breaking news New

शिक्षकों की मनमानी : एक गांव ऐसा भी जहां छात्रों को ही इंतजार है शिक्षक की

शिक्षकों की मनमानी : एक गांव ऐसा भी जहां छात्रों को ही इंतजार है शिक्षक की

कोरिया।  छत्तीसगढ़ सरकार की पढ़ाई तुंहर द्वार के तहत चलाई जा रही मोहल्ला क्लास योजना के निर्देशों को ताक पर रखकर शिक्षकों द्वारा मनमानी की जा रही है।हालत ऐसी है कि चौथी कक्षा का बच्चा अपना नाम भी नही लिख पा रहा। जिससे सरकार के द्वारा किये जा रहे तमाम वादे खोखले नजर आते है, कोरोना काल में शिक्षकों को स्कूल परिसर व संबंधित गांव में जाकर मोहल्ला क्लास लेने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन क्षेत्र के कई शिक्षक इन निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं, जिससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय होते जा रहा है। 

गांव में दूर-दूर तक नेटवर्क न होने के वजह से ऑनलाइन पढ़ाई नही हुई,

बड़गांव कला संकुल अंतर्गत ग्राम पंचायत मनियारी के प्राथमिक विद्यालय में गरीब बच्चों का नाम दर्ज हैं।यह गांव विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है, ग्रामीणों ने बताया कि गांव में दूर-दराज तक नेटवर्क नहीं है और ना ही किसी के पास एंड्राइड मोबाइल है, जिससे ऑनलाइन पढ़ाई किया जा सके।

आज तक मोहल्ला क्लास लगा ही नही

 ग्रामीणों ने बताया कि लॉकडाउन से आज तक एक भी शिक्षक पढ़ाने नहीं आए हैं, जिससे बच्चों का भविष्य अंधकार मय होता जा रहा है, कक्षा चौथी तक के बच्चों को अपना नाम तक ठीक ढंग से लिखने नहीं आता, लेकिन शिक्षक सुध नहीं ले रहे हैं। इसी प्रकार ग्राम पंचायत मनियारी के अंतर्गत आने वाले ग्राम बडेरा ,  जनौरा ,गांव की स्कूल बन्द पाई गई ग्रामीणों एवं ग्राम पंचायत सरपंच, उप सरपंच ने बताया गुरुजी 26 जनवरी को आए थे और स्कूल में झंडा फहराकर वापस चले गए और दोबारा नही आए,

इस संबंध में बीईओ विनीत सिंह ने कहा जांच के बाद शिक्षकों पर कार्यवाही की जाएगी

छत्तीसगढ़ शासन और सभी शिक्षकों के द्वारा, छात्रों की पढ़ाई प्रभावित ना हो, इसके लिए पढ़ाई तुंहर  योजना द्वारा बच्चों की पढ़ाई शुरू की गई। जिससे छात्र छात्राएं घर बैठे ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से अपनी पढ़ाई नियमित रख के साथ ही शिक्षकों ने भी अपने तरफ से हर संभव प्रयास किया कि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित ना हो। लॉकडाउन के 1 महीने के बाद जब हमें लगा कि शायद अब स्कूल नहीं खुलने वाला है तब मैंने फोन पर पालको से चर्चा कर उन्हें समझाइश दी कि वह घर पर ही छात्रों की पढ़ाई को नियमित रूप से संचालित रखें। अपने घर के बच्चों के साथ साथ आसपास के बच्चों को एक निश्चित दूरी पर बैठा कर उन्हें पढ़ाएं और यदि उन्हें पढ़ाने में कहीं भी समस्या होती है तो वह हमसे फोन करके संपर्क करते हैं। इसका मुझे बहुत ही सकारात्मक परिणाम मिला कुछ पालक बहुत ही सक्रिय हुए और वे अपने घर के बच्चों सहित आस पड़ोस के बच्चों को घर में बैठा कर पढ़ाने लगे।