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वैज्ञानिकों ने पता लगाया लावा का समुद्र जहाँ पत्थर भी बन जाते हैं भाप

वैज्ञानिकों ने पता लगाया लावा का समुद्र जहाँ पत्थर भी बन जाते हैं भाप

वैज्ञानिकों ने एक ऐसे ग्रह का पता लगाया है जहां पर लावा का समुद्र है. वहां हवाएं सुपरसोनिक गति से चलती हैं. यानी 1236 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ज्यादा. वहां के वायुमंडल में पत्थर भी भाप बन जाते हैं. लेकिन साल 2017 में  इसके बारे में तीन साल के अध्ययन के बाद अब ये निष्कर्ष निकाले गए हैं.

जैसे हमारी धरती सूरज का चक्कर लगाती है. इस ग्रह का दो तिहाई हिस्सा लगातार गर्म रहता है. उबलता रहता है. यहां इतनी गर्मी है कि यहां पर मौजूद पत्थर भी पिघल कर भाप बन गए हैं.

धरती समेत सभी पथरीले ग्रह शुरुआत में लावे की तरह पिघले हुए समुद्र से भरे हुए थे. धीरे-धीरे करके ये गर्म लावा शांत होता गया. मजबूत पत्थर जैसा बन गया. हो सकता है कि धरती की तरह ही इस ग्रह पर भविष्य में जीवन संभव हो. 

वैज्ञानिकों ने यह अध्ययन इसलिए किया ताकि इस ग्रह के वातावरण और वायुमंडल के बारे में जानकारी इकट्ठा कर सकें. K2-141b ग्रह को केपलर स्पेस टेलिस्कोप और स्पिट्जर स्पेस टेलिस्कोप से देखा गया. उसके बाद इसके वायुमंडल, सतह, वातावरण का अध्ययन किया गया. 

ग्रह अपने तारे के बेहद नजदीक है. यानी इसके सूरज से इसे बहुत ज्यादा ऊर्जा मिलती है. शायद इसी वजह से इसकी सतह लावे के समुद्र में बदली हुई है. ये लावे के समुद्र सैकड़ों किलोमीटर लंबे और दर्जनों किलोमीटर गहरे हो सकते हैं.

जब साइंटिस्ट ने इसके वायुमंडल का अध्ययन किया तो पता चला कि यहां पर सुपरसोनिक गति से हवाएं चल रही हैं. यानी हवा की गति 1200 किलोमीटर से बहुत ज्यादा है. इसकी सतह पर पत्थर हैं. गर्मी और तेज हवा के कारण इसके पत्थर भाप बन चुके हैं. इन पत्थरों से निकलने वाली धूल वायुमंडल में फैली हुई है. 

यहां पर हवा की गति 1.75 किलोमीटर प्रतिघंटा हो सकती है. यानी धरती पर ध्वनि की गति से कई गुना ज्यादा. इस ग्रह के जिस हिस्से में सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती वहां पर मौसम ठंडा है.

धरती पर मौजूद बर्फ के ग्लेशियरों की तरह इस ग्रह पर सॉलिड सोडियम के ग्लेशियर हैं. इस ग्रह का अध्ययन करते समय वैज्ञानिक हैरान थे कि एक ही ग्रह पर इतनी ज्यादा विभिन्नताएं कैसे हो सकती हैं.