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मोदी सरकार लोगों की जान बचाने में अक्षम : सुप्रीम कोर्ट लगाए राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल - डॉ. चन्दर सोनाने

मोदी सरकार लोगों की जान बचाने में अक्षम : सुप्रीम कोर्ट लगाए राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल - डॉ. चन्दर सोनाने


अमेरिका , ब्रिटेन , इजराइल आदि देशों ने अपने - अपने देशों में तेज गति से टीकाकरण कर कोरोना संक्रमण को रोका और  लोगों की जान बचाने में लगभग सफलता प्राप्त कर ली है । और हमारे देश भारत में मोदी सरकार ने तेज गति से टीकाकरण करने की बजाय टीकाकरण की जटिल और अव्यवहारिक नीति अपनाई जिससे दिनों दिन टीकाकरण में अत्यंत कमी आ गई है । देश में मार्च में आई कोरोना की दूसरी लहर ने देशभर में हाहाकार मचा दिया है । पुण्य प्रदान करने वाली गंगा नदी शवों से पट गई है। देश में कोरोना के विश्व में सर्वाधिक मरीज आने लगे और मौतें होने लगी है । अस्पतालों में बेड ,  ऑक्सीजन , जीवन रक्षक दवाइयों , वेंटिलेटर और आईसीयू की कमी से हर पाँच मरीजों में से एक कि सांसें टूट रही है । मोदी सरकार देश के लोगों की जान बचाने में पूरी तरह अक्षम सिद्ध हो चुकी है । देश की ऐसी आपात स्थिति में सुप्रीम कोर्ट को लोगों की जान बचाने के लिए आगे आना चाहिए और देश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल लगाकर देश की बिगड़ चुकी हालात को पटरी पर लाना चाहिए !

सुप्रीम कोर्ट ने देश की बेहाल हालात को देखते हुए जब पिछले दिनों स्वतः संज्ञान लेकर केंद्र सरकार से सवालों की झड़ी लगाकर अपना हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए तो ये समझा गया कि अब तो मोदी सरकार अपनी गलती सुधार लेगी ! किन्तु देश के आम लोगों को उस समय निराशा हुई , जब केंद्र सरकार में हाल ही में अपना जवाब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया ! मोदी सरकार ने कोर्ट में अपनी गलती सुधारने की बजाए अधूरे तथ्यों , बेतुके तर्कों और संविधान की गलत व्याख्या कर अदालत और देश के लोगों को गुमराह करने का असफल प्रयास किया ! यही नहीं मोदी सरकार ने स्पष्ट रूप से यह भी कह दिया कि केंद्र सरकार की टीकाकरण नीति में कोई भेदभाव नहीं किया गया है  और कोर्ट को यह भी कह दिया गया कि वह केंद्र सरकार के इन कार्यों में कोई दखल नहीं दें ! अब सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार द्वारा दिये गए हलफनामे का अध्ययन कर अपना निर्णय देगा ।

अब जरा देश की कोरोना की हालत पर एक नजर दौड़ा ली जाए । देश की वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2021 को वर्ष 2021 - 22 का बजट प्रस्तुत करते हुए देश के सभी लोगों को टीका लगाने के लिए 35,000 करोड़ रु का प्रावधान करते हुए कहा था कि यह अंतिम नहीं है , जरूरत होगी तो और भी राशि दे जाएगी। किन्तु असल में हुआ क्या ? अमेरिका ने अपनी 46 प्रतिशत आबादी को पहला डोज और 36 प्रतिशत आबादी को दूसरा डोज दे कर करीब करीब कोरोना पर नियंत्रण सा कर लिया है । और अपने देश में 16 जनवरी से 15 मई तक चार माह में 10.71 प्रतिशत आबादी को पहला डोज और केवल 3.15 प्रतिशत आबादी को ही दोनों डोज लग पाए हैं । मोदी सरकार 45 साल से ऊपर के लोगों को टीका लगाने के लिए तो दो वैक्सीन ख़रीद कर राज्यों को निःशुल्क दे रही है किन्तु टीकाकरण के तीसरे चरण में 18 साल से 45 साल तक के लोगों को 1 मई से टीका लगाने की घोषणा करके अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट गई । मोदी सरकार ने राज्यों को इन उम्र के लोगों को टीका देने से मना कर दिया और कहा कि राज्य खुद वैक्सीन निर्माता कंपनी से मोलभाव कर के टीके खरीदे और अपने राज्य के लोगों को निःशुल्क या पैसे लेकर टीके लगाए ! इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि देश के 15 राज्यों ने अपने राज्यों में टीके नहीं मिलने के कारण 1 मई से टीकाकरण शरू करने से ही मना कर कहा कि जब उन्हें टीके मिल पाएँगे तभी लगा पाएंगे । देश के केवल 9 राज्यों ने अपने राज्यों में कुछ ही केंद्रों में टीका लगा कर औपचारिकता निभाई । यही नहीं जहाँ अप्रैल माह में देश में रोज 35 लाख टीके लग रहे थे , वहीं मई माह में यह संख्या घटकर आधी रह गई । यही नहीं 9 मई को देशभर में केवल 6.89 लाख टीके ही लग पाए , क्योंकि केंद्र 45 साल के ऊपर के लोगों के लिए जो टीके राज्यों को दे रही थी , उसमें भी उसने बहुत कमी कर दी । इस कारण रोज टीकाकरण केंद्र से लोग निराश लौट रहे हैं । इसे एक उदाहरण से हम समझते हैं । केंद्र सरकार ने राज्यों को मई माह में अभी तक टीके के 1 करोड़ 65 लाख डोज दिए हैं और उसने कहा है कि इसी माह में राज्यों को 2 करोड़ 35 लाख डोज और देंगे । इसे भी मान लेते हैं तो मई माह में कुल डोज हुए 4 करोड़ । यानी मोदी सरकार में राज्यों को मई माह में  प्रतिदिन केवल 11 लाख 42 हजार 857 टीके ही लगाने को दिए हैं ! और केंद्र सरकार रोज कह रही है कि हम राज्यों को पर्याप्त टीके दे रहे हैं ! है ना मजेदार ! अर्थात मोदी सरकार ने राज्यों को देने वाले टीके में ही दो तिहाई की कमी कर दी है !

और देखें , देश में अप्रैल माह में जहाँ रोज 3 लाख से ऊपर मरीज आ रहे थे , वहीं मई माह में मरीजों की संख्या बढ़ कर 4 लाख से ऊपर पहुँच गई। विश्व में रोज मिलने वाले मरीजों की यह संख्या सर्वाधिक है ! मौतों ने भी रोज रिकार्ड बनाना शुरू कर दिया है । देश में 10 मई से 15 मई तक लगातार छह दिन से रोज 4 हजार से ज्यादा मौतें हो रही है ! देश में रोज पॉजिटिविटी रेट 22 प्रतिशत से ज्यादा आ रही है ! यानी देश में हर पाँच मरीजों में से एक मरीज की मौत हो रही है ! विश्व के अन्य देशों में जहाँ मरीज और मौतों की संख्या में तेज टीकाकरण से कमी आ रही है , वहीं अपने देश में टीकाकरण की कमी से रोज मरीजों और मौतों की संख्या में वृद्धि हो रही है ! हाल ही में देश में गंगा किनारे उत्तर प्रदेश और बिहार की करीब 1140 किलोमीटर में 2000 से ज्यादा शव तैरते हुए और रेत में अध दफनाए हुए मिले ! यह स्थिति अत्यंत ही दर्दनाक और भयावह है !  यह देश के गाँवों में भी फैल चुके कोरोना का ज्वलंत उदाहरण है ! यह देश का दुर्भाग्य नहीं तो क्या है ? देश के सरकारी अस्पतालों में बेड , ऑक्सीजन , जीवन रक्षक दवाइयों , उपकरणों और संसाधनों की कमी से रोज लोग बेमौत मरने के लिए अभिशप्त हैं ! यही नहीं मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की जानकारी के अनुसार देश में 6 लाख डॉक्टर और 20 लाख नर्सों की कमी है । देश में 11082 आबादी पर एक डॉक्टर है । विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानक 1000 लोगों पर एक डॉक्टर का है । और 670 लोगों पर केवल एक नर्स है । देश के जिला मुख्यालय के अस्पतालों में ही अनेक डॉक्टर और नर्सों की बहुत कमी है । गाँव के हालात तो और भी बुरे हैं । ऐसी हालत में , कोरोना की दूसरी लहर में , अब जब कोरोना ग्रामीण क्षेत्रों में भी पहुँच चुका है , कोरोना तीसरी लहर में मौत का क्या तांडव मचाएगा ? यह कल्पना से भी बुरा होने वाला है !

अब जब मोदी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामा से यह सिद्ध हो चुका है कि वह सुप्रीम कोर्ट की मंशा के अनुरूप कुछ करना ही नहीं चाहती तो देश के अवाम की जान बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट कुछ  सख्त कदम उठाए ! वह देश की बेहाल हालत को सुधारने और आम लोगों की जान बचाने के लिए देश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल लगाने के निर्देश दे सकती है । इस दौरान दो लाख रु का विशेष प्रवधान किया जाना चाहिए । यह राशि इस वर्ष के बजट में से देश के विभिन्न विभागों के नए निर्माण कार्यों पर रोक लगा कर आसानी से प्राप्त की जा सकती है। देश का इस वर्ष का कुल बजट 34 लाख 83 हजार 236 करोड़ रु का है । इसलिए दो लाख रु की राशि लोगों की जान बचाने के काम में लगाई जा सकती है। निर्माण कार्य तो बाद में भी होते रहेंगे । इस राशि से देश के सभी जिला मुख्यालय के सभी सरकारी अस्पतालों और गाँवों में सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में खाली पड़े डॉक्टर , नर्सों आदि पदों की संविदा के आधार पर तुरंत नियुक्तियाँ की जा सकती है। इसके साथ ही इन सभी अस्पतालों के लिए जरूरी सभी दवाइयों , उपकरणों और संसाधनों का इंतजाम किया जा सकता है। इसके साथ ही देश में तेज गति से टीकाकरण करने के लिए नए सिरे से कार्य योजना बनाई जा सकती है। इसमें राज्य सरकार का कोई रोल नहीं रहे और केंद्र सरकार ही सभी टीके खरीदे और देश की पूरी आबादी 130 करोड़ लोगों को दो डोज के मान से टीका लगाने की योजना बने। इस प्रकार कुल 260 करोड़ डोज की जरूरत होगी। एक टीके की कीमत 150 रु के मान से कुल खर्च होगा केवल 39,000 करोड़ रु टीके के लिए ही  बजट में 35,000 करोड़ रु का तो पूर्व से प्रावधान है ही। आपदा काल में जब सरकार अपने कर्तव्य के पालन में असफल हो जाए तो लोगों की जान बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 32 और 142 के तहत देश के सभी लोगों को फ्री वैक्सीन देने का निर्देश दे सकती है । इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत देश के लोगों को जीवन का अधिकार यानी सभी को निःशुल्क टीका लगाने का आदेश देकर देशवासियों पर उपकार कर सकती है। अब देश के नागरिक सुप्रीम कोर्ट से ही अंतिम आस लगाए बैठी है!