सूरजपुर- मुस्लिम दम्पति के पास नहीं है राशन कार्ड, घर में नहीं है पैसे

सूरजपुर- मुस्लिम दम्पति के पास नहीं है राशन कार्ड, घर में नहीं है पैसे

सरपंच ने 10 किलो दिया था चावल, हुआ खत्म, अब कहा से लाएं राशन, सब्जी

चंद्र प्रकाश साहू

सूरजपुर/प्रेमनगर, 17 अप्रैल। कोविड-19 कोरोना वायरस के छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था चरमाई हुई है। ना तो जॉब है और ना ही रोजगार, तिहाड़ी मजदूरों, ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत ग्रामीणों को दो वक्त की रोटी, साग सब्जी के लिए पैसे नही है। अब केवल एक ही सहारा है वो है सरकार द्वारा दिये जा रहे राहत पैकेज का। 

हमारी भेंट सूरजपुर जिले के प्रेमनगर जनपद क्षेत्र अंर्तगत ग्राम नावापारा कला के एक ग्रामीण शाहीम पिता निम्मूदीन उम्र लगभग 40 वर्ष से भेंट हुई। शाहीम का मूलतः रहने वाले कोरिया जिले के कटकोना कॉलरी क्षेत्र के रहने वाले है। ये भी 7-8 वर्षों से नावापारा कला  में अपने ससुराल द्वारा दिए गए जमीन में घर 2 कमरे का मिट्टी से घर बनाकर रहते है। इनका एक पुत्री है। जो कि करीब 5 वर्ष की होगी। स्कूल नही जाती है केवल आंगनबाड़ी में पढ़ाई कर रही है। आगे बताते है कि इनको करीब 7-8 हो चुके है। ग्राम पंचायत में रहते हुए जिसके बाद भी इनके नाम से गरीबी रेखा राशन कार्ड नही बना है और ना ही नरेगा जॉब कार्ड बना है। शाहीम आगे बताते है कि वो पहले कोरिया में एसईसीएल में गार्ड की नॉकरी  किया करते थे। इनके पिता जी जो कि बरसात में बारिश से भीगने के लिए उपयोग होने वाला छाता रिपेयर करने का काम बाजार बाजार जाकर करते है। जो अब काम नही रह गया है।

कही से काम धाम करके घर चलाते थे। किंतु इस लॉक डाऊन के दौरान बंद हो चुका है। घर मे राशन नही है पैसे भी नही है ताकि बाजार से राशन खरीदा जा सकें, ऐसे में करीब 12 दिनों पूर्व ग्राम के सरपंच द्वारा 10 किलो चावल मिला था। जो अब खत्म हो चुका है। चावल नही होने से पुनः सरपंच से चावल के लिए गुहार लगाने पहुँच, तो सरपंच, सचिव भड़क उठे और चावल नही होने की बातें कह कर बैरंग वापस लौटा दिया है। ऐसे में घर मे राशन नही, बाजार में काम नही, राशन नही कैसे कटेगा लॉक डाउन में जीवन, घर में छोटी बच्ची है।