चाटूकारिता व राजनीति के नशे में इतने चूर हो गये की सरे राह कलमकारों को पुलिस के सामने चाटे मारते रहे..

चाटूकारिता व राजनीति के नशे में इतने चूर हो गये की सरे राह कलमकारों को पुलिस के सामने चाटे मारते रहे..

दंतेवाड़ा, 27 सितंबर। नेताओं के चरण पादुकाओं को चटकारे मारने वाले चाटुकारिता के नाम पर दुम हिलाने वाले…स्वामी भक्ति का चोला ओढ़कर अपनी चाटूकारिता व राजनीति के नशे में इतने चूर हो गये की सरे राह कलमकारों को पुलिस के सामने चाटे मारते रहे..? ओर पुलिस मूकदर्शक बनी सब कुछ देखती रही..? कांकेर की सड़कों पर मुठी भर असामाजिक तत्वो के द्वारा गुड्डागर्दी के बल पर खोफ ओर आतंक का नजारा एक निर्भीक कलमकार पर दिखाने का प्रयास किया जाना..राजनीति का खोफदार चेहरा सड़को पर से गुजरने वालो ने जरूर देखा होगा..? जो राजनीति की आड़ में बेहद घटिया ओर निंदनीय कृत्य था..।शायद ये उनका निर्भीक कलम को भयभीत करने का प्रयास था..! 


कमल शुक्ला जी के साथ सड़को पर जो कायराना हमला हुवा, उन्हें बेइज्जत करने की कोशिश करने वालों को यह पता नहीं की कलम की ताकत को बाहुबली अपनी भुजाओं के बल से तोलने का दुरसाहस जो कर रहे है! उसका परिणाम क्या होगा.? इसका आभास शायद नहीं होगा.. कलम को आतंकित करने की कोशिश निश्चित रूप से उन्हें सलाखों के पीछे ले जाने से कोई नही बचा सकता..! 

पत्रकार के साथ सरेराह अमानवीय कृत्य महामूर्खता घटियापन ओर ओछी मानसिकता का प्रतीक था..! वो भूल जाये की कलमकार की कलम न आतंक से डरती है न किसी बाहुबली गुंडों से..!ओर न किसी भय के आगे झुकना ही जानती है..! कलम चलती है निष्पक्ष निर्भीक ओर दबंगाई से..! सत्ता का गुरुर इतना सर पर चढ़ गया की उसकी गर्मी में चंद राजनीति गुंडे कलमकार पर सरे आम हाथ छोड़ने का दुरसाहस करने लगे..?छतीसगढ़ की अपनी मर्यादा है उसे यूपी बिहार की तर्ज देने की कोशिश जरूर राजनीति गुंडों ने की है.! उन्हें इस बात का अहसास था की उन्हें ऐसा घिंनोने कृत्य करने के बाद राजनीति सरक्षण मिल जाएगा..? इसी दुरसाहस के साथ आकाओ के गुरुर में चंद असामाजिक तत्व सड़को पर आतंक मचाने का साहस कांकेर में सरेराह दिखाते रहे..स्थानीय पुलिस धृतराष्ट्र।