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संविधान से ही स्वाभिमान और जीवन है: डांगी

संविधान से ही स्वाभिमान और जीवन है: डांगी

Ramesh Gupta/बिलासपुर। आईजी रतनलाल डांगी ने कहां की आज का दिन हम सब  भारतीयों के लिए विशेष दिन है। आज का दिन हजारों सालों की गुलामी से मुक्ति का दिन है। यह वो दिन है जब आपका अपना आईन बना है ,जो आपके अपनों के द्वारा समस्त भारतीय जनता के कल्याण के लिए बिना किसी जाति,धर्म ,लिंग एवं क्षेत्र का भेदभाव किए बनाया गया है।

देश का संविधान हर नागरिक के लिए प्राणवायु के समान है जैसे कुछ समय के लिए प्राणवायु नहीं मिलती है तो व्यक्ति जीवित नहीं रह पाता है वैसे ही यदि संविधान एक क्षण के लिए भी उपलब्ध नहीं हो तो व्यक्ति का जीना भी मुश्किल हो जाएगा। संविधान का संधि विच्छेद होता है सम् प्लस विधान यानी वो कानून जो सबको समान समझता है। संविधान वो सर्वोच्च कानून है जिसके अनुसार न केवल देश को संचालित होता है बल्कि आम नागरिक के लिए सुरक्षा कवच का भी काम करता है। संविधान ही समस्त कानूनों का स्रोत है।संसद भी ऐसा कोई कानून नहीं बना सकती जो संविधान का अतिक्रमण करे।

यह संविधान ही है जिसके बल पर एक आम नागरिक भी सरकारों से भी लड़ जाता है। यह देश के नेतृत्व के लिए दिशा निर्देशक भी है। मैं आज इस अवसर पर संविधान सभा के समस्त  सदस्यों को नमन करता हूं और कृतज्ञता प्रकट करता हूं कि उन्होंने ऐसा संविधान दिया जिसके बदौलत मैं आज इस पद तक पहुंचा हूं और आपसे बात कर सका हूं।यह बाबा साहब के नेतृत्व में लिखित उस संविधान का ही कमाल है कि एक साधारण परिवार में पैदा होने वाला व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री एवम् देश का राष्ट्रपति बना है। इसी की बदौलत महिलाशक्ती भी देश की प्रधान मंत्री , राष्ट्रपति एवम् न्यायाधीश बनी है। अन्यथा हमारे यहां महिलाओं के बारे में तुलसीदास जी ने भी समाज की सोच को अपने साहित्य मे रेखांकित किया है। 

मेरे जैसे लाखों लोग मजदूर परिवार में पलने के बावजूद सर्वोच्च पदो तक पहुंच रहे है। मेरा मानना है कि भारतीय संविधान आपकी उन्नति प्रगति का घोषणा पत्र है।आप जब तक इस दुनिया में है तब अपने इसे अपने पास रखिए और पढ़िए क्योंकि इसमें ऐसे ऐसे मंत्र है जिसको जानने समझने से आप हर प्रकार के संकटों से बच सकते है ।

अब सवाल आता है कि संविधान दिवस की मनाया क्यो जाता है। संविधान के जनक बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर और संविधान के महत्व को समझाने के लिए प्रत्येक वर्ष 26 नवंबर के दिन संविधान दिवस मनाया जाता है। जिसमें लोगों को यह बताया जाता है कि आखिर कैसे हमारा संविधान हमारे देश की तरक्की के लिए महत्वपूर्ण है तथा डॉक्टर अंबेडकर को हमारे देश के संविधान निर्माण में किन किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।

संविधान दिवस पर हम आने वाली पीढ़ियों को हमारे देश के संविधान के महत्व को समझा सके जिससे कि वे उसका सम्मान करें। साथ ही हमें वर्तमान से जोड़ने का कार्य करता है ।

जब लोग जनतंत्र का महत्व दिन-  प्रतिदिन भूलते जा रहे हैं। तब यही एक तरीका है जिससे अपना कर हम अपने देश के संविधान निर्माताओं को सच्ची श्रद्धांजलि प्रदान कर सकते हैं। संविधान दिवस के माध्यम से हम आने वाली पीढ़ियों को अपने देश के स्वतंत्रता संघर्ष और इसमें योगदान देने वाले क्रांतिकारियों के विषय में बताएं ताकि वह इस बात को समझ सके कि आखिर कितनी कठिनाइयों के बाद हमारे देश को स्वतंत्रता की प्राप्ति हुई है।

 संविधान दिवस को केवल औपचारिक रूप से नहीं मनाना चाहिए बल्कि अपने देश के जिम्मेदार नागरिक होने के नाते यह हमारा कर्तव्य है कि हम इस दिन को पूरे जोश एवम् उत्साह के साथ मनाएं और यही हमारे देश के संविधान निर्माताओं को हमारी ओर से दी जा सकने वाली सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

हमारा यह मात्र कर्तव्य ही नहीं बल्कि  दायित्व भी है कि हम इस दिन को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाए। इस दिन का प्रचार प्रसार करने के लिए जागरूकता अभियान चला सकते हैं। हमें लोगों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने की भी आवश्यकता है। संविधान की प्रस्तावना के विषय में लोगों को अधिक से अधिक जानकारी देनी चाहिए ताकि लोग संविधान का सार समझ सके। विद्यालयों में सेमिनार व्याख्यान का आयोजन करके भी हम बच्चों को संविधान के बारे में जानकारी दे सकते हैं। सोशल मीडिया पर भी अभियान चलाकर संविधान दिवस के विषय में लोगों को जागरूक कर सकते हैं। 

संविधान का हमारे लिए क्या महत्व है ?

बाबा साहब अंबेडकर के नेतृत्व में संविधान सभा ने अपने समय का सबसे प्रगतिशील संविधान बनाकर गैर बराबरी आधारित सामाजिक ढांचे को नष्ट किया एवं एक समतामूलक समाज की स्थ…