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BIG NEWS : जिंदगी न मिलेगी दोबारा थीम पर जिला अस्पताल में जागरुकता कार्यक्रम

BIG NEWS :  जिंदगी न मिलेगी दोबारा थीम पर जिला अस्पताल में जागरुकता कार्यक्रम

राजनांदगांव। जिंदगी चुनें, विजेता बनें...इस थीम पर स्वास्थ्य विभाग के द्वारा आयोजित जागरुकता कार्यक्रम में लोगों से किसी भी दशा में आत्महत्या की राह पर न बढ़ने की अपील की गई है। जनजागरुकता के लिए जिला अस्पताल में कई प्रेरक बैनर-पोस्टर भी लगाए गए हैं, जिसके माध्यम से यह प्रदर्शित किया गया है कि जिंदगी न मिलेगी दोबारा, इसलिए इसे खुलकर जिएं। किसी में यदि दिमागी असंतुलन के लक्षण दिखें तो सबसे पहले डॉक्टर की सलाह लें, जिससे पीड़ित की जान बचाई जा सके।

गुजरे कुछ दशकों में आत्महत्या की घटनाएं इतनी तेजी से बढ़ी हैं कि यह समाज में एक प्रमुख मुद्दा बन गई है और इसीलिए हर साल 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है। इस दौरान मानसिक विकारों के प्रति लोगों को सजग करने के साथ-साथ कोई भी आत्महत्या के लिए कदम न उठाए, इसके प्रयास किए जाते हैं। प्रदेश में 6 से 11 सितंबर तक आत्महत्या रोकथाम सप्ताह भी मनाया गया है।

जिला अस्पताल में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी की अगुवाई में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया गया। इस अवसर पर अस्पताल में भर्ती विभिन्न रोगों के मरीजों को मानसिक तनाव के विरुद्ध जागरूक करने का प्रयास किया गया। उन्हें जानकारी दी गई कि श्क्षण भर की भी नकारात्मक सोच जानलेवा हो सकती है, इसलिए हमेशा सकारात्मक रहने का प्रयास करें। स्वास्थ्य कर्मचारियों ने मरीजों को बताया, मन में कभी यदि आत्महत्या का ख्याल आए तो सिर्फ 5 मिनट के लिए आंखें बंद कर शांति से बैठें। अपने लोगों के बारे में सोचें कि यदि आप इस दुनिया से चले गए तो उनका क्या होगा। उदाहरण देकर भी बताया गया कि, किसी मकड़ी को जाल बनाते तो सबने देखा होगा। इससे समझा जा सकता है कि मकड़ी अपने काम में लगी ही रहती है। जाल बुनते हुए वह न थकती है और न ही कभी हार मानकर आत्महत्या करती है बल्कि जाल बार-बार उलझता है और टूटता भी है। यानी जिंदगी जीने का तरीका एक मकड़ी से भी सीखा जा सकता है। आत्महत्या रोकथाम हेतु जिला अस्पताल में आयोजित जागरुकता कार्यक्रम के अवसर पर मुख्य रूप से जिला गैरसंचारी रोग सलाहकार विकास राठौर, डिस्टि्रक्ट फायनेंस एंड लाजिस्टिक कंसलटेंट थामेस वर्मा, सहायक नोडल अधिकारी गैर संचारी रोग प्रणय शुक्ला व जिला डाटा प्रबंधक अखिलेश चोपड़ा समेत अन्य उपस्थित थे। 

इस संबंध में राजनांदगांव के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया, आत्महत्या की ज्यादातर घटनाएं मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी होती हैं। अगर लोग मानसिक तौर पर स्वस्थ होंगे तो आत्महत्याओं में भी कमी आ सकती है। जिंदगी के प्रति सकारात्मक रहें। योगा-ध्यान भी करें। मानसिक तनाव पीड़ितों के उपचार के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिनमें 104 हेल्पलाइन और स्पर्श क्लीनिक भी हैं। यहां विशेषज्ञों के माध्यम से मनोरोगियों की काउंसिलिंग की जाती है तथा आवश्यकता पड़ने पर समुचित इलाज सुनिश्चित किया जाता है। रोगियों की जानकारी पूरी तरह गुप्त रखी जाती है।