर्गत किस हद तक कर पाते हैं यह देखने वाली बात होगी।