खबर का असर : अब मिलेगा शुद्ध पेयजल, 18 साल बाद निगम ने बदला प्लांट का मीडियम, 2003 में जोगी सरकार ने बनवाया था पहला फ़िल्टर प्लांट

खबर का असर : अब मिलेगा शुद्ध पेयजल, 18 साल बाद निगम ने बदला प्लांट का मीडियम, 2003 में जोगी सरकार ने बनवाया था पहला फ़िल्टर प्लांट

रायपुर. नगर निगम प्रशासन ने फ़िल्टर प्लांट के मीडियम को बदलने का काम शुरू कर दिया है. 18 सालों के बाद यह बदलाव किया जा रहा है जबकि हर चार साल में प्लांट के मीडियम को बदला जाना चाहिए. खैर इस बदलाव के बाद राजधानीवासियों को गंदे, बदबूदार, कीड़े युक्त पानी से निजात मिल सकेगी. हालांकि नगर निगम तब जागा जब पीलिया से अब तक 6 मौतें होने का दावा किया जा रहा है साथ ही अब पीलिया के पौने चार सौ से ज्यादा मरीज सामने आए हैं.

जानते चलें कि दैनिक आज की जनधारा पिछले पन्द्रह दिनों से गंदे पेयजल और उससे होने वाली पीलिया की बीमारी को लेकर जागरूकता भरी खबरें प्रकाशित करता आ रहा है जिसके बाद नगर निगम के कर्ताधर्ताओं पर असर हुआ और अब यह बदलाव किया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक जब छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हुआ, उसके दो साल बाद रायपुर शहर को शुद्ध पानी देने के लिए जोगी सरकार ने 2002 में सबसे पहले 80 एमएलडी का पहला फ़िल्टर  प्लांट बनवाया था वहीं दूसरा फ़िल्टर प्लांट 2008 में 180 एमएलडी का बनाया गया।

पिछले 18 और आठ वर्षों में दोनों ही फ़िल्टर प्लांटों के एमएलडी नहीं बदले गए। जबकि जानकारों का कहना है कि हर तीन-चार सालों में मीडियम को बदलना ही चाहिए। प्लांट में जहां पर मीडियम लगा होता है जहां पर रेती, गिट्टी, बजरी डाली जाती है जोकि पानी को साफ करने में अहम् भूमिका निभाती है। लेकिन पानी को बेहतर फ़िल्टर करने के लिए हर तीन-चार साल में मीडियम के साथ ही रेती, गिट्टी, बजरी को भी बदलना होता है। स्थिति ये बन चुकी है कि मीडियम के आसपास डाली गई रेती, गिट्टी, बजरी में कीड़े पनपने लगे थे जिसमे कीड़ों के अंडे भी पनप रहे थे जिससे लगातार कीड़े पैदा हो रहे थे जो पानी के साथ मिलकर लोगों के नलों में आ रहे थे।

ठेकेदारों के भरोसे सोते रहे जिम्मेदार
बता दें कि राजधानी में पीने के पानी में कीड़े युक्त बदबूदार पानी आने की समस्या बनी रहती है, जिसकी वजह से हर वर्ष गर्मी आते ही पीलिया के मरीज अचानक से बढ़ जाते हैं। जिसे ठीक करने के लिए न तो पीलिया संक्रमित इलाकों के पार्षदों ने और न ही मोटी-मोटी तनख्वाह ऐठने वाले अधिकारियों ने ये जहमत उठाई कि समय-समय पर प्लांट की निगरानी करते रहें, बल्कि ठेकेदारों के साथ मिल बांट कर फर्जी जांच रिपोर्ट बनाते रहे।

अधिकारियों की गैर जिम्मेदारी की वजह से पिछले पखवाड़े भर के भीतर पीलिया के मरीजों की संख्या सात से बढ़कर पौने चार सौ हो गई है। मोवा, भाठागांव, प्रेमनगर, दलदल सिवनी, चगोराभाटा, आमापारा, अटारी ये ऐसे इलाके हैं जहां पर नालों से कीड़े वाला गंदा पानी आ रहा है, पानी में कीड़ों के साथ ही कई खतरनाक एलकेबीएल, सियेला जैसे मॉल में पाए जाने वाले खतरनाक बैक्टीरिया भी आ रहे हैं जो की मल में पाए जाते हैं। २०१४ में पीलिया से 21 लोगों की मौत हो चुकी है, इसके साथ ही हर साल मरने वालों की संख्या दहाई के आकड़े के आसपास रहता है।

बिजली काटने का बचकाना आदेश जारी किया गया
जनधारा की लगातार खबरों को चलाये जाने से जब भंडाफोड़ हुआ तो भाठागांव के फ़िल्टर प्लांट में पीएचई विभाग के अधिकारी पहुंचे. बाद में आयुक्त ने खुद मोर्चा संभाला और तब जाकर जांच के दौरान मीडियम में कीड़े पनपने की खबर मिली। इसके पहले फोटो खिचवाने वाले नेताओं से लेकर अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं थी। 15 लाख से ज्यादा की जनसंख्या को इस फ़िल्टर प्लांट से पानी सप्लाई किया जाता है। जिसमे से दो से अढ़ाई लाख की पापुलेशन ऐसी है जो फ़िल्टर प्लान से सप्लाई के पानी को सीधे पीतें हैं, मीडियम बदल जाने से इन सभी को फायदा पहुंचेगा। इस बीच सुबह एक घंटे के लिए बिजली काटने का आदेश भी जारी किया गया।

वर्जन..

जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन फिलहाल अभी प्लांट के मीडियम को बदलने के साथ ही पुरे शहर की पाइप लाइन बदलवाई जाएगी, हर घर में शुद्ध पानी पहुंचेगा : सौरभ कुमार, आइएएस एवं आयुक्त, नगर निगम रायपुर 


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