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ब्रेकिंग : पाठय पुस्तक निगम के पूर्व महाप्रबंधक अशोक चतुर्वेदी को हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत..राज्य सरकार को निर्देश कि न्यायालय की अनुमति के बगैर राज्य अन्वेषण ब्यूरो चार्जशीट पेश न करे' अगली सुनवाई 03 मई को

ब्रेकिंग : पाठय पुस्तक निगम के पूर्व महाप्रबंधक अशोक चतुर्वेदी को हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत..राज्य सरकार को निर्देश कि न्यायालय की अनुमति के बगैर राज्य अन्वेषण ब्यूरो चार्जशीट पेश न करे' अगली सुनवाई 03 मई को

जनधारा समाचार
बिलासपुर. हाईकोर्ट की एकलपीठ न्यायाधीश संजय के अग्रवाल की अदालत ने पाठयपुस्तक निगम मामले में एक फैसला देते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि बिना न्यायालय की अनुमति के राज्य अन्वेषण ब्यूरो, याचिकाकर्ता अशोक चतुर्वेदी के खिलाफ चालान पेश ना करे. मामले की अंतिम सुनवाई 3 मई को होगी.


जानते चलें कि श्री चतुर्वेदी पर पाठयपुस्तक निगम के पूर्व महाप्रबंधक अशोक चतुर्वेदी ने एसीबी की कार्यवाही को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी जिस पर विगत 5 अप्रैल को सुनवाई हुई थी और आज द्वितीय सुनवाई में न्यायालय ने यह आदेश दिया. याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर अधिवक्ता किशोर श्रीवास्तव, अधिवक्ता आशुतोष पाण्डेय, शशांक ठाकुर, ए.व्ही. श्रीधर एवं हिमांशु सिन्हा ने पैरवी की. याचिकाकर्ता के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि चूंकि उपरोक्त दोनों मामलों की कानूनी गंभीरता को ध्यान में रखते हुए माननीय न्यायालय द्वारा 30 जून 2020 को याचिकाकर्ता को राहत प्रदान की थी और यदि ऐसी स्थिति में राज्य आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो द्वारा चालान प्रस्तुत कर दिया गया तो मामले में पुनः याचिकाकर्ता को न्यायालय के समक्ष चुनौति देनी पड़ेगी जिससे न्यायालय में मामलों की संख्या में वृद्धि होगी.

याचिकाकर्ता अशोक चतुर्वेदी ने डब्ल्यूपीसीआर 273/2020 एवं 274/2020 के माध्यम से उनके ऊपर ईओडब्ल्यू एवं एसीबी के द्वारा की गई एफआईआर को चुनौती दी थी तथा एक अंतरिम राहत हेतु आवेदन पेश किया गया था जिसमे यह मांग की गई थी कि चूंकि माननीय न्यायालय द्वारा याचिकाकर्ता को पहले ही राहत प्रदान की गई थी| इसी बीच याचिकाकर्ता को ज्ञात हुआ कि राज्य अन्वेषण ब्यूरो द्वारा इनके मामले में चार्जशीट पेश की जा सकती है, जिसे बिना न्यायालय की अनुमति के पेश ना किया जाए.

इसके बाद आज विद्वान न्यायाधीश ने यह फैसला सुनाया. हालांकि इसके पूर्व राज्य सरकार की ओर से स्वयं महाधिवक्ता एवं अधिवक्ता चंद्रेश श्रीवास्तव द्वारा उपरोक्त आवेदन पर आपत्ति दर्ज कराई गई. न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया कि बिना न्यायालय की अनुमति के चालान पेश ना किया जाए तथा मामले की अंतिम सुनवाई 30 मई को होगी.