पैसे लेकर पॉजिटिव कोरोना रिपोर्ट देने का हुआ बड़ा खुलासा, इस अस्पताल में चलता था पूरा खेल

पैसे लेकर पॉजिटिव कोरोना रिपोर्ट देने का हुआ बड़ा खुलासा, इस अस्पताल में चलता था पूरा खेल

एक अस्पताल में नया घोटाला सामने आ गया है. अब यहां कोरोना पॉजिटिव का फर्जी प्रमाण पत्र बिकने लगा है. इस धंधे में अस्पताल का कर्मी शामिल है. याद रहे कि हाल ही में कोरोना किट का भी खुलासा किया था. अब नये मामले ने एक बार फिर यहां दाग लगा दिया है.

जानकारी के अनुसार सदर अस्पताल के एक कर्मचारी ने फ्लू काॅर्नर से निजी कंपनी के एक कर्मी को कोरोना पॉजिटिव होने का प्रमाण पत्र जारी कर दिया. इस पर प्रभारी का हस्ताक्षर और विभाग का मुहर भी लगा था. उक्त कर्मी ने वो सर्टिफिकेट अपनी कंपनी में देकर खुद के कोरोना पॉजिटिव होने की गुहार लगायी.

पहले तो कंपनी के अधिकारियों ने अपने सहकर्मी के प्रति सहानुभूति जतायी और उसे सुरक्षित घर में रहने को कहा. इस घटना के एक-दो दिन के बाद ही उसी कंपनी के अन्य तीन कर्मियों ने भी खुद को कोरोना पॉजिटिव बताते हुए वैसा ही सर्टिफिकेट लाकर अपने बॉस को दिया. इस पर कंपनी के अधिकारियों को शक हुआ. उन लोगों ने संबंधित कर्मचारियों को तो कुछ नहीं कहा, पर चारों सर्टिफिकेट के साथ एक अधिकारी को सदर अस्पताल के प्रभारी डॉ एके मंडल के पास भेजा.

डॉ मंडल ने सर्टिफिकेट पर अपने हस्ताक्षर की नकल एक नजर में पहचान ली. उन्होंने तत्काल सर्टिफिकेट बनाने की जवाबदेही निभानेवाले कर्मचारी पुरुषोत्तम झा को बुलवाया. पर उनके मातहत ने बताया कि वह घर चले गये हैं और उनका मोबाइल भी बंद है. डॉ मंडल ने मामले की जांच का आदेश जारी किया है.

आदमपुर के ऋषि राज रंजन 12 अक्टूबर को सदर अस्पताल के फ्लू काॅर्नर गये. वहां तैनात चतुर्थवर्गीय कर्मी पुरुषोत्तम झा ने उनकी जांच की. उनका टेंप्रेचर 98 डिग्री के आसपास था. यानी पहली जांच में उनको कोरोना का कोई भी लक्षण नहीं था. इसके बाद खेल शुरू हुआ. पुरुषोत्तम झा ने ऋषि को राज्य स्वास्थ्य समिति के पर्चा पर उसके कोरोना पॉजिटिव होने की बात लिख कर उसे दे दिया. पॉजिटिव का प्रमाण पत्र सही दिखे इसके लिए अस्पताल प्रभारी डॉ एके मंडल का फर्जी हस्ताक्षर कर उनका मुहर भी मार दिया, लेकिन पुरुषोत्तम ने गलती से होम कोरेंटिन की अवधि 21 दिन लिख दिया. याद रहे अब मरीज सिर्फ 10 दिन तक घर या अस्पताल में रहता है. इसके बाद ऋषि ने वह प्रमाण पत्र अपने कार्यालय में जमा कर दिया.

यह मामला प्रकाश में आने के बाद यह शक किया जा रहा है कि चुनाव ड्यूटी से नाम हटाने के लिए कुछ लोगों ने ऐसे फर्जी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया होगा. कमाई होती रहे इसके लिए उसने नकली मुहर भी बनवा ली. अब, जांच में ही इस मामले का खुलासा हो पायेगा कि उक्त कर्मी ने कितने लोगों को इस तरह की रिपोर्ट जारी की है.