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जोन 3 में हुए वेतन घोटाले का फरार मास्टर माइंड आरोपी गंगाराम सिन्हा और उनका साला शुभम सिन्हा गिरफ्तार

जोन 3 में हुए वेतन घोटाले  का  फरार मास्टर माइंड  आरोपी गंगाराम सिन्हा और उनका  साला शुभम सिन्हा गिरफ्तार

रायपुर, 27 मार्च।   नगर निगम के जोन में  हुए वेतन घोटाले का मास्टर माइंड फरार मुख्य आरोपी गंगाराम सिन्हा और उनके साला शुभम सिन्हा को सिविल लाइन पुलिस ने कल शाम गिरफ्तार कर लिया हैं | नगर निगम  के जोन 3 में पांच सालों तक करीब 72 लाख रूपये का वेतन घोटाला किया था जिसमे गंगाराम सिन्हा की मुख्य भूमिका रही हैं | साथ ही प्लेसमेंट एजेंसी कप्यूटर आपरेटर के पद पर रही कर्मचारी नेहा परवीन अब तक फरार बताया जा रहा हैं | थाना प्रभारी आर के मिश्रा से मिली जानकरी के मुताबिक गिरफ्तार इन दोनों आरोपियों के जेल भेज दिया गया हैं | उन्होंने बताया कि इस वेतन घोटाला उजागर होने के बाद से ही मुख्य आरोपी गंगाराम  सिन्हा  फरार हो गया था | जिस पर पुलिस की कई टीमे अलग- अलग जगहों पर छापेमार कार्यवाही कर रहे थे | इसी बीच मुखबिर की सूचना पर जिले महासमुंद के ओड़िसा बार्डर में दोनों आरोपी छिपे हुए थे जिसे थाने में गिरफ्तारी देने के लिए कहा गया | इसके बाद इन दोनों आरोपियों को आज कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया हैं | बाकी अन्य फरार लोगों की पतासाजी की जा रही हैं |

  दरअसल में आरोपी  गंगाराम सिन्हा आरटीजीएस के दौरान अतिरिक्त नाम जोड़कर अपने रिश्तेदार के खाते में पैसा भेज देता था। वर्तमान में वह पांच लोगों के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से पैसे भेजता था। जोन में पदस्थ अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगती थी। आरोपित जितने लोगों के खाते में आरटीजीएस करता था उनका एटीएम कार्ड अपने पास रखता था। जिन पांच खाते में पैसा डालता था उसमें तीन उसके रिश्तेदार और दो कंप्यूटर आपरेटर नेहा परवीन के घर वाले हैं। आरोपित गंगाराम द्वारा इसके बदले में नेहा परवीन को प्रतिमाह 15 हजार रुपये देने की बात सामने आई है।

निगम से मिली जानकारी के अनुसार जोन-3 में करीब 252 कर्मचारी काम करते थे। सभी कर्मचारियों का वेतन आरटीजीएस के माध्यम से सीधे खाते में जाता था। कर्मचारियों के खाते में पैसा ट्रांसफर करने से पहले स्थापना लिपिक फिर आडिटर उसके बाद एकाउंटेंट के बाद जोन कमिश्नर के हस्ताक्षर के बाद कर्मचारियों के खाते में वेतन जाता था।

इस बीच वह एकाउंटेंट से मिलकर 252 की जगह संख्या बढ़ा देता था और किसी को भनक तक नहीं लगती थी। जिससे कर्मचारियों के साथ ही आरोपित द्वारा दिए गये खाते में भी पैसा चला जाता था और वह आसानी से पैसा निकाल लेता था। आरोपित पिछले चार सालों से ऐसा कर रहा था।

 पुलिस के बयान में सामने आया है कि वर्ष 2017-18 में जोन-3 में कमिश्नर के रूप में महेन्द्र कुमार पाठक पदस्थ थे। इनके कार्यकाल में आरोपित ने अपनी पत्नी का नाम जोड़कर सबसे पहले एक लाख 16 हजार रुपये निकाले थे। उसके बाद जोन कमिश्नर के रूप में रमेश जायसवाल पदस्थ हुए इनके कार्यकाल में बेटे और साले का नाम जोड़ा तथा तीसरे नंबर पर अरूण साहू जोन कमिश्नर हुए इनके कार्यकाल में नेहा परवीन की मां और बहन का नाम जोड़कर करीब 21 लाख रुपये निकाले गए। अंत में प्रवीण सिंह गहलोत के कार्यकाल में भी आरोपित का खेल लगातार जारी रहा।